फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व साहित्य का आकाश: डॉक्टर जिवागो- युद्ध बीच कविता

सार

  • रूस के बोरिस पास्तरनाक के उपन्यास ‘डॉक्टर जिवागो’ ने रूस में तूफान ला दिया। काफी समय तक इस किताब को रूस में प्रतिबंधित रखा गया। 1988 तक इस उपन्यास पर रूस में पाबंदी थी।
विज्ञापन
किताबों की दुनिया - फोटो : Adobe Stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कई बार आप दुनिया में लेखक के रूप में सम्मानित होते हैं, पर अपने देश में प्रतिबंधित। सलमान रुश्दी, नादीन गोर्डीमर, ज्यां पॉल सार्त्र, मोराबिया, टोनी मॉरीसन आदि तमाम लेखक इस श्रेणी में आते हैं। रूस के बोरिस पास्तरनाक ऐसे ही लेखक हैं। उनके उपन्यास ‘डॉक्टर जिवागो’ ने रूस में तूफान ला दिया। काफी समय तक इस किताब को रूस में प्रतिबंधित रखा गया।

विज्ञापन


1988 तक इस उपन्यास पर रूस में पाबंदी थी। लेखन में दम था और इसी के फलस्वरूप बोरिस पास्तरनाक को 1958 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया। कई सत्ता बहुत क्रूर होती है। उन्हें पुरस्कार ग्रहण करने जाने की अनुमति नहीं मिली। हालांकि लोग चोरी-छिपे उपन्यास पढ़ रहे थे। दबाव के कारण उन्हें पुरस्कार को नकारना पड़ा।

उपन्यास ‘डॉक्टर जिवागो’ इसके बाद भी 30 साल तक रूस में प्रतिबंधित रहा। केवल 1989 में उनके बेटे येवगेनी बोरिसोविच को स्टॉकहोम जाकर पिता का पुरस्कार लाने की अनुमति मिली।
विज्ञापन


रूसी भाषी बोरिस पास्तरनाक का जन्म 10 फरवरी 1890 को मॉस्को में हुआ था। नोबेल समिति ने कहा, ‘महान रूसी महाकाव्यात्मक परम्परा एवं समकालीन लयात्मक काव्य दोनों में महत्वपूर्ण उपलब्धि हेतु’। दो साल के भीतर 70 साल की उम्र में 30 मई 1960 को कैंसर से उनकी मृत्यु हो गई। अब उनका घर म्युजियम है। उनका पूरा नाम बोरिस लिओनिडोविच पास्तरनाक था।

आखिर क्या है ‘डॉक्टर जिवागो’ में कि रूस की सत्ता ने इसे रोका?

यह उपन्यास एक संवेदनशील मनुष्य एवं चल रहे युद्ध की विशद झांकी है। नायक युवा यूरी जिवागो एक डॉक्टर एवं कवि है। इस व्यक्ति की संवेदनशीलता इसके लिए वरदान है, शाप भी। चूकि लेखक स्वयं कवि है, उपन्यास काव्यात्मक गुण से भरपूर है।

पास्तरनाक की रचनाएं प्रकृति, जीवन, मनुष्यता और प्रेम का चित्रण हैं। ‘डॉक्टर जिवागो’ में भी ये सारी विशेषताएं मिलती हैं। यह 1905 के सोशलिस्ट आन्दोलन से प्रारंभ होकर द्वितीय विश्वयुद्ध तक चलता है। रचना बहुत सूक्ष्म तरीके से स्टालिनवाद, गुलाग, सामूहीकरण की आलोचना करती है।

रूस में इसे प्रकाशित करने को कोई राजी न था, पास्तरनाक ने किसी तरह पाण्डुलिपि इटली पहुंचवाई, यह पहले इटैलियन भाषा में प्रकाशित हुआ, फिर इंग्लिश में। जैसे युद्ध और क्रांति ने रूस को नष्ट कर दिया था, वैसे ही नायक डॉक्टर जिवागो का निजी जीवन भी नष्ट होता है। उपन्यास की शुरुआत युरी के अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने से होती है। इस समय रूसी गांव सर्दी से जमे हुए थे। और यहीं से उपन्यास का मूड -हानि एवं तड़प स्थापित हो जाता है।

1965 की फिल्म ‘डॉक्टर जिवागो’

यह महागाथा है, रूस के उथल-पुथल और उसके बाद हुए खंड-खंड हुए रूस में आध्यात्मिक एकाकीपन, प्रेम की। तमाम भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ है और इस पर प्रसिद्ध सिने-निर्देशक डेविड लीन ने 1965 में इसी नाम से फिल्म बनाई, जिसमें ओमर शरीफ ने शानदार-जानदार अभिनय किया है। फिल्म में कहानी को प्रमुखता दी गई है, आध्यात्मिक पक्ष को उतना नहीं उभारा गया है। जूली क्रिस्टी ने लारा की भूमिका की है।

