जिंदगी कुछ लोगों को एक ही काम करने की मोहलत देती है। क्यूबा की सारा गोम्स (कहीं-कहीं उनका नाम सरिता गोम्ज भी मिलता है) उनमें से एक रह हैं। 1943 में क्यूबा में जन्मी सारा गोम्स निर्देशक-लेखक तो थीं ही साथ ही वे क्यूबा के सिनेमाटोग्राफर संस्थान की सदस्य भी थीं। एक समय वे इसकी एकमात्र अश्वेत सदस्य थीं।
‘वन वे ओर अनदर’ फीचर फिल्म के अलावा उन्होंने दो लघु डॉक्यूमेंट्री बनाईं। वैसे उनके नाम पर एक दर्जन डॉक्यूमेंट्री की सूचि है, पर जिन दो के विषय में जानकारी मिलती है वे हैं, ‘एन आइलैंड फॉर मिग्युल’ तथा ‘ए डॉक्यूमेंट्री अबाउट ट्रान्सिट’। पहली उन्होंने 1968 में बनाई और यह 22 मिनट की फिल्म उन्होंने थॉमस गोंजालेस के साथ मिल कर लिखी एवं इस फिल्म में मुख्य भूमिका इसाउरा मेन्डोजा ने की है।
यह यूट्यूब पर उपलब्ध है, मगर इंग्लिश इसका सबटाइटिल नहीं हैं। दूसरी फिल्म ‘ए डॉक्यूमेंट्री अबाउट ट्रान्सिट’ 1971 में बनी है। इस लघु डॉक्यूमेंट्री को उन्होंने स्वयं लिखा है।
फ्रांस के न्यू वेव सिनेमा की पुरोधा एग्नेस वार्डा की एक डॉक्यूमेंट्री उनके एवं सारा के बहनापे को दिखाती है। क्यूबा के आंदोलन के चार साल बाद वार्डा क्यूबा गई थीं वहां उन्होंने हजारों फोटो खींचे, उनमें से कुछ को चुब कर उन्होंने एक डॉक्यू-फिल्म ‘हेलो क्यूबन्स’ (1963) बनाई। इसके अंत की ओर एग्नेस वार्डा ने सारा गोम्ज को चा-चा-चा नृत्य करते हुए दिखाया है। जितने दिन एग्नेस क्यूबा में रही सारा उनके साथ थीं, क्यूबा से परिचित कराती, फोटो खींचने में सहायता करती। दोनों में दोस्ती हो गई थी।
एग्नेस लिखती हैं हमारी अच्छी पटी, और जब आईसीएआईसी ने उन्हें सेंटिआगो ड क्यूबा जाने केलिए कहा तो सारा उनके संग गईं। वे एक ही कमरे में ठहरीं, जहां उन दोनों ने रात-रात भर बातें कीं। सारा के विषय में एग्नेस की धारणा है कि वे शिक्षाप्रद फिल्में निर्देशित करती हैं।
सारा गोम्स का देश क्यूबा अमेरिका की भांति पूंजीपति देश नहीं है, आत: यहां के इंडिपेंडेंट फिल्म मेकर उसमें भी स्त्री फिल्म मेकर स्त्री को एक भिन्न तरीके से अपने काम में प्रस्तुत करती हैं। वे अपनी फीचर फिल्म ‘वन वे ओर अनदर’ नए क्यूबा में स्त्री-पुरुष के आपसी संबंधों के बदलाव को दिखाती हैं। वे इसे आर्थिक एवं वास्तविक परिवर्तन की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत करती हैं।
फिल्म की नायिका योलैंडा मध्य वर्ग से आती है एवं एक स्कूल में पढ़ाती है, जबकि नायक मारियो हवाना के झुग्गी-झोपड़ी इलाके में जन्मा है। योलैंडा इसी इलाके में पढ़ाती है और यहीं नायक से मिलती है। क्लाइमेक्स सीन में मारियो योलैंडा का इंतजार कर रहा है मगर वह स्कूल की एक मीटिंग में व्यस्त है।
मारियो चिल्लाता है, ‘कोई मुझे एक घंटे इंतजार नहीं करा सकता है।’ मारिओ के व्यवहार में पुरुषसत्ता देखी जा सकती है।
योलैंडा मारियो से कहती है, जब वह अपने दोस्तों के साथ होता है तो उसका व्यवहार और उसकी भाषा बहुत अच्छी नहीं होती है, मारिओ सुनता है मगर क्या वह बदलेगा? पता नहीं। डॉक्यूमेंट्री एवं फिक्शन के साझा जोड़ से बनी फिल्म में पता नहीं चलता है कि मारियो और योलैंदा संग रहेंगे अथवा नहीं क्योंकि दर्शक देखता है कि तार की बाड़ के पार योलैंदा चल रही है, मारियो घूम कर उसे देखता है। मारियो का पलटना हो सकता है, उसके बदलाव का सूचक हो।
सारा गोम्स की फीचर फिल्म ‘वन वे ओर अनदर’ को क्यूबा की पहली फिल्म माना जाता है, जो वास्तविक रूप से 1959 के क्यूबा आंदोलन के बाद के संदर्भ में नस्ल एवं लैंगिक संघर्ष को अन्वेषित करती है। आईसीएआईसी इस फिल्म के निर्माता हैं, इसका लोकेशन मीराफ्लोर्स है, यह हवाना का एक निम्न वर्ग इलाका है। निर्देशक ने पेशेवर एवं गैर पेशेवर दोनों तहर ल्के लोगों से अभिनय करवाया है।
उनकी एक शुरुआती डॉक्यूमेंट्री फिल्म क्यूबा के पुराने हवाना के प्लाजा विएजा का इतिहास दिखाती है, आज यह एक हेरिटेज स्थान है। अपनी 1864 की डॉक्यूमेंट्री ‘इरे ए सैंटियागो’ का शीर्षक उन्होंने फेडरिको गार्षा लोर्का की एक कविता से लिया है। अगले साल वे ‘ट्रिप टू वुएल्टा अबाजो’ बनाती हैं जिसमें वे तम्बाकू संस्कृति और एक गांव में आंदोलन से इसमें हुए परिवर्तन को प्रस्तुत करती हैं।
उन्होंने क्यूबा संगीत पर डॉक्यूमेंट्री बनाई, ‘ऑन दि अदर आईलैंड’ में वे आईलैंड के लोगों जैसे एक सत्रह असल की लड़की जो हेयरड्रेसर बनना चाहती है, एक ग्वाला जो रात को थियेटर चलाता है, एक किसान जो हवाना का टेनर बनना चाहता है, यानि ऐसे लोग जो जिंदगी में कुछ करना, बनना चाहते हैं उनका इंटरव्यू लिया है।
इस तरह सारा गोम्ज अपने काम के द्वारा आंदोलन के बाद क्यूबा के जन-जीवन में आए परिवर्तन को परदे पर उतार कर सदा केलिए दस्तावेज में परिवर्तित कर देती हैं। काश वे कुछ दिन और जीवित रहतीं।
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