रेड सोर्घम नॉवेल (सांकेतिक)
- फोटो : adobe stock
गर्मी में भी सिर से पांव तक कई परतों में ढकी डाई पालकी में पति के घर जाती हुई अशुभ विलाप सुनती है। उसने कैंची छिपा रखी है, शायद पति शान पर प्रयोग के लिए, शायद खुद पर प्रयोग हेतु। यह नाजुक-सुंदर स्त्री विद्रोह करना जानती है। पसीने से लतपथ ताजा हवा पाने केलिए वह पालकी का परदा हटा देती है। यहीं से उसका जीवन एक भिन्न मोड़ ले लेता है। कितने पूर्वाग्रहों के बीच उसका लालन-पालन हुआ है, जैसे यदि दुल्हन किसी भी कारण से उल्टी कार दे तो यह आने वाले दुर्भाग्य का सूचक है।
डाकू से कहारों का सामना होता है, एक कहार डाकू का सामना करता है और आगे चल कर वह कोढ़ी और उसके पिता को मारता है, डाई का प्रेमी-पति, उसके बच्चे का पिता बनता है। लेकिन वह भी बाद में दो और स्त्रियों से संपर्क करता है।
स्त्रियों का आदर करने वाले मो यान की रची डाई एक बहादुर स्त्री है, पुरुषों की भांति सोर्घम शराब का व्यापार सफलतापूर्वक करती है, अपने कामगरों को बराबरी का दर्जा देती है। पति की बेवफाई का बदला लेती है। जापानियों से लड़ने की जुगत बताती है। द्वितीय दादी मां यानि अपनी सौत से लड़ती-झगड़ती है मगर जब जापानी उसका सामूहिक बलात्कार करते हैं, तब डाई ही उसकी देखभाल कर उसे स्वस्थ करती है। यह बहादुर-बुद्धिमान स्त्री जापानियों का शिकार होती है। उपन्यास उसकी मय्यत को मिट्टी दिए जाने का विस्तार से चित्रण करता है।
सोर्घम के सौंदर्य का वर्णन
बीसवीं सदी के दूसरे दशक से सत्तर के दशक तक फैले, करीब पौने चार सौ पन्नों का उपन्यास ‘रेड सोर्घम’ पूरे समय सोर्घम के सौंदर्य से भरा हुआ है, उसका लाल रंग समृद्धि, अनुराग, लड़ाई, हत्या, मौत विभिन्न बातों का प्रतीक है। उपन्यास की भाषा (इंग्लिश में भी) खूब चित्रात्मक है। यह गाथा एक ओर जहां एक परिवार का इतिहास है, वहीं चीन का इतिहास भी है।
इस उपन्यास में कुत्तों का विशिष्ठ स्थान है। कुत्ते आदमी के वफादार साथी, उनका भोजन, उनके दुश्मन, उनके कपड़े हैं। अतियथार्थवादी शैली में प्रेम-द्वैष, चीन-जापान युद्ध, समुदायों की आपसी लड़ाई, जुगुप्सा, ईर्ष्या, विद्रोह, लोककथाओं का संगुफन है।
तीन पीढ़ियों की कहानी समेटता, इतना मोटा उपन्यास पढ़ने में अगर दिक्कत हो तो 1988 की फिल्म देख लें। इस अनोखी कहानी केलिए आप डेढ़ घंटे का समय तो अपने व्यस्त कार्यक्रम में निकाल ही सकते हैं।
-------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।