अवसंरचना के अभाव ने शिक्षा की गुणवत्ता और विस्तार दोनों को ही प्रभावित किया है- सांकेतिक तस्वीर
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'स्वयं' एक ऐसा ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म है, जिसे भारतवासियों ने भारतवासियों के लिए तैयार किया है। इसके जरिए कोई भी व्यक्ति, कहीं से भी उच्च गुणवत्ता के शैक्षणिक संसाधनों तक आसानी से पहुंच सकता है।
'स्वयं' के जरिए पढ़ा भी जा सकता है और डिग्री भी पाई जा सकती है। उच्च रैंक के कई विश्वविद्यालय 'स्वयं' के तहत डिग्री प्रदान करते हैं। वर्तमान में 'स्वयं' के अतंर्गत 4084 कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं।
'स्वयं' के जरिए उच्च शिक्षा को इंटरनेट पर सुलभ करा रही वर्तमान सरकार 'दीक्षा' के जरिए स्कूली शिक्षा को इंटरनेट पर उपलब्ध करा रही है। 'दीक्षा' का लक्ष्य 'एक राष्ट्र, एक पोर्टल' के तहत एनसीआरटी और सीबीएससी सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बोर्डों के ई-कंटेट को इंटरनेट पर उपलब्ध कराना है। फिलहाल 15 भाषाओं के 95,000 ई-कंटेट इंटरनेट पर उपलब्ध हो चुके हैं।
अध्यापन और शोध अवसरंचना विकास के अन्य महत्वपूर्ण पाये हैं। मानव संसाधान विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ने पिछले साल स्कूल अध्यापकों के एकीकृत प्रशिक्षण के लिए पिछले वर्ष 'निष्ठा' ( NISHTHA) कार्यक्रम लांच किया था।
इस कार्यक्रम का लक्ष्य 42 लाख शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षित करना है, और अब तक 15 लाख से ज्यादा शिक्षकों और 1.6 लाख से ज्यादा प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
अध्यापकों को प्रशिक्षित करने के लिए लांच किया गया 'पंडित मदन मोहन मालवीय नेशनल मिशन ऑन टीचर्स एंड ट्रेनिंग' भी एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है।
इस कार्यक्रम के तहत स्कूल और कॉलेज, दोनों ही स्तरों पर अध्यापकों को प्रशिक्षित किया जाता है, और अब तक विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के 95 लाख अध्यापक प्रशिक्षित हो चुके हैं।
इनके अतिरिक्त लीप (LEAP) और अर्पित (ARPIT) भी ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनके तहत उच्च शैक्षणक संस्थानों के अध्यापकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। शोध की गुणवत्ता बेहतर करने और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सरल करने के लिए सरकार ने इम्प्रेस (IMPRESS) और इम्प्रिंट (IMPRINT) जैसे कार्यक्रम आरंभ किए हैं।
इम्प्रेस के तहत अब तक 739 परियोजनाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जा चुकी है। जबकि इम्प्रिंट का लक्ष्य ज्ञान को व्यवहार्य तकनीकी में बदलना है और इसके तहत 10 ज्ञानक्षेत्रों में 319 परियोजनाओं पर कार्य हो रहा है।
सरकार की मंशा है कि इन नवाचारों के जरिए विश्वविद्यालयों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए। शोध और अध्यापन की गुणवत्ता बेहतर कर भारतीय विश्चविद्यालयों को विश्व के श्रेष्ठतम विश्वविद्यालयों की कतार में शामिल किया जाए। विकास की स्वाभाविक गति सतत ओर सुचारू होती है।
वर्तमान शासनतंत्र की ओर से उच्च शिक्षा में अधिरोपित विकास के ये नवाचार सतत और सुचारू रहे तो विकास का विशाल वृक्ष हमारे सामने होगा।
प्रो. हरिश्चंद्र सिंह राठौर दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया, बिहार में कुलपति हैं।
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