फिल्म द पियानो- तमाम पुरस्कारों से सम्मानित
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पांच साल की मेहनत के बाद जेन कैंपियन की फिल्म ‘द पियानो’ 1993 में प्रदर्शित हुई। ‘द पियानो’ एक अनोखी एवं जटिल फिल्म है। सृजनात्मकता, एकाकीपन और पितृसत्तात्मक समाज में स्त्री की भावनाओं और शारीरिक दमन तथा कलात्मकता द्वारा स्व-अभिव्यक्ति को दिखाने में कुशल जेन कैंपियन इस फिल्म में भी इन्हीं बातों को उभारती हैं। इस फिल्म को ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा और अमेरिका में तमाम पुरस्कार प्राप्त हुए।
जेन कैंपियन ने खुद इस फिल्म की पटकथा लिखी। नायिका एडा को उसके पिता ने शादी करके स्कॉटलैंड से एक दूर, अनजान देश न्यूजीलैंड भेज दिया है। एडा (होली हंटर) के साथ उसकी आठ साल की बेटी फ्लोरा (एना पाकिन) है। फिल्म का समय उन्नीसवीं शताब्दी का पांचवां दशक है, वही जब जेन के पूर्वज न्यूजीलैंड आए थे।
नए देश की जलवायु, संस्कृति-सभ्यता सब से अनजान एडा को उसका नया पति एलिसडाएर स्टेवार्ट (सैम नेल) उसके पियानो से भी दूर कर देता है। पियानो उसकी अभिव्यक्ति का एक साधन है। एडा मूक प्राणी है। उसने बिना किसी शारीरिक खामी के बोलना बंद कर रखा है। बेटी फ्लोरा उसकी एकमात्र साथिन है।
अपना पियानो वापस पाने के लिए एडा अपने शरीर का सहारा लेती है, मगर इसी कारण बेटी उससे दूर छिटक जाती है। मनुष्य के स्वभाव के श्याम पक्ष को दिखाती यह एक जटिल फिल्म है। कैसे एडा अपने पियानो और जॉर्ज बाइन्स (हार्वे केटल) प्रेम को वापस पाती है, उसके रास्ते में कौन-कौन सी बाधाएं आती हैं, यह बताने की नहीं देखने की चीज है। प्रकृति को इस फिल्म में बड़ी खूबसूरती से फिल्माया गया है। शरीर और उसकी आवश्यकता को जिस संवेदनशीलता से इसमें दिखाया गया है, वैसा बहुत कम फिल्मों में दिखाया जाता है।
जेन कैंपियन पर भारत की आध्यात्मिकता का प्रभाव
जेन कैंपियन पर भारत और भारत की आध्यात्मिकता का प्रभाव है, हालांकि वे आध्यात्म को अपनी फिल्म में हल्के ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उनकी फिल्म ‘होली स्मोक’ इसी नाम के उपन्यास पर बनी है, जिसे जेन ने अपनी बहन एना के साथ मिलकर लिखा है। इसमें एक ऑस्ट्रेलियन स्त्री रूथ छुट्टी बिताने भारत आती है और यहां एक गुरु बाबा के संपर्क में आकर सोचती है कि उसे उसके जीवन का मकसद मिल गया है। परंतु उसे उसका परिवार पिता की बीमारी की झूठी खबर दे कर वापस बुला लेता है और उसकी डीप्रोग्रामिंग के लिए पी. जे. वाटर्स को बुलाता है। मगर रूथ जल्द ही उसे अपने प्रभाव में ले लेती है। फिल्म के अंत में रूथ अपनी मां के साथ भारत में रहती दिखाई देती है।
जेन कैंपियन की अगली फिल्म ‘इन द कट’ एक थ्रिलर है। यह फिल्म वे निकोल किडमैन को लेकर बनाना चाहती थीं, परंतु कुछ कारणवश उन्हें मेग रायन को लेना पड़ा। मेग रायन ने इस फिल्म में एक इंग्लिश टीचर फ्रैनी की भूमिका की है। यह सनकी टीचर एक किताब लिखने के लिए स्लैंग शब्द और मुहावरे इक्कट्ठे कर रही है। वह अपनी नोटबुक में लोगों की बातचीत को नोट करती रहती है।
पूरी फिल्म फ्रैनी और उसकी बहन पाऊलीन को लेकर चलती है। यह एक मर्डर मिस्ट्री है, जिसे देख कर ही इसका आनंद उठाया जा सकता है। कई हत्याओं के बाद हत्यारे का पता चलता है। फिल्म की काफी आलोचना हुई।
जो भी हो जब नारीवादी फिल्मों की बात चलेगी जेन कैंपियन और उनकी फिल्म ‘द पियानो’ की चर्चा अवश्य होगी।
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