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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: शिवरात्रि और भगवान शिव पर आधारित फिल्में और गीत

सार

हिन्दी सिने प्रेमियों को सबसे पहले याद आएगा गाना, ‘जय जय शिव शंकर, कांटा लगे न कंकर...’। जैसे शिव कथा अनंत है वैसे ही फिल्मों में शिव और शिव संबंधित अनंत गीत हैं।
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फिल्मों में भगवान शिव - फोटो : Twitter
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विस्तार
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वैलेंटाइन डे और वैलेंटाइन वीक भले समाप्त हो गया है, पर वसंत अभी जारी है। वसंत का मतलब है वसंतोत्सव, मतलब त्योहरों का मौसम। इसी उत्सव काल में आती है शिवरात्रि। शिवरात्रि मतलब भगवान शिव! जो एक साथ सृजनकर्ता और विध्वंसकर्ता दोनों हैं।

शिव मतलब महादेव, मतलब त्रिनेत्र, त्रिलोकी, मतलब नृत्य, मतलब तांडव। तांडव मतलब सब नष्ट-भ्रष्ट कर देने को उद्धत। मतलब जो जीर्ण-शीर्ण को नष्ट कर नए के लिए स्थान बनाए और लास्य करे। शिव मतलब रहस्य! जिसे समझना आसान नहीं है, पर जिसकी आराधना की जाती है, पूजा की जाती है।

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जब भारत में बनी फिल्मों की बात आती है तो भला हम शिव को कैसे भूल सकते हैं? और जब शिव और उनसे जुड़ी बातों की चर्चा फिल्म में होती है, तो बनारस यानी काशी अनायास चली आती है।

चाहे सत्यजित राय हों अथवा ऋतुपर्ण घोष, बनारस के आकर्षण से बच नहीं पाते हैं। लेकिन जब सिने-गीतों में शिव और शिव से जुड़ी फिल्मों-गीतों की बात आती है, तो कान में सबसे पहले गूंजने लगता है, ‘ओम् शिवो अहम्, शिवो अहम्...’ और आंख के सामने 2009 में बनी तमिल फिल्म ‘नान कडावुल’ (अहम् ब्रह्मास्मि) का नायक आर्या और उसका शक्तिशाली अभिनय और नृत्य घूमने लगता है।

तमिल फिल्म ‘नान कडावुल’ और काशी

फिल्म के निर्देशक हैं, प्रसिद्ध बाला, उन्होंने इसे जगमोहन के तमिल उपन्यास ‘एषामउलगम्’ (सातवीं दुनिया) पर आधारित किया है। जगमोहन ने ही ‘नान कडावुल’ के संवाद लिखे हैं। हिन्दी संवाद स्वरूप श्रीनिवास ने तैयार किए हैं। मगर दाद देनी होगी नायक और कोरियोग्राफर (जिसका नाम मुझे मिला नहीं) की। इस फिल्म में जब रुद्रन का पिता उसे काशी में छोड़ कर चला जाता है, तो वह अघोरी के रूप में बड़ा होता है। मगर जब परिवार उसे वापस लाता है तो उसके लिए सांसारिक जीवन में एडजस्ट होना कठिन होता है।

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पूरी फिल्म में 7 गाने हैं जिनका संगीत दक्षिण के प्रसिद्ध संगीतकार इलैईराजा ने दिया है। ओम् शिवो अहम्, शिवो अहम्...’ गीत विजय प्रकाश और वाली ने लिखा है। सिनेमाटोग्राफ़र हैं, आर्दर ए. विल्सन। विभिन्न 9 पुरस्कारों से सजी यह फिल्म देखनी बनती है।

मलयालम की फिल्म सोलो

यदि शिव से जुड़ी फिल्म देखनी है तो मलयालम के प्रसिद्ध और खूबसूरत अभिनेता दुल्खर सुल्तान तथा निर्देशक बिजय नम्बियार की फिल्म ‘सोलो’ देखें। फिल्म एक एंथॉलॉजी है जो चार भिन्न लोगों की कहानी कहती है। चारों में नायक दुल्खर सलमान ही हैं। कहानी चार विभिन्न तत्वों: क्षिति, जल, पावक, समीर के इर्द-गिर्द घूमती है। स्क्रीनप्ले भी विजय नम्बियार का है तथा संवाद कार्तिक आर. अय्यर के हैं। और सिनेमाटोग्राफ़र हैं सेजल शाह, मधु नीलकंठन तथा गिरीश गंगाधरन।

जीवन और प्रेम की ये कहानियां गांधारी और धृतराष्ट्र की कहानी नए परिवेश में, आज के युग में प्रस्तुत करती हैं। यहां विचार स्वतंत्र रूप से प्रवाहित होते हैं। क्या किसी दृष्टि बाधित व्यक्ति से प्यार किया जा सकता है? यह प्यार कैसा होगा? यदि इन प्रश्नों के उत्तर चाहिए तो यह फिल्म अवश्य देखें। अगर आप अपराध कर उसके सारे निशान-सबूत मिटा देते हैं तब भी आप त्रिनेत्र शिव से नहीं बच सकते हैं वह त्रिलोकदर्शी हैं, सब देखते हैं। नम्बियार विरल प्लॉट के लिए कसा हुआ स्क्रीनप्ले बनाते हैं और खूबसूरती से, त्वरा के साथ फिल्माते हैं।

