हिंदी में ध्वनियों का उच्चारण अपेक्षाकृत सीधा एवं नियमित है। संस्कृत से आई विशेष ध्वनियां जैसे ट, ठ, ड, ढ, ण इसे अनोखा बनाती हैं, जो अंग्रेजी या अन्य यूरोपीय भाषाओं में नहीं मिलतीं। हिंदी में शब्द बनाने की क्षमता बहुत लचीली है। हिंदी में तत्सम (संस्कृत से यथावत), तद्भव (संस्कृत से बदले हुए), देशज (लोकभाषाओं से) और विदेशी (फारसी, अरबी, अंग्रेजी आदि से) शब्द पाए जाते हैं। हिंदी के व्याकरण की बात करें तो हिंदी में लिंग (पुल्लिंग–स्त्रीलिंग), वचन (एकवचन–बहुवचन) एवं काल की स्पष्ट व्यवस्था है। क्रियाओं का रूप कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार बदलता है, जैसे वह गया (पुल्लिंग) और वह गई (स्त्रीलिंग) है।
हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भावनाओं से गहराई से जुड़ी हुई है। हिंदी में लोकगीत, मुहावरे, दोहे, चौपाई एवं कहावतें सांस्कृतिक पहचान बनाती हैं। विशेष बात यह है कि हिंदी ने समय के साथ अलग-अलग भाषाओं से शब्द अपनाए हैं। फिर भी हिंदी ने अपनी मौलिक पहचान बनाए रखी है। यही कारण है कि हिंदी को लोकप्रिय और जीवंत भाषा माना जाता है।
गैर हिंदी भाषी लोगों की बात करें तो जब एक बांग्ला भाषी हिंदी बोलता है तो वह लिंग की गलती कर देता है। दक्षिण भारतीय हिंदी बोलता है तो वह उच्चारण में गड़बड़ी कर देता है। दरअसल, हिंदी में हर संज्ञा पुल्लिंग या स्त्रीलिंग होती है। यह हमेशा अनुमान से नहीं पता चलता, जैसे किताब स्त्रीलिंग और कमरा पुल्लिंग होता है। क्रिया कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार बदलती है, जैसे वह गया/वह गई/वे गए। प्रश्न यह है कि आखिर हिंदी कुछ लोगों को कठिन क्यों लगती है? तो उत्तर है, हिंदी में संस्कृत, अरबी, फारसी एवं अंग्रेजी से आए शब्द मिलते हैं, जिससे नए सीखने वालों को कठिनाई होती है। हिंदी बोलना आसान है, लेकिन व्याकरणिक शुद्धता एवं साहित्यिक हिंदी में निपुण होना थोड़ा कठिन है।
देवनागरी लिपि में अधिकांश लोग, जिनमें हिंदी भाषी भी शामिल हैं, गलती करते हैं। दरअसल, हिंदी में स्वर-चिह्न (मात्राएं) बहुत हैं, जैसे ि, ई, ु, ऊ, े, ै, ो, औ। यही कारण है कि शीघ्र लिखते समय या ध्यान न देने पर लोग मात्रा बदल देते हैं, जैसे निवेदन को निबेदन या कृपा को किरपा लिख दिया जाता है। फिर लोग अपनी स्थानीय बोली के हिसाब से भी हिंदी लिखते हैं, जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में सड़क को सड़कवा बोला जाता है और ऐसे ही लिख दिया जाता है।
हालांकि, चुनौतियों के बावजूद हिंदी का वैश्विक प्रसार सराहनीय है। हिंदी सिनेमा और साहित्य ने विश्व स्तर पर हिंदी की लोकप्रिय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। आज डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए विदेशी युवाओं में हिंदी की रुचि बढ़ रही है। हिंदी दिवस सम्मेलन, हिंदी दिवस, विदेश मंत्रालय के हिंदी प्रचार कार्यक्रम या कूटनीति एवं सांस्कृतिक प्रचार माध्यमों से भी हिंदी को लोकप्रिय बढ़ रही है। आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) व डिजिटल शिक्षा ने हिंदी को और अधिक सुलभ बनाया है। हम यही संकल्प लें कि केवस एक दिन हिंदी दिवस के रूप में नहीं मनाकर प्रतिदिन हिंदी को समर्पित करें।
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