फिल्म को एक नहीं, दो नहीं, पांच-पांच (सर्वोत्तम स्क्रीनप्ले, सर्वोत्तम सिनेमाटोग्राफर, सर्वोतम सेट डेकोरेशन, सर्वोत्तम कॉस्ट्यूम डिजाइन, सर्वोत्तम म्युजिक) अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुए। फ्रेडी यंग को ब्रिटिश सोसायटी ऑफ सिनेमाटोग्राफर्स का सर्वोत्तम पुरस्कार भी मिला।

विज्ञापन

विश्व साहित्य - फोटो : Freepik.com
बोरिस अपने पिता की तरह पहले एक कलाकार बनना चाहते थे, बाद में कवि-उपन्यासकार बने। उनके उपन्यास ‘डॉक्टर जिवागो’ का केंद्रीय विषय स्वयं कला और कलाकार है। नायक यूरी फिजिशियन है, साथ ही एक कवि है। उसके पास एक विलक्षण मस्तिष्क है। वह इंट्युशन से बीमारी का पता लगाता है, लेकिन वह एक कमजोर इच्छा-शक्ति का व्यक्ति है। यूरी नियतिवादी है।

उपन्यास बीसवीं सदी की शुरुआत में जिवागो के प्रारंभिक जीवन को दिखाने से शुरू होता है 1905 की क्रांति, 1917 की क्रांति से होता हुआ गृहयुद्ध (1918-20) तक पहुचता है। इसी समय मॉस्को में हार्ट अटैक से डॉक्टर की मौत होती है। लेकिन उपन्यास यहीं समाप्त नहीं होता है। उपसंहार के रूप में द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत में उसकी खोई हुई बेटी और उसके दोस्तों के बारे में काफी कुछ लिखा है। ‘यूरी जिवागो की कविताएं’ भी इस उपन्यास में शामिल हैं। ये कविताएं विशिष्ट हैं।

चूंकि बोरिस पास्तरनाक स्वयं कवि थे, अत: उपन्यास चमकते हुए बिम्बविधान से भरा हुआ है। नायक यूरी प्रकृति की सुंदरता में खोया हुआ है, वह बर्फ से बनी बिल्लौरी शाखाओं को देखता है, युद्ध क्षेत्र से गुजरती ट्रेन और रूस में फैलते क्रांति के ‘लाल धब्बे’ देखता है।

कुछ पात्र मार्क्सवाद आदि की बात करते हैं, परन्तु नायक का अभ्यांतर इस राजनैतिक तूफान से उतना प्रभावित नहीं है, वह तो अपनी कविता में डूबा हुआ है। उसका विश्वास है, कला सत्य का संधान करती है, विचारधारा नहीं। यही व्यक्तिगत सृजनात्मकता एवं सामूहिक नीति का तनाव सोवियत रूस में इस उपन्यास के खिलाफ गया। इसे प्रतिबंधित करने का प्रमुख कारण बना।

निज एवं सामूहिक का तनाव और विरोधाभास इस उपन्यास की असली ताकत है। यहां प्रेम कहानी है, जिसमें भावुकता को नकारा गया है। यहां शांत क्षणों पर ध्यान केंद्रित है। अंतत: राजनैतिक कार्य राजनीति के पार चला जाता है। युद्ध एवं क्रांति रूस को नष्ट कर देती है। इस अराजकता को डॉक्टर जिवागो का निजी जीवन प्रतिबिंबित करता है।

बोरिस पास्तरनाक ही हैं डॉक्टर यूरी जिवागो

डॉक्टर यूरी जिवागो असल में बोरिस पास्तरनाक ही हैं। लेखक का वैवाहिक जीवन सुखी था, मगर बाकी जीवन दु:खदायी रहा। यूरी का एक क्रांतिकारी की पत्नी लारा एन्टीपोवा के प्रति कोमल प्रेम, युद्ध क्षेत्र से गुजरती ट्रेन में परवान चढ़ता है। यात्रा में मॉस्को के सर्दी में जमे हुए घर हैं। सर्दियों में पहाड़ों में छिपा हुआ स्थान है, जहां की सुंदरता का चित्रण गद्य का नायाब नमूना है।

एक उदाहरण देखें तो एक ओर उसकी अंगुलियां खिड़की के शीशे पर ड्रम बजा रही हैं, नीचे कोलतार पर घोड़ागाड़ी के रास्ते पर मंद गति से चलती घोड़ों की खुरों की टाप है। अपनी आंख बंद करते हुए वह फुसफुसाया ‘लारा’। उसकी कल्पना में लारा का सिर उसकी बांह पर था, वह सो रही थी, इस बात से बेखबर कि वह उसे घंटों से सोती हुई निहार रहा है। उसके काले बाल बिखरे हुए थे।

बोरिस पास्तरनाक पहले रूसी लेखक हैं, जिन्होंने रूस के इतिहास के सत्य को उजागर किया है। जटिल क्लासिकल किताब को धीरे-धीरे पढ़ना होगा। इस किताब का इतिहास अशांत एवं उग्र रहा है। सामाजिक यथार्थवाद को नकारता है, इसके चरित्र समायतीत हैं, गद्य काव्यात्मक, और केंद्र में एक प्रेम कथा है।



---------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें