जनसभा को संबोधित करते हुए मनोहर लाल खट्टर
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उतर हरियाणा और जीटी रोड बेल्ट में इस बार भाजपा कितनी सफल होगी?
उत्तर हरियाणा और जीटी रोड बेल्ट में 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को अच्छी सफलता मिली थी। इस इलाके में हरियाणा के पंचकूला, अंबाला, यमुनागर, कुरूक्षेत्र, पानीपत, करनाल और सोनीपत इलाका आता है। इस इलाके की लगभग 32 सीटों में से भाजपा ने 22 सीटों पर जीत दर्ज हासिल की थी। 2014 में परंपरा से हटते हुए इस इलाके के लोगों ने भाजपा को स्वीकार किया था।
हरियाणा के दोनों परंपरागत पार्टी कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल को इस इलाके में हार मिली थी। भाजपा की बहुमत भी इस बार यही इलाका तय करेगा। उत्तर हरियाणा और जीटी रोड बेल्ट के लगभग 70 प्रतिशत सीटों पर गैर जाट बिरादरियों का वर्चस्व है।
इसमें पाकिस्तान से आए सिख, हिंदू पंजाबी, स्थानीय गुर्जर, सैनी और दलित जातियां शामिल हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव में इन जातियों के मतदाताओं पर नरेंद्र मोदी का स्पष्ट प्रभाव दिखा था। 2019 के लोकसभा चुनावों में भी यह प्रभाव कायम रहा।
चुनाव के नजदीक कांग्रेस टक्कर में आ गई
शुरू में तो उतर हरियाणा और जीटी रोड बेल्ट में कांग्रेस कमजोर नजर आ रही थी। लेकिन चुनाव के ठीक नजदीक आने से पहले एकाएक उत्तर हरियाणा और जीटी रोड बेल्ट के कई सीटों पर कांग्रेस के मजबूत होने की खबर आने लगी। इन खबरों के बाद भाजपा सक्रिय हो गई। मिली जानकारी के मुताबिक एकाएक किसानों के संकट और युवाओं में बेरोजगारी जैसे स्थानीय मुद्दों को उठा कांग्रेस ने अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे भाजपा में घबराहट जरूर आई।
भाजपा ने इसके बाद रणनीति बदल धारा-370 और राफेल से कांग्रेस पर जवाबी हमला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने भाषण में 370 का उल्लेख किया, वहीं राजनाथ सिंह हरियाणा के अपने चुनावी दौरे में राफेल का जिक्र करते रहे। इससे साफ हो गया कि भाजपा पूरी तरह से राष्ट्रवादी बैट के साथ चुनावी मैदान में उतरी है।
दरअसल, भाजपा को यह पता है कि युवा और किसान भाजपा से काफी नाराज हैं, इसलिए भाजपा का मुख्य उद्देश्य नाराज किसानों और बेरोजगार युवाओं को 370 और राफेल के माध्यम से अपनी तरफ करना है। भाजपा को डर है कि गैर जाट पिछड़ी किसान जातियां नाराज होकर कांग्रेस की तरफ न चली जाए, इसलिए लगातर 370 और राफेल पर भाजपा बैटिंग कर रही है। इसके बावजूद गांवों में कांग्रेस टक्कर देने की स्थिति में है।
भाजपा को काफी उम्मीद अहिरवाल सीट से है। दक्षिण हरियाणा के यादव बहुल इलाके को अहिरवाल के तौर पर जाना जाता है,
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अहिरवाल से भाजपा को मिलेगी अच्छी सीटें?
