कंपनियों का वनों की कटाई से सीधा संबंध होता है।
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रिपोर्ट के मुताबिक ये कंपनियां जिन वस्तुओं का उपयोग करती हैं उनसे वनों की कटाई का सीधा संबंध हैं। उदाहरण के लिए चॉकलेट में मिलाए जाने के लिए पाम ऑयल, जूते के लिए चमड़े, पिज्जा बॉक्स के लिए कागज और फर्नीचर के लिए लकड़ी।
इन कंपनियों की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करते हुए, रिपोर्ट बताती है कि वनों की कटाई की समस्या को हल करने के लिए कार्रवाई का स्तर अपर्याप्त है। लगभग 450 कंपनियों और 50 से अधिक सरकारों ने 2020 तक वनों की कटाई को समाप्त करने का वादा किया है, लेकिन आज तक उद्योग की कार्रवाई वनों की कटाई रोकने का लक्ष्य हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इन कंपनियों ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से कहा कि यह समय सीमा समाप्त हो जाएगी।
रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक वन हानि प्रतिवर्ष 5 मिलियन हेक्टेयर या प्रति मिनट 15 फुटबॉल पिचों की दर से जारी है, जो दुनिया के पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु के लिए गंभीर खतरा पैदा करने वाली है। रिपोर्ट कहती है कि आईपीसीसी की 1.5°C पर विशेष रिपोर्ट में जंगलों को कार्बन सिंक के रूप में उपयोग करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है, जलवायु संकट को दूर करने के लिए इस दिशा में काम करना जरूरी है।
सीडीपी के वैश्विक वन निदेशक, मॉर्गन गिलेस्पी कहते हैं कि उनके डेटा से पता चलता है कि कंपनियां वनों की कटाई को खत्म करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही हैं। इस बीच सैकड़ों उच्च-प्रभाव वाली कंपनियों ने सीडीपी के माध्यम से खुलासा नहीं किया है और इसलिए इस रिपोर्ट में विश्लेषण नहीं किया गया है। हो सकता है कि ये कंपनियां जोखिम के एक ब्लैक बॉक्स पर बैठी हों, और उनके निवेशकों, ग्राहकों और अंतिम उपभोक्ताओं को पता नहीं है, लेकिन वे तेजी से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
बड़ी कंपनियां पर्यावरण प्रदूषण की चिंताओं को अनदेखा करती रही हैं।
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गिलेस्पी कहते हैं कि जब वनों की कटाई के लिए कॉरपोरेट प्रतिक्रिया की बात आती है, यह बड़ी कंपनियां तो मौन और बहरी हो जाती हैं। कॉरपोरेट्स ने बहुत लंबे समय तक दुनिया के जंगलों पर अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं के प्रभावों को अनदेखा किया है और इस जोखिम, जो उनके व्यवसाय और दुनिया दोनों के लिए है, को गंभीरता से नहीं लिया है।
गिलेस्पी कहते हैं कि दुनिया भर में पर्यावरणीय चिंता एक उच्च स्तर पर है, और कंपनियों को पारदर्शी होने और जंगलों की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करने की मांग की जा रही है। उपभोक्ता तेजी से जानना चाहते हैं कि उनकी खरीदारी की टोकरी अमेज़ॅन के विनाश, ऑरंगुटनों के विलुप्त होने और जलवायु संकट को तो नहीं बढ़ा रही है। वह कहते हैं ऐसे व्यवसाय, जो बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना चाहते हैं, उन्हें अपने ग्राहकों, निवेशकों और उपभोक्ताओं की आवाज सुनने की आवश्यकता है - अन्यथा वे प्रतिक्रियास्वरूप ढेर हो सकते हैं।
जाहिर सी बात है भारत में ग्रामीण घरों में चूल्हे पर पकने वाले भोजन को लेकर तथाकथित सभ्य और विकसित कॉरपोरेट्स ने बहुत हल्ला मचाया था कि इससे पर्यावरण का नुकसान हो रहा है, लेकिन अब उनके ही संगठन बता रहे हैं कि पर्यावरण और जंगलों को खतरा इन कॉरपोरेट्स से ही है।
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