हरियाणा चुनाव में स्थानीय मुद्दों पर राष्ट्रीय मुद्दे हावी होते दिखाई दे रहे हैं।
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हरियाणा में कहां हैं राज्य के स्थानीय मुद्दे
पांच साल में तमाम विकास के दावों के बीच ठीक चुनाव से पहले राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्रर लागू करने की बात कर दी। हालांकि हरियाणा जैसे राज्य में विदेशी घुसपैठियों की समस्या इतनी नही है, जितना इसपर हो हल्ला मचाया भाजपा मचा रही है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राज्य सरकार को शायद खुद के किए गए विकास कार्यों पर भरोसा नहीं है, इसलिए एनआरसी का मुद्दा खट्टर ने हरियाणा चुनाव से ठीक पहले उठाया है। दिल्ली के आसपास एनसीआर के तमाम जिलों में विदेशी घुसपैठियों की समस्या जरूर है, लेकिन यह लाखों में हजारों में है। इधर, हरियाणा के मेवात, गुड़गांव और फरीदाबाद इलाके में विदेशी अवैध नागरिक जरूर हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है।
दरअसल भाजपा एक सोची-समझी रणनीति के तहत चुनाव अभियान चला रही है, क्योंकि विधानसभा चुनाव सामान्यत स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं। भाजपा को पता है कि बेशक विपक्ष कमजोर है, लेकिन स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता खुद-बखुद विपक्ष के पाले मे जा सकती है, इसलिए हरियाणा में एनआरसी और 370 जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को उठाना जरूरी है।
गौरतलब है कि हरियाणा से काफी संख्या में लोग सेना में नौकरी करते हैं। दक्षिण हरियाणा के जिलों में पूर्व सैनिकों की अच्छी संख्या है। वहीं राज्य का लगभग हर नागरिक 370 और एनआरसी को लेकर इमोशनल है।
इसमें कोई शक नहीं है कि धारा 370 के साथ हरियाणा के लोग इमोशनल हैं। भाजपा इसका लाभ उठा सकती है, इसलिए कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा पहले ही सावधान हो गए। उन्होंने धारा-370 को हटाए जाने का समर्थन किया, क्योंकि उन्हें इसका अंदाज है कि भाजपा सरकार के 370 हटाए जाने का विरोध करना कांग्रेस ही नहीं उन्हें भी हरियाणा में भारी पड़ेगा। हुड्डा ने एक रणनीति के तहत 370 को हटाए जाने का समर्थन किया ताकि भाजपा इसका चुनावी लाभ नहीं ले सके।
बेरोजगारी का मुद्दा राज्य का सबसे अहम मुद्दा बनकर सामने आया है।
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राज्य में 20 लाख लोग बेरोजगार, विपक्ष कितना बना पाएगा मुद्दा
हरियाणा एक छोटा सा राज्य है जहां की आबादी 2011 के जनसंख्या रिपोर्ट के अनुसार 2.54 करोड़ है। लेकिन राज्य में बेरोजगारी प्रमुख समस्या आज भी है। मनोहर लाल खट्टर की सरकार रोजगार उपलब्ध करवाने के तमाम दावे कर रही है। लेकिन सेंटर फॉर मोनेटरिंग इंडियन इकनॉमी के आंकड़े राज्य सरकार के दावे पर सवाल उठाती है।
सेंटर फॉर मोनेटरिंग इँडियन इकनॉमी राज्य में लगभग 20.20 लाख लोग बेरोजगार हैं। वहीं स्वराज्य इंडिया के राज्य अध्यक्ष राजीव गोदारा कहते हैं कि खट्टर सरकार के रोजगार संबंधी सारे दावे गलत हैं। गोदारा के अनुसार राज्य सरकार का दावा है कि 49 हजार सरकारी नौकरियां युवाओं को दी गई है। लेकिन इस दावे में दम नहीं दिखाई देता।
गोदारा के अनुसार इस समय हरियाणा बेरोजगारी के मामले में नंबर-1 पर है। राजीव गोदारा के अनुसार सूचना के अधिकार कानून के तहत ली जानकारी के मुताबिक राज्य के 15 जिलों में 15 लाख से ज्यादा युवा बेरोजगार हैं। राज्य में बेरोजगारी की दर 28 प्रतिशत के करीब है। जबकि हरियाणा से तीन गुणा ज्यादा आबादी वाले मध्य प्रदेश और तमिलनाडू में बेरोजगारों की संख्या हरियाणा से कम है।
दरअसल, हाल के मंदी ने राज्य के ऑटो इंडस्ट्री को प्रभावित किया है। गुड़गांव के ऑटो इंडस्ट्री के प्रभावित होने के कारण ऑटो इंडस्ट्री पर निर्भर तमाम छोटे-छोटे उद्योगों में लोगों की छंटनी हुई। ये उद्योग गुड़गांव के आसपास के इलाके में हैं, वहीं पानीपत जैसे शहर के कंबल उद्योग भी मंदी का शिकार हैं जहां लगभग एक लाख लोग काम करते हैं।
चुनाव प्रचार शुरू, कांग्रेस की गुटबाजी कम नहीं
भाजपा को बिखरे विपक्ष से खासी उम्मीद है। कांग्रेस के नेता भूपेंद्र सिंह हुडडा कई बड़े वादे कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कांग्रेस के घोषणापत्र कमेटी के चेयरमैन किरण चौधरी से उनका तालमेल नहीं बैठ पाया है। किरण चौधरी उनके हर चुनावी वादों को घोषणापत्र में फिलहाल शामिल करने को तैयार नहीं है। किरण चौधरी और हुड्डा के शुरू से अच्छे संबंध नहीं है।
हुड्डा को अभी किरण चौधरी को हटाकर ही नेता प्रतिपक्ष बनाया गया था। हाल ही में घोषणापत्र कमेटी की बैठक में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर भी नहीं पहुंचे। चुनाव प्रचार शुरू हो गया है और अशोक तंवर अभी भी खुलकर हुड्डा से नाराजगी जता रहे हैं।
भाजपा नेताओं का साफ दावा है कि कांग्रेस की यही गुटबाजी भाजपा को सत्ता में लाएगी। जनता को पता है कि विपक्ष टूटा है। ओमप्रकाश चौटाला के दोनों बेटों ने अलग-अलग राह पकड़ ली है। वो अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे। उनके प्रभाव इलाके में दोनों बेटों की ल़ड़ाई के कारण जाट वोट विभाजित होगा।
वहीं भाजपा को यह उम्मीद है कि फिलहाल बेरोजगार हरियाणा में मुद्दा नहीं है, जितना जाट बनाम गैरजाट मुद्दा है। मतदान के वक्त एक बार फिर लोगों जातीय विभाजन के आधार पर ही वोट करेंगे। गैर जाटों में अभी भी यह भय है कि कांग्रेस अगर सत्ता में आई तो जाट मुख्यमंत्री बनेगा, इसलिए मतदान केंद्र पर पहुंचते ही कन्फयूज गैर जाट वोटर भी भाजपा को ही वोट करेगा।
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