रवि वर्मा के किरदार में संतोष सिवन
संगीत सिवन एवं संजीव सिवन इनके दोनों भाई भी सिनेमा से जुड़े हुए हैं। एक मजेदार बात है, राजा रवि वर्मा पर कुछ साल पहले भारत में दो फिल्में बनीं। एक मलयालम में और एक हिन्दी में। 2011 में राजा रवि वर्मा के जीवन पर आधारित लेनिन राजेंद्रन निर्देशित मलयालम फिल्म ‘मकर मञ्ञ्’ में संतोष सिवन स्वयं राजा रवि वर्मा के किरदार के रूप में उपस्थित हैं और 2008 में प्रसिद्ध सिने-निर्देशक केतन मेहता ने हिन्दी में बनाई ‘रंग रसिया’ जो कई बरसों के इंतजार के बाद कहीं जाकर 2014 में रिलीज हुई। इसके सिनेमाटोग्राफर संतोष सिवन ही हैं।
दोनों फिल्मों का कथानक एक होते हुए भी दोनों के ट्रीटमेंट में जमीन-आसमान का अंतर है। एक ओस की नाजुक बूंद है, तो दूसरी ओलावृष्टि। ‘मकर मञ्ञ्’ ओस की बूंद की तरह वायवी और कोमल है, ‘रंग रसिया’ मुझे बहुत लाउड, भयंकर ओलावृष्टि की भांति लगी। ओलावृष्टि का अपना सौंदर्य होता है। पर वह काफी कुछ नष्ट कर डालती है। यह भी सच है कि दोनों फिल्मों में राजा रवि वर्मा के जीवन को यथार्थ और कल्पना के रंगों के समिश्रण से चित्रित किया गया है।
दोनों प्रसिद्ध निर्देशक का काम मौलिक है। इसके एक साल बाद 2012 में इन्होंने तमिल फिल्म ‘तुप्पाक्की’ (‘गन’) के एक गीत में थोड़ी देर केलिए अभिनय किया।
कैमरे, डार्करूम, फिल्म प्रोसेसिंग के साथ बड़े होने वाले इस फोटोग्राफर ने कई साक्षात्कार दिए हैं। एक साक्षात्कार में ये कहते हैं कि उनकी दादीमां खुद एक कलाकार थीं और इन्हें इस दिशा में बढ़ावा देती थीं। बदलते मौसम के साथ आकाश निहारते हुए इन्हें रंगों से लगाव हुआ। आज डिजिटल कैमरा आने से कई चिंताएं दूर हो गई हैं, साथ ही पहले मिलने वाला सरप्राइज भी समाप्त हो गया है।
पहले और अब की चुनौतियां
पहले सब मिल कर फिल्म शूट करने के बाद रशेस देखते थे और आवश्यकता पड़ने पर रि-शूट करते थे। आज फोटोग्राफर की स्वतंत्रता सीमित हो गई है। लेकिन इनका यह भी मानना है कि परिवर्तन महत्वपूर्ण है, यह विकास है। आप सीखने के साथ आगे बढ़ते जाते हैं।
उदाहरण के लिए संतोष सिवन ‘रोजा’ फिल्म के गीत ‘रुकुमनी’ की बात करते हैं। वे कहते हैं कि यह एक बहुत कठिन सिक्वेंस था, जहां नाइट इफेक्ट के साथ एक 70 साल की स्त्री गा रही थी अत: असामान्य ध्वनि संकेत थे। आज इस गाने के बारे में सोचते हुए वे तथा इसके सिने-निर्देशक मणि रत्नम आश्चर्य करते हैं कि इन लोगों ने इसे कैसे किया?
आज तमाम तकनीकि विकास तथा वीएफएक्स के साथ करना यह बहुत आसान होगा। लेकिन उन दिनों यह बहुत बड़ी चुनौती थी, साथ ही इसे करने में इन लोगों को मजा भी बहुत आया था। वैसे चुनौतियां आज भी कम नहीं हुई हैं।
‘दलपति’ में रजनीकांत को फिल्माने वाले और रजनीकांत की ऊर्जा और उनकी सादगी के प्रशंसक इस बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति का कहना है कि वे सिनेमाटोग्राफी के अलावा ढेरों और काम करते हैं। वे डॉक्यूमेंट्री फिल्म, कमर्शियल विज्ञापन बनाते हैं। उन्होंने एक फिल्म को विभिन्न अभिनेताओं को लेकर दो भिन्न संस्करण में बनाया है, योगी बाबू तथा मंजू वारियर को लेकर बनी फिल्म ‘सेंटीमीटर्स’ फिल्म को प्रड्यूस किया है। उन्हें घुमक्कड़ी के साथ फोटो खींचना रास आता है।
विभिन्न काम करने और जीवन के विभिन्न पलों की प्रशंसा करने के कारण बस काम पूर्ण हो गया। बस अब और नहीं करना है, ऐसा नहीं सोचते अथवा अनुभव करते हैं। नाम भले ही संतोष है मगर कभी अपने काम को पूर्ण नहीं मानते हैं। उससे संतुष्ट नहीं होते हैं। असंतुष्टि उन्हें और काम करने, और अच्छा काम करने की ओर प्रेरित करती रहती है।
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