पचास के दशक में मलाया फिल्मों में धीरे-धीरे परिवर्तन आने लगा जिसका मुख्य कारण था स्थानीय लोगों का सिने-निर्देशन की दिशा में आगे आना था। ये लोग अधिक वास्तविक तथा वांछिनीय फिल्म बनाए लगे। ये मलेशिया के जीवन से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे। आधुनिक सभ्यता पर टिप्पणी कर रहे थे। इस समय काफी लोग मलेशिया छोड़ कर रोजगार की खोज में सिंगापुर पलायन कर रहे थे और अपनी जड़ों से, अपनी परम्परा से, अपनी संस्कृति से दूर हो रहे थे।
इस काल की मलाया फिल्में इन बातों को अपनी फिल्मों में उठा रही थीं। इसी समय ‘विस्ट्फुल रीड’ बनी इसे बी. एस. राजहंस ने निर्देशित किया था और इसमें इंडोनेशिया के कलाकार शरीफ मेडान ने भूमिका की थी। यह मलेशिया की पहली रंगीन फिल्म है।
साठ के दशक की फिल्में मुख्य रूप से हास्य फिल्में थीं। इसी समय ‘शी-वैम्पायर’ फिल्म सिरीज भी बनी, लेकिन इसी समय बनी फिल्म ‘ग्रैंडसन ऑ लोर्ड मेराह’ भिन्न प्रकृति की थी। सत्तर के दशक में ‘लव एंड सॉन्ग’ म्युजिकल फिल्म बनी।
90 के दशक में एनिमेशन फिल्में
चौथे प्रधानमंत्री डॉ. महाथिर मोहम्मद के साथ यहां एनीमेशन फिल्में बनने लगीं क्योंकि वे सूचना एवं संचार तकनीकि के पक्ष में थे। 1995-2015, बीस साल के दौरान मलेशिया में करीब 200 एनिमेशन फिल्मों का निर्माण हुआ। ये फिल्में देश के बाहर भी देखी गईं। एनीमेशन फिल्म ‘गैंग: दि एडवेंचर बिगिंन्स’ ने बॉक्स ऑफिस पर खूब कमाई की। यह मलेशिया के अलावा इंडोनेशिया, सिंगापुर, भारत में भी देखी गई। निजाम रजक द्वारा निर्देशित यह फिल्म मलेशिया के जंगल में चलती है जहां कुछ युवा और बच्चे दूसरे डाइमेंशन के जीवों के संपर्क में आते हैं।
मलेशिया के सिने-निर्देशक, स्क्रिप्टराइटर तथा एक्टर एडमैन बिन मोहम्मद सालेह, जो एडमैन सालेह के नाम से जाने जाते हैं, उन्होंने अब तक मात्र तीन फिल्में बनाई हैं जिसमें ‘ब्युटीज ऑफ द नाइट’ एक भाई की अपनी बहन की खोज से जुड़ी है, ‘अमोक’ परम्परा के साथ ‘येलो कल्चर’ यानि पतनशील व्यवहार को दिखाती है। ये दोनों फिल्में उन्होंने पिछली सदी में बनाई। इस सदी में उन्होंने बनाई ‘पालोह’ (2003, पालोह टाउन)। फिल्म द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक युवक की चिंताओं, परेशानियों भरे अनुभवों को साझा करती है। इस समय जापान ने देश को अधिकृत कर लिया है।
यह फिल्म पहली बार चीनी व्यक्ति के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया दिखाती है। चीनी व्यक्ति जो उथल-पुथल में फंसकर अपनी मानसिक शांति खो बैठा है। यह अपने समय से आगे की फिल्म है। उस समय कई दर्शकों को फ्लैशबैक समझ में न आया और वे पूरी फिल्म देखे बगैर उठ जाते थे।
राजा अहमद अलाउद्दीन ने भी 1990 में ‘द हार्ट इज नॉट ए क्रिस्टल’, 1996 में ‘वैली ऑफ वेंजेन्स’ पिछली सदी में बनाई और 2005 में ‘कैसी एंड लैला’ (द लवर्स) बनाई तथा 2007 में ‘कैयांगन’ (फैंटसी) बनाई। इसी समय टेलेविजन कमर्शियल्स के निर्देशक सी. एल. होर ने भी फिल्मी दुनिया में प्रवेश किया और उन्होंने 2008 में ‘द थर्ड जेनेरेशन’ फिल्म चीनी भाषा में बनाई।
फिल्म बताती है कि परिवार का जमा किया गया धन तीसरी पीढ़ी तक नहीं पहुंचेगा। उन्होंने ही ‘किन्टा’ कुंगफू एक्शन फिल्म बनाई थी। 2010 में एक और एक्शन फिल्म ‘द गिफ्ट’ यहां बनी। हिजमुद्दीन राइस ने एक विद्रोही फिल्म ‘फ्रॉम जेमापोह टू मैनचेस्टर’ 2001 में बना कर मलेशिया के युवाओं को आवाज दी कि वे मलाया संस्कृति अथवा यहां की राजनीति के नियंत्रण में न रह कर अपने जीवन की बागडोर स्वयं संभालें।
यदि हम देखें तो पाएंगे कि मलेशिया का सिने-इतिहास निरंतर विकासशील है।
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