मेरे ख्याल से कोई हिन्दी सिने-प्रेमी नहीं होगा, जिसने ‘बिल्लू बार्बर’ (2009, जिसे बाद में केवल ‘बिल्लू’ नाम दिया गया) न देखी हो। कहानी वही कृष्ण-सुदामा वाली है, लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य में रची गई है। इरफान (बिल्लू), लारा दत्ता (बिन्दिया) एवं शाहरुख खान (साहिर खान) अभिनीत इस फिल्म के निर्देशक प्रिदर्शन हिन्दी दर्शकों काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने जिस लेखक की कहानी के आधार पर फिल्म बनाई उसी कहानी पर तमिल में एक साल पहले पी. वासु ने फिल्म बनाई।
वासु की ‘कुचेलन’ (Kuselan, 2008) में बालकृष्णन की भूमिका में पशुपति हैं और मीना ने श्रीदेवी और रजनीकांत ने अशोक कुमार का अभिनय किया है। मूल कहानी मलयालम में है और स्वयं लेखक ने ई. पी. बालन का अभिनय किया है। मलयालम में यह फिल्म 2007 में ‘कथा परयुम्बोल’ नाम से है, निर्देशक हैं, एम. मोहना। यहां भी मीना श्रीदेवी बनी हैं, लेकिन फिल्म स्टार दोस्त अशोकराज बने हैं, मलयालम के प्रसिद्ध अभिनेता मम्मूट्टी। ‘कुचेलन’ फिल्म ‘कथा परयुम्बोल’ का ऑफिसियल रिमेक है।
अभिनेता, निर्देशक और प्रड्यूसर श्रीनिवासन
अवश्य अब आप लेखक का नाम जानने को उत्सुक होंगे। पैंसठ कहानियों के लेखक, लम्बी पारी खेलने वाले मलयालम सिनेमा के अभिनेता, निर्देशक, प्रड्यूसर हैं श्रीनिवासन। लाइम लाइट में रहने की चिंता न करने वाले श्रीनिवासन का हाल में देहांत हो गया। पूरा केरल फिल्म उद्योग एवं सिने-दर्शक शोक में डूब गए। जीते-जी उन्हें उतना सम्मान न मिला, जितना जाने के बाद मिला। उन्होंने 2 फिल्में निर्देशित कीं, पैंसठ लिखीं पर अभिनय की संख्या देखें तो आश्चर्य होता है, उन्होंने 234 फिल्मों में काम किया। हास्य, कॉमेडी उनका फोर्ट था। गम्भीर विषय को हल्के-फुल्के तरीके से व्यक्त करना कोई श्रीनिवासन से सीखे। फिल्म में अक्सर वे आम आदमी की भूमिका निभाते थे।
1984 में उन्होंने अपना पहला स्क्रीनप्ले प्रियदर्शन के लिए लिखा, जिन्होंने खुद एक स्क्रीनप्ले राइटर के रूप में अपना फिल्मी सफर प्रारंभ किया था। उनकी भी ‘ओडरुतम्माव आलरियाम’ (‘डोन्ट रन, अंकल, वी नो यू’) पहली फिल्म थी। उस साल प्रियदर्शन ने दो फिल्में (‘दूसरी फिल्म थी) बनाई, दोनों माइलस्टोन साबित हुईं। यहीं से इस जोड़ी ने प्रारंभ कर 12 फिल्में साथ-साथ बनाईं। मात्र ‘ओरु मुत्तस्सि कथा’ (ए ग्रैंडमदरस टेल) उतनी सफल न हुई।
‘पूच्चक्कोरु मूक्कुत्ति’ (ए नोज पिन फॉर द कैट), ‘ज्ञानप्रकाशन’, ‘संडे होलीडे’, ‘गुपी’, ‘माई गॉड’ और न जाने कितनी फिल्मों में आप उन्हें पाएंगे। प्रियदर्शन कमाल के निर्देशक हैं, मोहनलाल कमाल के एक्टर हैं, मोहनलाल के साथ श्रीनिवासन ने कई फिल्मों में कॉमेडी के अलावा भी काम किया है। इसी तरह की एक फिल्म है, प्रियदर्शन निर्देशित ‘किलिचुन्दन मामपाषम’ (2003, )। यहां वे एक धनी व्यक्ति मोइदुकुट्टी हाजी बने हैं, जो औलाद पाने केलिए शादी-पर-शादी करता जाता है।
नवीनतम कम उम्र पत्नी वास्तव में अब्दुल कादर (मोहनलाल) की प्रेमिका है। हाजी चाह कर भी अमीना से संबंध नहीं बना पाता है, फिल्म का अंत देख कर हिन्दी फिल्म का डॉयलॉग याद आता है, ‘जा सिमरन जा, अपनी जिंदगी जी ले...’। इस फिल्म का कमाल है, श्रीनिवासन ने अभिनय में मोहनलाल से अधिक कमाल किया है।
उन्होंने नायक का रोल बहुत कम फिल्मों में किया, हां, सह-नायक के रूप में परदे पर खूब दिखाई देने वाले श्रीनिवासन 2 मई 1950 को केरल के कन्नूर नामक स्थान में पैदा हुए उनकी पत्नी का नाम विमला और बेटों का नाम ध्यान श्रीनिवासन एवं विनीत श्रीनिवासन है। दोनों बेटे फिल्म लाइन में हैं। दोनों का स्वभाव एक-दूसरे से बहुत भिन्न है। उनका अपने पिता से रिश्ता भी बहुत अलग था।
सह-अभिनेता के रूप में वे अस्सी के दशक और नब्बे की शुरुआत में अधिकतर मोहनलाल के साथ परदे पर हैं, इनमें से अधिकांश फिल्म सफल रही हैं। इन फिल्मों में से बहुत सारी का लेखन श्रीनिवासन ने किया। तीन फिल्मों में नायक रामदास (मोहनलाल) के साथ विजयन की भूमिका में सह-नायक के रूप में हैं। त्रयी है: 1987 की ‘नाडोडि कात्तु’ (द वान्डरिंग विन्ड), 1988 की ‘पट्टण प्रवेशम’ (एन्टरिंग द टाउन) तथा 1909 की ‘अकरे अकरे अकरे’ (फार फार अवे)।
फिल्में श्रीनिवासन लिखित हैं, पहली दो के निर्देशक सत्यन अन्टिकाड हैं, तीसरी फिल्म के निर्देशक प्रियदर्शन हैं। त्रयी कॉमेडी ने केरल में दोस्ती का बेंचमार्क कायम कर दिया। श्रीनिवासन लिखित इन फिल्मों ने मोहनलाल को अपनी अभिनय कुशलता का हास्य-व्यंग्य पक्ष दिखाने का भरपूर अवसर दिया।
वे यहीं नहीं रुके उन्होंने मलयालम के एक सर्वोच्च अभिनेता मोहनलाल के अलावा एक और सर्वोच्च अभिनेता मम्मूट्टी के साथ भी सह-अभिनेता की तरह काम किया। यहां भी नायक का नाम रामेशन नायर है, श्रीनिवासन काकाकुउट्टिल दासन बने हैं। साथ में शोभना लेखा की भूमिका में हैं।
1993 की इस फिल्म ‘गोलान्तर वार्ता’ (ग्लोबल न्यूज), का लेखन भी श्रीनिवासन और निर्देशन सत्यन अन्टिकाड का ही है। इन फिल्मों के कारण इस काल को केरल फिल्म इतिहास में श्रीनिवासन का लेखन कहा जाता है। ये फिल्में दर्शक के मन को छूती हैं, वह इनसे कनेक्ट कर पाता है।