पुकारू नाम टोनी के परिवार में केवल उसके बाबा आइरिश थे और बाकी परिवार मैक्सिकन था। इस अभिनेता की आत्मकथा ‘दि ओरिजिनल सिन: ए सेल्फ-पोर्ट्रेट बाई एंटनी क्विन’ नाम से 1972 में प्रकाशित हुई। गले के कैंसर के साथ हुई कई अन्य बीमारियों के चलते 3 जून 2001 को अमेरिका में उनकी मृत्यु हुई। उनके पिता फोटोग्राफर थे और वे लोग एंटनी के बचपन में ही मैक्सिको छोड़ कर लॉस एंजेलस में आ बसे थे।
फिल्मों का सफर रहा चुनौतीपूर्ण
एंटनी क्विन ने फिल्मों से पहले मंच पर काम किया और ‘ए स्ट्रीटकार नेम्ड डिजायर’ में उनके काम की खूब प्रशंसा हुई। बाद में उन्होंने आर्किटेक्चर की पढ़ाई की, वह भी फ्रैंक लॉयड राइट के साथ, दोनों बहुत करीब थे। राइट ने ही क्विन को अभिनय के लिए प्रोत्साहित किया। इस तरह वे हॉलीवुड पहुंचे। वैसे उनकी दोस्ती जैकलीन ओनासिस से भी थी मगर जब उन्होंने ‘ग्रीक टाइकून’ में काम किया तो जैकलीन ने उनसे बात करना बंद कर दिया।
पहले उन्हें फिल्मी करियर बहुत प्रोमिसिंग नहीं लग रहा था, वे सोचते थे या तो वे बहुत डॉर्क रंग के हैं अथवा दूसरों से बहुत अधिक अलग या फिर बहुत ज्यादा मैक्सिकन। उन्हें लगता इसी कारण अच्छी भूमिकाएं दूसरे अभिनेताओं को दे दी जाती हैं। उनकी कोई बैकिंग भी नहीं थी। मगर बाद में उन्हें खुद पर गर्व था। उन्होंने हॉलीवुड में 1936 में ‘द प्लेन्समैन’ से शुरुआत की। इस फिल्म के निर्देशक सेसिल बी. डेमिले थे जो आगे चल कर उनके ससुर बने।
पत्नी कैथरीन ने उन्हें हॉलीवुड के ऊंचे तबके से परिचित कराया। मगर वहां वे मैक्सिकन होने के कारण बाहरी बने रहे। कैथरीन से तलाक होने के बाद एंटनी क्विन ने जोलान्डा एडोलोरी से शादी की उससे भी तलाक हुआ और तीसरी पत्नी कैथी बेन्विन अंत तक उनके साथ बनी रहीं। रोम और न्यूयॉर्क में एंटनी क्विन के घर हैं।
1952 में एंटनी क्विन को बायोपिक ‘एमिलिआनो जपाटा, वीवा जपाटा’ में सहायक भूमिका के लिए अकादमी पुरस्कार मिला। वे पहले मैक्सिकन अभिनेता थे यह पुरस्कार पाने वाले। यह फिल्म मैक्सिको के एक क्रांतिकारी की जीवनी थी और क्विन ने क्रांतिकारी के भाई की भूमिका की थी। यही पुरस्कार उन्हें दूसरी बार 1956 में मिला इस बार पॉल गोगिन बने थे। यह भी बायोपिक थी। यह ‘विन्सेंट वैन गॉग, लस्ट फॉर लाइफ’ थी, फिल्म में उनके समक्ष कर्क डगलस थे।
काफी समय वे इटली में रहे और विश्व सिनेमा में नाम किया। उन्होंने इटली की बहुत सारी फिल्मों में काम किया। इसी समय उन्होंने फेडेरिको फेलिनी की प्रसिद्ध फिल्म ‘ला स्ट्राडा’ में काम किया। ‘ए वॉक इन द क्लाउड्स’ में संग काम करते हुए किआनू रीव्स से दोस्ती हो गई और वे उसे खूब पसंद करने लगे।
इसी तरह ‘द ब्लैक स्वान’, ‘बफेलो बिल’, ‘सिन्दबाद, द सेलर’, ‘अगेन्स्ट ऑल फ्लैग्स’, ‘द मैग्नीफिसेन्ट मेटाडोर’ तथा ‘ओनली द लोनली’ छ: फिल्मों में साथ काम करने वाली अभिनेत्री मौरीन ओ’हारा से भी उनकी अच्छी दोस्ती थी।
गहन-स्मूद आवाज के धनी एंटनी क्विन ने धीरे-धीरे चरित्र अभिनेता के रूप में अपना मजबूत स्थान बना लिया। ‘वाइल्ड इज द विन्ड’, ‘गन्स ऑफ नवरोन’, ‘द शोज ऑफ द फिशरमैन’, ‘द सीक्रेट ऑफ सांता विटोरिया’, ‘द ग्रीक टाइकून’, ‘द मैसेज’, दि इनहेरिटेनस’, ‘कैरावान्स’ आदि उनकी कुछ प्रसिद्ध फिल्में हैं।
क्विन ने अमेरिकन, अरब, मुगल, चाइनीज, इंग्लिश, ग्रीक, इटैल्यन, मंगोल, आइरिश, फ्रेंच, पुर्तगाली, हूण, युक्रेनियन आदि तमाम लोगों की भूमिकाएं कीं। इस बीच वे टीवी में भी काम करते रहे। बाद में वे ब्रिस्टल चले गए और पेंटिंग तथा मूर्तिकला करते रहे। वियेना, पेरिस, सियोल आदि स्थानों पर जिनके प्रदर्शन हुए। 1915 में मृतोपरांत उन्हें हॉल ऑफ फेम दिया गया।
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