बीसवीं सदी के साठ और सत्तर के दशक में ऑस्ट्रेलिया में रचनात्मकता का एक विस्फोट हुआ था, जब ऑस्ट्रेलियन फिल्म कमीशन की स्थापना हुई और ऑस्ट्रेलियन फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल खुला। फिल्म बनाने के लिए सरकारी रियायतें घोषित हुई।
गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग इसी समय की उपज हैं, आगे चल कर वे ‘द पियानो’ जैसी बेहतरीन फिल्म की निर्देशक न्यूजीलैंड की निवासी जेन कैम्पिअन की प्रेरणा और रोल मॉडल बनीं। जेन कैपिअन ने भी ऑस्ट्रेलियन फिल्म एंड टेलीविजन स्कूल में प्रशिक्षण पाया था। सिने-निर्देशक एवं प्रड्युसर गिलियन आर्मस्ट्रॉंग का जन्म 18 दिसम्बर 1950 को ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हुआ था। जॉन प्लेफर से उनकी शादी हुई, उनके दो बच्चे हैं।
उनकी फिल्म ‘माई ब्रिलियंट कैरियर’ (1979) ने गिलियन आर्मस्ट्रॉन्ग को सफलता की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर भी जम कर सफलता मिली। वे चालीस साल में ऑस्ट्रेलिया की पहली महिला फिल्म निर्देशक हैं, जिसने फीचर फिल्म बनाई।
‘माई ब्रिलियंट कैरियर’ फिल्म एक मजबूत इरादों वाली महत्वाकांक्षी स्त्री की कहानी है, जिसे सुंदर न होने के कारण काफी कुछ झेलना पड़ता है, मगर जो संघर्ष करती है और अंतत: एक लेखिका बन कर उभरती है। मजे की बात यह है कि परिवार जिसे बदसूरत समझता है, उसे उस इलाके का सबसे खूबसूरत युवक पसंद करता है।
‘माई ब्रिलियंट कैरियर’ (1979)
एक घंटा चालीस मिनट की यह फिल्म माइल्स फ्रैंकलिन के इसी नाम के उपन्यास (1901) पर आधारित है, जिसका लेखन एलिनोर विटचोम्ब ने लेखक के साथ मिल कर किया है। फिल्म बीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध के ऑस्ट्रेलिया के समाज को दिखाती है। माइल्स फ्रैंकलिन ने खुद विवाह के मार्ग से नहीं बल्कि अपना भविष्य लेखक के रूप में सुरक्षित किया। माइल्स फ्रैंकलिन नारीवाद, ऑस्ट्रेलिया के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के लिए जानी जाती हैं।
इस फिल्म में ऐसा नहीं है कि परिवार नायिका की सहायता नहीं करना चाहता है वे सब उसकी सहायता करना चाहते हैं मगर उनका मानना है कि शादी ही लड़की के भविष्य को सुरक्षित करने का एकमात्र उपाय है और इसकी वे भरपूर कोशिश करते हैं। लेकिन वह ऐसा नहीं मानती है उसके अनुभव भी उसे यही सिखाते हैं।
सिविला मैल्विन (जूडी डेविस) जानती है कि उसका छोटा कस्बा कभी उसके लिए लेखक, संगीतज्ञ या कलाकार का अवसर नहीं जुटा सकता है, वहा तो बस मां के द्वारा तय नौकरानी ही बना जा सकता है। जब वह ये प्रस्ताव नकार देती है तो उसे ऑन्ट हेलेन (वेन्डी हग्स) तथा अंकल जुलिअस (पीटर विटफोर्ड) के साथ उसकी उच्च समाज की रहवासी ग्रैंडमदर(एलीन ब्रिटन) के पास रहने केलिए भेज दिया जाता है। वहां भी उसे शादी केलिए कहा जाता है मगर वह कुछ और सोच रही थी। संयोग से बहुत कुछ अनेपेक्षित होता है और वह अपने मिशन में सफल रहती है।
इस ड्रामा/रोमांस फिल्म में जूडी डेविस, सैम नेल (जिसने ‘द पियानों’ फिल्म में पति का अभिनय किया है) एवं वेन्डी हग्स ने बहुत अच्छा काम किया है, खासकर फिल्म में प्रवेश करने वाली नई जूडी का काम प्रत्येक फ्रेम में देखने योग्य है। उसका अभिनय दर्शक के संस्मरण का हिस्सा बनता है। आश्चर्य नहीं जूडी को बाफ्टा का सर्वोत्तम नायिका का पुरस्कार मिला और साथ ही मिला बाफ्टा का ही नई आई सर्वोच्च अभिनेत्री का अवार्ड।
इस फिल्म को ऑस्ट्रेलिया फिल्म इंस्ट्यूट के छ: पुरस्कार (सर्वोत्तम फिल्म, सर्वोत्तम निर्देशक, सर्वोतम स्क्रीनप्ले, सर्वोत्तम सिनेमैटोग्राफी, सर्वोत्तम प्रोडक्शन डिजाइन एवं मिशेल फैडोन प्राप्त हुए। डॉन मैकेल्पाइन की सिनेमैटोग्राफी इस फिल्म को खूबसूरती से परदे पर लाती है, इसके लिए उन्हें ऑस्ट्रेलियन सिनेमैटोग्राफर्स सोसायटी का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। फिल्म की कस्ट्यूम डिजाइन के लिए ऑस्कर नामांकन भी मिला।