कब उदासीनता छोड़ेगा समाज और होगा जागरूक
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कब उदासीनता छोड़ेगा समाज?
जिंदगी से बढ़कर सेल्फी और वीडियो को महत्व देना किसी की जिंदगी को बचाने के बजाय खुद की जिंदगी को भी खतरे में डाल सकता है। शायद ! ये हम भूलते जा रहे हैं। लोगों की इस उदासीनता के बाद हादसा के घटित होने की बड़ी बजह लापरवाही है। कोई भी छोटा या बड़ा हादसा बिना लापरवाही के अंजाम नहीं लेता है। सूरत के कॉम्प्लेक्स के भूतल पर लगी आग इसलिए चौथी मंजिल तक जा पहुंची की वहां आग को काबू करने या उसे बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र जैसी सुविधा का अभाव था।
यदि भूतल पर शार्ट सर्किट से लगी आग को अग्निशमन यंत्र से बुझा दिया जाता तो इस बड़े हादसे को टाला जा सकता था। लेकिन दुर्भाग्यवश आग को नियंत्रित करने की समुचित व्यवस्था नहीं होने के चलते एक छोटे से शार्ट सर्किट ने भीषण आग का रूप लेकर कई घरों के चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया।
आवश्यकता है कि इस हादसे के दोषी कॉम्प्लेक्स के मालिक, कोचिंग शिक्षकों सहित इससे जुड़े व्यक्तियों को दंडित किया जाना चाहिए, जिन्होंने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम की परवाह किए बगैर ही कोचिंग संस्थान को संचालित होने दिया।
बहरहाल, सरकार को बहुमंजिला इमारतों में होने वाले आग के हादसों को लेकर जीवनरक्षा के लिए बेहतर उपाय तलाशने होंगे, यही वक्त का तकाजा भी है। प्रत्येक भीषण से भीषण हादसा इस तरह के भीषण हादसों से बचने के लिए और अपने जीवन को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा सबक है। बेशर्त हम हादसों से सबक लेना सीख लें।
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