ताजुद्दीन नक्शबंदी एक फ़ारसी/अरबी का लेखक थे। वे गुरु नानक देव कि मध्य-पूर्व यात्रा के दौरान उनके साथ कि दो साल साथ रहे थे।
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ताजुद्दीन नक्शबंदी एक फ़ारसी/अरबी का लेखक थे। वे गुरु नानक देव कि मध्य-पूर्व यात्रा के दौरान उनके साथ कि दो साल साथ रहे थे। वे हर दिन कि डायरी भी लिखते थे। उनकी वह पांडुलिपि सं 1927 में मदीना की एक लायब्रेरी में मिली थी। ताजुद्दीन कि इस पांडुलिपि को मुश्ताक हुसैन शाह ने सं 1927 में खोजा था। बाद में वे सिख बन गए और प्रसिद्ध सिख गुरु संत सैयद प्रितपाल सिंह (1902-1969 ) के नाम से जाने गए।
इस पांडुलिपि में बताया है कि संत नानक दजला नदी के किनारे चलते हुए कुफा होते हुए कैकई शहर में पहुंचे थे। वहां के खलीफा या सुलतान माहिरी करू के आध्यात्मिक सलाहकार पीर जलाल ने सबसे पहले नानकदेव के अरबी में शब्द सुने, फिर उनसे अनुरोध किया कि वे उनके जिद्दी और क्रूर खलीफा कि सही राह बताएं। कहते हैं कि नानक देव की वाणी का खलीफा पर ऐसा असर हुआ कि उसने बाबा नानक को अपने महल में ठहराया।
भारत, सिख मत और गुरु नानक देव की स्मृतियों के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण स्थान है और भारत सरकार को इस स्थान पर गुरु नानक देव के स्थल पर विशेष प्रदर्शनी के लिए इजिप्ट सरकार से बात करनी ही होगी, जब इजिप्ट सरकार को महसूस होगा कि इससे सिख पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तो निश्चित ही वह इसके लिए तैयार होगी, क्योंकि इजिप्ट की अर्थव्यवस्था का आधार पर्यटन ही है। काश भारत सरकार इजिप्त सरकार से बात कर इसे सिखों के पवित्र स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए कार्यवाही करें।
इजिप्ट यानी मिस्र की राजधानी काहिरा या कायरो अरब- दुनिया का सबसे बड़ा शहर है।
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इजिप्ट यानी मिस्र की राजधानी काहिरा या कायरो अरब- दुनिया का सबसे बड़ा शहर है। 90 लाख से अधिक आबादी का। यहां ईसाइयों की बड़ी आबादी है, कोई बारह फीसदी, लेकिन हिन्दू-सिख-जैन-बौध अर्थात भारतीय मूल के धर्म अनुयायी दीखते नहीं हैं, या तो नौकरी करने वाले या फिर अस्थायी रूप से लिखने-पढ़ने आये लोग ही गैर मुस्लिम-ईसाई मिलते हैं। ऐसा नहीं कि वहां हिन्दू धर्म के बारे में अनभिज्ञता है, वहां हिंदी फ़िल्में बेहद लोकप्रिय हैं और हर दूसरा आदमी यह जानने को जिज्ञासु रहता है कि हिन्दू महिलाएं बिंदी या मांग क्यों भरती हैं। भारत का भोजन या संस्कार क्या-क्या हैं। कई लोग ऐसे भी मिलेंगे जिनकी तीसरी पीढ़ी सिख थी और बाद में वे मुसलमान हो गए।
आज सीटाडेल एक व्यस्त पर्यटन स्थल है। यहां कि एक मस्जिद में भारत से लाए गए चन्दन की छत अभी भी खुशबु देती है और यह बात वहां के गाइड बताते हैं लेकिन कोई भी बाबा नानक कि स्मृति के बारे में जानता नहीं।
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