केनजाबुरो ओए के नॉवेल (सांकेतिक)
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उपन्यास में डॉक्टर की अमानवीयता, उनके भोथरेपन को भी दिखाया गया है। रिसीवर की दूसरी ओर से आवाज आती है, ‘सीधे अस्पातल चले आइये। बच्चा असामान्य है।’ केनजाबुरो डॉक्टर का चित्र खींचते हैं, नाटा, हद दर्जे का मोटा आदमी, उसका गाउन मैला था जिसके ऊपरी खुले भाग से उसकी छाती दीख रही थी। छाती बालों से भरी हुई थी, बाल ऐसे मानो ऊंट की पीठ के बाल हों।
ऊपरी होंठ, गाल, गला सब पर बाल बढ़े हुए थे। उसे दाढ़ी बनाने का समय नहीं मिला था। इस मध्य-वय के आदमी में कुछ तो सन्देहास्पद था। कुछ घातक था, जिसे वह जबरदस्ती रोके हुए था। अन्त में वह पाइप मुंह से निकाल कर बर्ड से ऊंची आवाज में कहता है, ‘पहले तुम चीज (गुड्स) देखना चाहोगे?’ वह बच्चा, मरीज शब्द का नहीं ‘चीज’ शब्द का प्रयोग करता है।’...
कहता है, ‘शिशु का मूवमेंट खूब जानदार है और उसकी आवाज बहुत मजबूत है।’... ‘ठीक है तब, क्या आप गुड्स देखना चाहेंगे?’ चिकित्सा के पेशे से मानवीयता गायब है।
उसके ऊपर वाला डॉक्टर उससे भे बीस है। लम्बा-पतला दूसरे डॉक्टर (डॉयरेक्टर) की एक आंख कांच की है। उसका व्यवहार एक मसखरे जैसा, एक नीम-हकीम जैसा है। नर्स भी भी कुछ कम नहीं है, चहकती हुई कहती है, ‘ओह हां, आप ब्रेन हार्निया वाले बेबी को देखना चाहते हैं।’ मानो बड़ी मजेदार बात कह रही हो।
आगे वह कहती है, ‘बेशक वह जिन्दा है! खूब मजे में दूध पी रहा है और उसके हाथ और पैर ठीक और खूब मजबूत हैं।’ इतना ही नहीं, वह बर्ड को बधाई देती है। वह ऐसे बोल रही, मानो ‘अस्पताल के सर्वाधिक स्वस्थ और खूबसूरत बच्चे के पिता से मुखातिब हो।’
ऑपरेशन के बाद भी समस्या समाप्त नहीं हुई थी, और विकराल रूप धारण करने वाली थी। केनजाबुरो ओए के शिशु हिकारी को एक मनुष्य के रूप में जीवन प्रारम्भ करने में तीन-चार साल लग गये। 16 साल की उम्र में हिकारी को एक जबरदस्त दौरा पड़ा, वह अपनी दोनों आंखें गंवा बैठा। वह दोनों आंख से अलग-अलग देख सकता था, एक साथ दोनों से नहीं देख सकता था। उसने बाख का संगीत लिखना शुरू कर दिया था, अपना संगीत भी लिखने लगा था। वह पियानो बजाता था।
अब चूंकि वह देख नहीं सकता था, उसने तंग आकर पियानो बजाना छोड़ दिया। हिकारी की मां ने उसे फिर से लिखना सिखाना शुरू किया। आज हिकारी जापान का एक प्रसिद्ध म्युजिक कम्पोजर है। ‘म्यूजिक ऑफ हिकारी ओए’ उसका पहला संगीत सीडी है। वह मोजार्ट के संगीत का विशेषज्ञ है।
अपने बेटे हिकारी के शुरुआती जीवन से जुड़ी एक बहुत मार्मिक बात केनजाबुरो ओए अपने नोबेल भाषण में बताते हैं। यह घटना उपन्यास में चित्रित है। उपन्यास ‘ए पर्सनल मैटर’ पाठक से जीवन का मूल्य समझने की उम्मीद करता है। केनजाबुरो ओए का उपन्यास मृत्यु के इर्द-गिर्द बुनी हुई रचना है। जो पाठक को जन्म-मृत्यु पर विचार करने के लिए बाध्य करती है। लेकिन मृत्यु के विचार से ग्रसित यह रचना जीवनोन्मुन्मुख है, जीवन के महत्व को स्थापित करती है।
यह विशिष्ट, उद्देश्यपूर्ण रचना स्पष्ट रूप से कहती है कि विकलांग व्यक्ति को भी जीवन का अधिकार है। स्वस्थ व्यक्तियों का कर्तव्य और दायित्व है कि वे ऐसे लोगों के जीवन को अर्थथवत्ता प्रदान करने में सहयोग करें। रचनाकार मानवता के पक्ष में खड़ा है।
एक बार स्वयं ‘ए पर्सनल मैटर’ पढ़ कर देखें, जीवन के प्रति आपका नजरिया परिवर्तित हो जाएगा।
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