मलयालम फिल्मों की ट्रेंडसेटर समीरा सनीश का जन्म 27 जून 1983 को केरल में हुआ। उन्होंने फिल्मों के द्वारा फैशन निर्माण किया। यह फैशन निर्माता अपनी सरलता एवं सुरुचि के लिए जानी जाती है। समीरा के काम को पहली बार मैंने इक्कीसवीं सदी की एक सबसे खूबसूरत मलयालम फिल्म ‘चार्ली’ में देखा था।
कुछ के नाम देखें: ‘कुम्बलंगी नाइट्स’ (तेरह पुरस्कार), ‘हाऊ ओल्ड आरे यू?’ (दस पुरस्कार), ‘मायानदी’(नौ पुरस्कार), ‘पत्तेमारी’ (आठ पुरस्कार),‘वायरस’ (सात पुरस्कार), ‘कटहल-द कोर’( छ: पुरस्कार), ‘शटर’ (तीन पुरस्कार), भीष्म पर्वम’ (तीन पुरस्कार), ‘रामलीला’ (दो पुरस्कार), ‘प्रणय विलासम्’ (दो पुरस्कार), ‘नायाट्टु’ (दो पुरस्कार), ‘रक्षाधिकारी बैजू ओप्पु’ (दो पुरस्कार), ‘पणि’ (एक पुरस्कार), ‘किष्किंधाकांड’ (एक पुरस्कार), ‘अतिरन’ (एक पुरस्कार) आदि। ‘हृदयपूर्वम’, ‘तुडरुम्’, ‘रेखाचित्रम’, ‘अन्वेषिप्पन कन्देत्तुम’, ‘का’, जॉन लूथर’, ‘मधुरम’, ‘काला’, ‘फोरेन्सिक’, ‘रामलीला’, ‘गोदा’, ‘जैकब’स किंग्डम ऑफ हैवन’, ‘बज़ूका’, ‘काप्पा’, ‘तीर्प्पु’, ‘हाऊ ओल्ड आर यू’ आदि में भी पोशाकों से पात्र को निखारने का काम समीरा ने किया है।
समीरा ने पांच फिल्मों ‘ओरु तेकन तल्लु केस’ (2022), ‘भूतकालम्’ ‘(2022), ‘जवान ऑफ वेल्लिमाला’ (2012), ‘कोबरा’ (2012) एवं ‘डैडी कूल’ (2009) का वॉर्डरॉब विभाग भी संभाला है।
करीब दो दशकों में समीरा ने इतना काम किया है। वे फिल्म के मूड के अनुसार रंग चुनती हैं, ड्रेस की बारीकी पर ध्यान देती हैं। जैसे ‘भीष्म पर्वम्’ एक ग्रे मूड की फिल्म है, तो उसका वस्त्र विन्यास, खासकर नायक के कपड़े उसी के अनुकूल आपको नजर अएंगे। इसी तरह युवाओं के यायावरी से जुड़ी फिल्म का वस्त्र विन्यास समीरा ने उसी के अनुरूप रंगारंअग रखा है। रंगों, वस्त्रों के चुनाव केलिए देश-विदेश का दौरा करती हैं ताकि ऑथेंटिक किरदारों को खड़ा कर सकें।
फिल्म बनाने और देखने-दिखाने के नजरिए में समय के साथ बहुत परिवर्तन हुआ है। अब नए निर्देशक भी 40-50 लाख कॉस्ट्यूम पर खर्च करने को खुशी से राजी हैं, अत: ड्रेस डिजाइनर समीरा को भी अपनी क्रियेटिविटी दिखाने का भरपूर अवसर मिलता है। अभी सिने-जगत में समीरा सनीश को बहुत आगे जाना है।
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