बोलिविया की सिने-कम्युनिटी
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नब्बे का दशक और फिल्में
नब्बे के दशक और सदी के पहले दशक में बोलिविया में जुआन कार्लोस वैल्डिविआ, रोडरिगो बेलोट जैसे खास सिने-निर्देशक बोलिविया में हुए। पांच उच्च कोटि के सिने-पुरस्कार जीतने वाले जुआन कार्लोस वैल्डिविआ ने कई अन्य फिल्मों के अलावा अपने निजी अनुभवों के आधार पर तीन फिल्में- ‘जोन सुर’, ‘लैंड विदआउट इविल’ तथा ‘सोरेन’ (Soren) बनाई।
‘जोन सुर’ को तीन, ‘लैंड विदआउट इविल’ को 2 पुरस्कार मिले। ‘लैंड विदआउट इविल’ में उन्होंने खुद मुख्य भूमिका की है। रोडरिगो बेलोटने ‘सैक्सुअल डिपेंडेन्सी’, ‘हू किल्ड द व्हाइट लामा?’ बनाई उन्होंने ‘परफिडिआ’ नाम से एक प्रयोगात्मक फिल्म इंग्लिश भाषा में बनाई, जिसमें मात्र दो मिनट के संवाद हैं।
फिल्म ‘हू किल्ड द व्हाइट लामा?
‘हू किल्ड द व्हाइट लामा?’ वैसे तो कॉमेडी है लेकिन इसके निहितार्थ गहन हैं। गरीबी के सामने कुछ भी पवित्र नहीं होता है, न ही अपराध, राजनैतिक संबंध। फिल्म बोलिविया में चल रहे राजनैतिक, आपरधिक, तथा ड्रग व्यापार का पर्दाफाश करती है। संयोगवश एक व्हाइट लामा शावक मारा जाता है और तब शुरू होती है मीडिया की कहानी। इसमें एरिका एंडिआ, मिग्युल वैल्वेर्डे ने मुख्य भूमिकाएं की हैं।
जुआन कार्लोस वैल्डिविआ की 2005 की फिल्म ‘अमेरिकन वीसा’ में एक बोलिवियन प्रोफेसर को जब अमेरिका का वीसा नहीं मिलता है तो वह आपराधिक गतिविधियों के जाल में उलझ जाता है। वह अमेरिकन कोन्सुलेट को घेरता है और बोलिविया की एक खूबसूरत वेश्या के प्रेम में पड़ जाता है। फिल्म को तीन पुरस्कार प्राप्त हुए।
‘ब्लैकथोर्न’ (2011), ‘ब्लूबीयर्ड’ (2012), ‘चाको’ (2020), ‘ब्लड-रेड बॉक्स’ (2021), ‘उतमा’ (2022) बोलिविया से आने वाली इस सदी की कुछ महत्वपूर्ण फिल्में हैं। एमी हेस्केथ की फिल्म ‘ब्लूबीयर्ड’ क्लासिक परिकथा पर आधारित है। इसी फ्रांसिसी लेखक तथा फेयरीटेल के जनक चार्ल्स पेरॉल्ट ने ‘सिंड्रेला’ भी लिखा। ‘ब्लूबीयर्ड’ एक धनी और डरावने नीली दाढ़ी वाले आदमी की कहानी है, जो अपनी पत्नियों की हत्या करता है। इसमें जैक एविला, वेरोनिका आदि ने अभिनय किया है।
चारों ओर जमीन से घिरे देश बोलिविया की सिने-कम्युनिटी बहुत छोटी-सी लेकिन आपस में जुड़ी हुई हैं। लैटिन अमेरिकी अन्य देशों की भांति बोलिविया में भी उथल-पुथल रही है, इसके बावजूद यहां कई अच्छी और अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धि की पुरस्कृत फिल्में बनी हैं।
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