गुरु नानक देव जयंती विशेष
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आडंबर-अंधविश्वास के घोर विरोधी
गुरु नानक जी ने भ्रम, आडंबर, अंधविश्वास का भी भरपूर खंडन किया है। मानवता के लिए गुरु नानक ने काम, क्रोध, लोभ मोह, अहम्, आदि अवगुणों को त्याग कर सच, संतोष, दया, धर्म व धीरज आदि सदगुणों को अपनाने का संदेश दिया, क्योंकि इससे ही इंसान, इंसान के नजदीक आता है।
गुरु नानक जी ने तो जनेऊ धारण करने से भी इंकार कर दिया था। बचपन में जब गुरु नानक जी को जनेऊ धारण करवाया जाने लगा तो उन्होंने भरी सभा में ऐसे जनेऊ की मांग की जो दया से भरपूर हो, सब्र, संयम का हो जो न कभी टूट सके न जल सके, न कभी मैला हो सके। उनके कुल पुरोहित पंडित हरदयाल ने कहा कि यह जनेऊ धारण करना उच्च जाति की निशानी है और यह लोक प्रलोक में भी रक्षा करता है।
9 साल की छोटी सी आयु में जब गुरु नानक देव जी ने कहा की यदि इतने सारे गुण इसमें हैं तो इस जनेऊ को सबसे पहले मेरी बहन नानकी के गले में डाला जाए क्योंकि वह मेरे से पांच वर्ष बड़ी हैं यह सुनकर उस सभा में सन्नाटा छा गया हर कोई यह सुनकर हैरान था। तभी पीछे से आवाज़ें आई की नहीं-नहीं इसे केवल मर्द ही पहन सकते हैं, औरतें नहीं, तो गुरु नानक जी ने सीधे कहा की जो कच्चा धागा औरत-पुरुष व जाति प्रथा में ऊंच-नींच का भेदभाव पैदा करता हो वह उसे कभी धारण नहीं करेंगे।
भेदभाव के खिलाफ उठाई आवाज
आज हमारे समाज में धर्म कर्म के मामले में महिलाओं से भेदभाव किया जाता है, गुरु नानक देव जी प्रथम शख्सियत थे जिन्होंने इस भेदभाव के खिलाफ़ खुलकर आवाज़ उठाई। वहीं जिस जातपात से आज भी हमारा समाज जूझ रहा है उसी जातपात व ऊंच-नीच के बंधनों को तोड़ने के लिए गुरु नानक देव जी ने उस समय नीच जाति कही जानी वाली मरासी जाति से संबंधित भाई मरदाने को अपना साथी व भाई माना। गुरु ग्रंथ साहिब में भी समानता की इस वाणी का जिक्र मिलता है
अविल अल्लाह नूर उपाए, कुदरत दे सब बंदे।।
एक नूर ते सब जग ऊपजया कौन भले कौन मंदे।।
17 वर्ष की आयु में नानक जी के पिता ने व्यापार करने के लिए 20 रुपये दिए। नानक अपने पड़ोसी मित्र बाला के साथ व्यापार के लिए निकल गए। रास्ते में एक स्थान पर उन्हें भूखे साधु महात्मा मिले नानक ने पिता जी के द्वारा दिए 20 रुपये से राशन खरीद कर उन साधुओं को भिजवा दिया और खुद खाली हाथ घर लौट आए। घर वापसी पर पिता जी से डांट भी खाई लेकिन उन्होंने कहा कि पिता जी आपने ही कहा था की सच्चा सौदा करना है और इससे सच्चा व खरा सौदा और क्या हो सकता है।
गुरु नानक देव जी ने पुजारीवाद व ब्राह्मणवाद का भय लोगों में से दूर किया। इन्होंने मौलवियों, जोगियों, पीरों, अंहकारी राजाओं और पाखंडियों को मुंह पर खरी खोटी सुनाकर आम लोगों के दिलों दिमाग में से इनका भय दूर किया। गुरु नानक देव जी की और भी बहुत शिक्षाएं व उपदेश हैं जिन्होंने पूरी मानव जाति की भलाई के लिए कार्य किया।
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