भाजपा को काफी उम्मीद अहिरवाल सीट से है। दक्षिण हरियाणा के यादव बहुल इलाके को अहिरवाल के तौर पर जाना जाता है, जहां भाजपा इस समय अच्छी- खासी मजबूत है। अहिरवाल इलाके में यादव खासे मजबूत हैं। हरियाणा में यादवों की राजनीति काफी दिलचस्प है। जहां दूसरे राज्यों यादव जाति भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोले बैठी है, वहीं हरियाणा के यादव खुलकर भाजपा के साथ है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के यादव जहां भाजपा के खिलाफ हैं, वहीं हरियाणा के यादव खुलकर भाजपा के साथ हैं। 2014 में भाजपा ने अहिरवाल इलाके में 11 सीट हासिल की थी। अहिरवाल इलाके में हरियाणा के गुड़गांव, महेंद्रगढ, रेवाड़ी आदि जिले आते हैं।
दरअसल, अहिरवाल इलाके के यादवों के भाजपा के समर्थन में आने के दो कारण हैं। यादवों की हरियाणा की राजनीति में जाटों से राजनीतिक वर्चस्व की परंपरागत लड़ाई है। जाटों के वर्चस्व के खिलाफ यादवों ने हरियाणा मे हमेशा मोर्चा खोले रखा। दूसरे इस इलाके से अच्छी संख्या में यादव सैन्य बलों में हैं। यहां पर धारा 370 का मुद्दे के कारण भाजपा को लाभ मिल रहा है।
बांगर बेल्ट में भाजपा की चुनौती
बांगर के इलाके में हरियाणा के तीन राजनीतिक परिवारों का वर्चस्व रहा है। 2014 में इस इलाके में भाजपा सफल नहीं हुई थी। यह इलाका तीन राजनीतिक परिवार देवीलाल परिवार, बंसीलाल परिवार और भजनलाल परिवार का प्रभाव वाला इलाका रहा है। देवीलाल परिवार अब टूट चुका है। बंसीलाल परिवार की किरण चौधरी अस्तित्व बचाने की लड़ाई ल़ड़ रही है।
वहीं दूसरी ओर ओमप्रकाश चौटाला के दोनों बेटे अभय और अजय चौटाला अलग हो चुके हैं। अजय चौटाला के बेटे दुष्यंत जननायक जनता पार्टी के बैनर के तले चुनाव मैदान में हैं। वहीं इंडियन नेशनल लोकदल पार्टी अभय के नेतृत्व में ओपी चौटाला की विरासत को बचाने के लिए ल़ड़ रही है।
उधर भजनलाल परिवार से भी कुलदीप विश्नोई अस्तित्व बचाने के लिए चुनाव ल़ड़ रहे हैं। 2014 में इस इलाके में ओपी चौटाला की पार्टी इनेलो को अच्छी सीटे मिली थीं। इनेलो को मिली कुल 19 सीटों में से ज्यादातर सीटें इसी इलाके में थीं। इस इलाके में जाट प्रभावी वोटर है।
अब सवाल यही उठ रहा है कि इस इलाके में सबसे ज्यादा मजबूत माने जाने वाले जाट वोट कांग्रेस, इनेलो और जननायक जनता पार्टी के बीच विभाजित होंगे ये एकजुट होकर किसी उस दल को जाएंगे जो भाजपा को हराने में सक्षम होगी? इस इलाके के कई सीटों पर जननायक जनता पार्टी मजबूत होकर लड़ रही है।
दूसरी तरफ एक खबर यह भी आ रही है कि जाट वोट भाजपा को परास्त करने के लिए पूरी तरह से कांग्रेस की तरफ शिफ्ट हो सकती है? खबर ये भी आ रही है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा और चौटाला परिवार में एक सहमति बन चुकी है? अभय चौटाला अपने वोट कांग्रेस की तरफ ट्रांसफर करवा सकते हैं। इससे उनके दो उद्देश्य तय होंगे। एक तो दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी हारेगी और भाजपा की हार भी तय होगी।
जाट वोट एक तरफ जाने के संकेत
जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है जाट वोटों में भाजपा के खिलाफ एकजुटता के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल, 2016 के जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा का प्रभाव अब चुनाव में भी दिख रहा है। इसलिए भाजपा गैर जाट वोटरों को एकजुट होकर मतदान केंद्र पर ले जाने की रणनीति में लगी हुई है। स्थानीय तौर पर भाजपा जाट बनाम गैर जाट की गोलबंदी में लग भी गई है। जाट समुदाय एक दल को वोट देंगे इसके संकेत सोनीपत के राई विधानसभा से मिले है।
राई से इनेलो के प्रत्याशी इंद्रजीत दहिया ने कांग्रेस के जयतीर्थ दहिया को समर्थन दे दिया है। हालांकि इनेलो ने इंद्रजीत दहिया पर बिकने का आऱोप लगाया। लेकिन राजनीतिक सूत्रों के अनुसार ओमप्रकाश चौटाला और भूपेंद्र हुड्डा के बीच अंदर खाते पैक्ट हो गया है, इंद्रजीत दहिया अपने लीडरों के इशारे पर ही कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं।
कई विधानसभा क्षेत्र जहां दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी मजबूती से लड़ने का दावा कर रही हैं, वहां जाट समुदाय आकलन कर रहा है कि कांग्रेस या जननायक जनता पार्टी में मजबूत कौन है। अंत में जिसका पलड़ा भारी होगा उधर जाट वोट जाएगा।
गैर भाजपाई और चुनावी विशलेषक बच रहे हैं भविष्यवाणी से
इधर, भाजपा डंके के चोट पर 75 सीट का दावा कर रही है। चुनावी सर्वे भी भाजपा की जीत का दावा कर रहे है। उधर लोकसभा चुनाव में भाजपा की जोरदार सफलता ने राजनीतिक चिंतकों और विश्लेषक पत्रकारों को भविष्यवाणी करने से बचा रखा है। कांग्रेस और तमाम भाजपा विरोधी दल किसी भी भविष्यवाणी से बच रहे है।
हालांकि स्थानीय पत्रकार मान रहे हैं कि राज्य सरकार के प्रति युवाओं और किसानों में भारी रोष है, इसलिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेंद्र मोदी और अमित शाह लगातार चुनावों में धारा 370 की बात कर रहे है। लेकिन कई सीटों पर कांग्रेस ने कुछ इस तरह के जातीय समीकरण फिक्स किए हैं, इससे भाजपा की मुश्किलें ब़ढ़ी हैं। पंचकूला जिले के सारी सीटों पर कांग्रेस भाजपा को परेशान कर दिया है। वहीं अंबाला कैंट और अंबाला शहर जैसी सीटों पर भाजपा मजबूत नजर आ रही है।
यमुनगर, कुरूक्षेत्र, करनाल और पानीपत जिले में ग्रामीण इलाकों मे भाजपा के प्रति युवाओं और किसानों में नाराजगी है। इससे भाजपा नेता चिंतित जरूर नजर आ रहे है। लेकिन उन्हें गैर जाट गोलबंदी और मोदी के करिश्मा पर भरोसा है। भाजपा नेताओं के अनुसार ग्रामीण इलाकों मे जाटों के भय से दलित और पिछड़ी जातियां भाजपा को ही वोट देंगी, क्योंकि कांग्रेस आएगी तो भूपेंद्र सिंह हुडडा मुख्यमंत्री बन जाएंगे।
इसे गैर जाट कभी भी बरदाश्त नहीं करेगा। इसमें कोई शक नहीं है कि गैर जाट वोटरों की संख्या उतर हरियाणा और जीटी रोड बेल्ट में भाजपा की हार जीत तय करेगी। अगर गैर जाट वोटर बेरोजगारी और किसानी की बुरी हालत पर विभाजित हो गई तो भाजपा से खासी सीटें कांग्रेस छीन लेगी। अगर जाटों के भय ने गैर जाट वोटरों को इकट्ठा कर दिया तो भाजपा भारी संख्या में सीटें इस इलाके में ले जाएगी।
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