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सिनेमा में शिव पर आधारित फिल्में और संगीत - फोटो : Twitter

शिव के इर्द-गिर्द हिन्दी सिनेमा

हिन्दी सिने प्रेमियों को सबसे पहले याद आएगा गाना, ‘जय जय शिव शंकर, कांटा लगे न कंकर...’। शिव की बात हो और भांग न घुटे यह कैसे हो सकता है, सो यहां फिल्म ‘आपकी कसम’ में एक जमाने के सर्वप्रिय अभिनेता राजेश खन्ना और फिल्म की नायिका मुमताज ने भांग चढ़ा ली है। खूबसूरत हिमालय और उसकी वादी में फिल्माया गया यह गीत खूब चला और आज भी बराबर सुनाई देता है।

1974 में बनी यह फिल्म निर्देशक जे. ओम प्रकाश की पहली फिल्म थी। इसमें राजेश खन्ना, मुमताज के अलावा संजीव कुमार, रहमान, असरानी तथा ए. के. हंगलने भी काम किया है। संगीत आर. डी. बर्मन का है और उन्हें इस फिल्म केलिए फिल्मफेयर नामांकन मिला था। गीतकार आनंद बख्शी का रचा यह गीत उस साल बिनाका गीतमाला की वार्षिक सूची में दूसरे नंबर पर रहा।

शोले फिल्म की यादें आज भी ताजा

शोले फिल्म के संवादों ने एक नया इतिहास कायम किया। इससे पहले फिल्म के संवाद के कैसेट शायद ही बिके, शायद ही खरीदे और बजाए जाते थे। एक-एक संवाद लोगों को जबानी याद हो गया था। अब जब संवादों की बात हो रही है तो भुलक्कड़,चुलबुली हेमामालिनी यानि बसंती का वो डॉयलॉग याद करें जब उसे मंदिर जाना था लेकिन डाकिए का चश्मा देने वह इमाम साहब के यहां चली आती है और थोड़ी बकबक करने के बाद उसे मंदिर की याद आती है।

तांगेवाली पूजा की थाली लिए मंदिर पहुंचती है। वह मौसी के कहे पर सोमवार के सोमवार शिवजी के मंदिर में माथा टेकने पहुंचती है, ताकि ऐसा पति मिले कि दुनिया जले। मगर उसके नंदी (शिव की सवारी) को माथा टेकने से पहले धर्मेंद्र विशाल शिव मूर्ति के पीछे पहुंच कर शिवजी के रूप में कन्या को संबोधित कर बताता है कि उसके होने वाले पति का नाम वीरू है। वह मौसी को बता दे। वह बोल रहा है तभी जय (अमिताभ बच्चन) बसंती को मंदिर के पीछे ले जाकर उसे सच्चाई से परिचित कराता है और दर्शक हंस-हंस कर बेहाल हो जाते हैं।

जैसे शिव कथा अनंत है वैसे ही फिल्मों में शिव और शिव संबंधित अनंत गीत हैं। फिल्म ‘बाहुबली’ का एमएम करीम का लिखा कैलास खेर और मौनिमा के खुले गले से गाया गीत ‘कौन है वो...’,  प्रभास का शारीरिक सौष्ठव गीत को नई ऊर्जा और शक्ति प्रदान करता है। और हिन्दी फिल्म ‘लक्ष्मी’ का अक्षय कुमार पर फिल्माया गीत ‘बमभोले’। शायद हिन्दी में अबतक का शिव का एक सबसे अच्छा गीत है। इसमे अक्षय कुमार का ऊर्जा भरा डॉन्स गाने की बीट्स के बिल्कुल साथ-साथ चलता है। इसे वायरस ने गाया है और गीत लिखा है उल्लुमिनाती ने। एक बार सुनने पर गीत आपके भीतर काफ़ी देर चलता रहता है।

और जरा सुनिए ‘मणिकर्णिका’ फिल्म का ‘शिव तांडव’ मंत्रोच्चारण! झाँसी की रानी (कंगना रनौत) गोरों को काट रही है और ‘शिव तांडव’ मंत्रोच्चारण चल रहा है। उसे अपने बालक को भी बचाना है। शंकर एहशान लॉय का संगीत और शंकर महादेवन की आवाज (कोरस के साथ) आपको हिला कर रख देती है।

इसी तरह फिल्म ‘पानीपत’ का अर्जुन कपूर तथा कृति सेनन पर फिल्माया गीत, ‘तेरे मन में शिवा, मेरे मन में शिवा, सांसों में शिवा, प्राणों में शिवा’ मराठा उत्सव को प्रदर्शित करता है। जावेद अख्त्तर ने यहां भाग्वान शंकर तथा छत्रपति शिवाजी महाराज के गुणगान का मिश्रण किया है। इसे कई लोगों ने मिलकर गाया है।

शिव और शिव से जुड़ी तमाम फिल्में हैं, ढ़ेर सारे गाने हैं। इन्हें सुनिए और इनकी शक्ति का अनुभव कीजिए, इनकी सुंदरता का आनंद लीजिए।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 
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