65 वर्षीय बेनी पाल सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी हैं, जिनकी जिंदगी पोती रिया के इर्द-गिर्द घूमती है। रिया अभी चार साल की है, पर उसकी आंखों में डॉक्टर बनने का सपना चमकता है। बेनी बाबू की आखिरी इच्छा है-पोती की उच्च शिक्षा के खर्च का इंतजाम। यह कहानी अकेले बेनी बाबू की नहीं, बल्कि उन लाखों दादा-दादियों की है, जो अपने नौनिहालों के सपनों को साकार करना चाहते हैं...
बच्चों के लिए शिक्षा योजना जरूरी
शिक्षा की बढ़ती लागत व वित्तीय जागरूकता बढ़ने से अब बुजुर्ग पारंपरिक उपहार, जैसे-नकद या सोना देने के बजाय बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए निवेश करने पर विचार करने लगे हैं। वे अपनी बचत या रिटायरमेंट फंड का कुछ हिस्सा शिक्षा के लिए खर्च कर परिवार की विरासत को मजबूत कर सकते हैं।
बुजुर्गों के लिए जरूरी तैयारियां
सबसे पहले अपनी वित्तीय स्थिति का मूल्याकंन करें। अपनी आय (पेंशन, ब्याज, किराया आदि), संपत्ति और नियमित खर्चों की सूची बनाएं। देखें कि कितनी राशि निवेश के लिए उपलब्ध है। यह भी सुनिश्चित करें कि आपके पास 12 महीने के जरूरी खर्च के बराबर पैसे अलग रखे हों, ताकि अप्रत्याशित खर्च से एजुकेशन फंड प्रभावित न हो।
महंगाई को न करें नजरअंदाज
उच्च शिक्षा की योजना बनाते समय महंगाई को नजरअंदाज न करें, क्योंकि ट्यूशन फीस, किताबें, रहने-खाने की लागत सामान्य महंगाई से कहीं तेजी से बढ़ रही है, जिससे उच्च शिक्षा, खासकर विदेश में पढ़ाई और भी महंगी हो जाती है। इसे ध्यान में न रखने पर पढ़ाई के लिए निवेश किया गया पैसा कम भी पड़ सकता है।
भविष्य का सोचकर योजना बनाएं
आज मेडिकल की पढ़ाई पर जितना खर्च आ रहा होगा, पांच या 10 साल बाद वह उससे कहीं ज्यादा होगा। उदाहरण के लिए, अगर आज एमबीबीएस की पढ़ाई का खर्च एक करोड़ रुपये आ रहा है, तो 17-18 साल की उम्र में जब रिया दाखिला लेगी, तो यह खर्च महंगाई के साथ बढ़ते-बढ़ते करीब 3.45 करोड़ रुपये हो चुका होगा।
किसके नाम पर करें निवेश
बेनी बाबू के पास पोती के लिए निवेश के दो तरीके हैं। उसके नाम से बैंक खाता खोलें। पैसे ट्रांसफर करके चुने हुए फंड में निवेश करें। 18 साल की उम्र में पूरा अधिकार उसे मिल जाएगा। दूसरा, खुद के नाम से निवेश करें और इसे पोती की पढ़ाई के लिए अलग से चिह्नित करें। बच्ची को नॉमिनी नियुक्त करें, ताकि आपकी अनुपस्थिति में भी उसे पैसे मिल सकें। बाजार की स्थिति को देखते हुए कुछ पैसा आप एकमुश्त और बाकी को एसआईपी के जरिये निवेश कर सकते हैं। 5-7 साल या उससे ज्यादा के लिए इक्विटी फंड, 3-5 साल के लिए हाइब्रिड फंड और छोटी अवधि के लिए डेट फंड या सावधि जमा (एफडी) का रुख कर सकते हैं।
म्यूचुअल फंड या पारंपरिक निवेश?
माईवेल्थग्रोथ डॉट कॉम के सह-संस्थापक हर्षद चेतनवाला बताते हैं कि बेनी पाल जी की पोती के कॉलेज शुरू करने में अभी 13-14 साल का वक्त है। ऐसे में, इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए। इक्विटी से असहज हैं, तो एग्रेसिव हाइब्रिड फंड अच्छा विकल्प हो सकता है। 15 साल में उतार-चढ़ाव आएंगे, पर डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो रखने से अच्छा रिटर्न मिलेगा, बशर्ते पूरी अवधि तक निवेशित रहें और उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं।
एसएसवाई कब चुनें?
बच्ची की पढ़ाई और शादी के लिए सरकार समर्थित सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) चर्चित स्कीम है। चेतनवाला कहते हैं कि निवेश पर कम से कम जोखिम लेने वाले इसमें निवेश कर सकते हैं। यह टैक्स के नजरिये से भी बेहतर विकल्प हो सकता है। इसमें रिटर्न पूरी तरह से टैक्स फ्री है। हालांकि, लॉक-इन पीरियड का ध्यान रखना जरूरी है।
सुकन्या खाता खुलने के 21 साल बाद मैच्योर होता है। बच्ची के 18 साल के पूरा होने पर पढ़ाई के लिए सिर्फ 50 फीसदी पैसा ही निकाल पाएंगे। पर 25 वर्ष तक उच्च शिक्षा जारी रहने पर बाकी 50 फीसदी हिस्सा काम आ सकता है या परिपक्वता पर विवाह अथवा अन्य कामों में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इक्विटी के साथ कुछ पैसा सुरक्षित विकल्प में डालने की सोच रहे लोग भी इसे चुन सकते हैं।
नियमित समीक्षा जरूरी
मुद्रास्फीति, बाजार की स्थिति और खर्चों में बदलाव के आधार पर निवेश की समीक्षा जरूर करें। अगर जरूरी हो, तो निवेश बढ़ाएं या स्विच करें। उदाहरण के लिए, वित्तीय लक्ष्य के करीब होने पर निवेश को इक्विटी से डेट में शिफ्ट करना। निवेश के लिए वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
सेवा भारती में बुजुर्गों को स्वास्थ्य संबंधी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। डायलिसिस जैसी बेहद जरूरी चिकित्सा सुविधा भी जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध कराई जाती है। जिन बुजुर्गों को सुनने में समस्या होती है, उनके लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श की व्यवस्था की जाती है। थैलेसीमिया जैसे गंभीर रक्त रोग संबंधी समस्या के प्रति जागरूकता और उपचार सहायता हेतु समय-समय पर जांच व परामर्श शिविरों का आयोजन भी किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट sewabhartidelhi.org या info@sewabhartidelhi.org पर ई-मेल करके संपर्क कर सकते हैं।
द सेकंड इनिंग होम बेसहारा और निराश्रित बुजुर्गों के लिए समर्पित एक सेवा परियोजना है, जिसका उद्देश्य उन्हें सम्मानित, सुरक्षित और स्नेहपूर्ण जीवन प्रदान करना है। यहां बुजुर्गों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और आरामदायक आवास, पौष्टिक व संतुलित भोजन की नियमित व्यवस्था रहती है। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट durgaoldagehome.com/home-1 या 9999662245 पर संपर्क कर सकते हैं।