इसका सीधा मतलब है-स्वच्छ बिजली की बर्बादी और देश को नुकसान। ग्रिड मजबूत है, लेकिन ट्रांसमिशन में असंतुलन और दबाव बढ़ गया है। यह सच है कि भारत का राष्ट्रीय बिजली ग्रिड दुनिया के सबसे बड़े और मजबूत ग्रिड़ों में से एक है। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने वर्षों तक देश को जोड़ने वाली बिजली लाइनों का मजबूत जाल खड़ा किया है। इसमें उनकी भूमिका सराहनीय रही है। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। आज नवीकरणीय परियोजनाएं बहुत तेजी से बन रही हैं। एक साथ कई राज्यों में काम चल रहा है। कई बड़े प्रोजेक्ट एक-दूसरे पर निर्भर है।
ऐसे में अगर किसी एक लाइन या परियोजना में देरी हो जाए, तो उसका असर कई बिजलीघरों पर पड़ता है। यह किसी एक संस्था की कमी नहीं, बल्कि काम के बढ़ते बोझ की हकीकत है। कई कारणों से पावर ग्रिड कॉपोर्रेशन को 50 से अधिक काम मिला हुआ है, जबकि अन्य कई ट्रांसमिशन कंपनियों के पास अधिक काम नहीं है, और असंतुलन बना हुआ है।
जमीन और अनुमति की मुश्किलें
ट्रांसमिशन लाइन बनाना आसान नहीं है इसके लिए किसानों की जमीन से लाइन निकालनी पड़ती है। जंगल और पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी लेनी होती है। कई जिलों और राज्यों से होकर लाइन जाती है। हर जगह अलग नियम और अलग प्रक्रिया होती है। इसी कारण कई बार ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट एक-दो साल तक लेट हो जाते हैं।
आखिर नुकसान किसका होता है?
जब बिजलीघर तैयार हैं, लेकिन लाइन नहीं, तो बिजली बनाने वालों को आर्थिक नुकसान होता है। निवेश करने वाले हिचकिचाने लगते हैं और आम आदमी तक सस्ती, साफ बिजली नहीं पहुंच पाती। कुछ कंपनियों ने तो नियामक आयोग में यह दावा किया है कि ट्रांसमिशन में देरी और कर्टेलमेन्ट से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
समाधान क्या है?
इस समस्या का हल समय रहते निकाला जा सकता है। पहला, काम का बंटवारा-जहां संभव हो, ट्रांसमिशन के काम में ज्यादा कंपनियों को मौका मिले, ताकि काम का बोझ बंटे और देरी कम हो। प्रतिस्पर्धा के लिए भी यह आवश्यक है। दूसरा, जल्दी मंजूरी-जमीन और अन्य अनुमतियों के लिए एक ही जगह से, तय समय में मंजूरी की व्यवस्था हो।
तीसरा, पहले से तैयारी-जहां बड़े सोलर या पवन पार्क बनने हैं, वहां ट्रांसमिशन लाइन का काम पहले या साथ-साथ शुरू हो। चौथा, स्थानी उपाय-बैटरी स्टोरेज और बेहतर प्रबंधन से कुछ बिजली को वहीं इस्तेमाल या सुरक्षित किया जा सकता है।
निष्कर्षः हरित ऊर्जा भारत के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है लेकिन सिर्फ बिजली बनाना ही काफी नहीं, उसे सही समय पर सही जगह पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। यह समय आरोप लगाने का नहीं, बल्कि देश के हित में मिलकर समाधान खोजने का है, ताकि किसानों की जमीन का सही इस्तेमाल हो, निवेशकों का भरोसा बना रहे और आम आदमी तक सस्ती और साफ बिजली पहुंच सके। जब ट्रांसमिशन ग्रिड मजबूत और सुचारू होगा, तभी हरित भारत और देश के तीव्र विकास का सपना सच होगा।
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