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जी 20 शिखर सम्मेलन 2023: जी 20 घोषणा पत्र भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का द्योतक

सार

G20 के इस शिखर सम्मेलन ने भारत को विश्व के लिए एवं विश्व को भारत के लिए तैयार करने में सराहनीय भूमिका निभाई है। भारत मानता है कि महामारी के बाद की विश्व व्यवस्था इसके पूर्व की विश्व व्यवस्था से भिन्न होनी चाहिए।
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सभी सदस्य देशों द्वारा दिल्ली घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत की अध्यक्षता में दिल्ली के भारत मंडपम में G20 का शिखर सम्मेलन उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा। देश के यशस्वी, ऊर्जावान एवं दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में इस सम्मेलन ने बुलंदियों का नया आसमान छुआ। भारत की कूटनीतिक सफलता का ही परिणाम है कि सभी सदस्य देशों द्वारा दिल्ली घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया एवं विश्व की 85 प्रतिशत जीडीपी वाले अफ्रीकन यूनियन के G20 समूह में प्रवेश सहित ग्लोबल साउथ की आवश्यकताओं पर ध्यान देने पर सहमति बनी। पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रम एवं भविष्य की राह की दृष्टि और व्यापक मानवतावादी वैश्विक दृष्टिकोण के कारण इस घोषणापत्र की प्रासंगिकता बढ़ जाती है।

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ध्यातव्य है कि पूर्व में रूस-यूक्रेन के विषय को लेकर इस घोषणा-पत्र को स्वीकार्यता मिलने में समस्या आ रही थी। इस गतिरोध को दूर करने हेतु भारत ने कूटनीति का परिचय देते हए घोषणा-पत्र के पैराग्राफ में ऐसे परिवर्तन किए जिससे इसे सहजता से स्वीकृति मिली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद एवं संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्तावों पर अपने राष्ट्रीय रुख को दोहराते हुए इस बात पर विशेष बल दिया कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों के अनुरूप ही आगे बढ़ना चाहिए। साथ ही सभी को अन्य देशों की अखंडता एवं संप्रभुता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विपरीत अधिग्रहण की धमकी या शक्ति के प्रयोग से बचना चाहिए। भारत ने स्पष्ट किया कि परमाणु हथियारों का उपयोग या उपयोग की धमकी देना भी कतई स्वीकार्य नहीं है।

 

आर्थिक मोर्चे की बात करें तो G20 सदस्यों की अर्थव्यवस्था को गति देने एवं टिकाऊ आर्थिक सुधार लाने हेतु निजी उद्यमशीलता की भूमिका पर सहमति बनी है। भारत की दृष्टि से देखें तो भारत, मिडिल ईस्ट एवं यूरोप के बीच व्यापारिक कॉरिडोर की संकल्पना साकार होने से भारत के व्यापार एवं अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व गति आएगी।

इसके इतर G20 सदस्यों ने विकासशील देशों में निवेश परियोजनाओं हेतु निजी क्षेत्रों की भूमिका को रेखांकित किया है। साथ ही वैश्विक स्तर पर आर्थिक असमानता दूर करने एवं टिकाऊ, संतुलित, सर्वसमावेशी, दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता हेतु व्यापक आर्थिक एवं संरचनात्मक नीतियों को लागू करने पर सहमति बनी है। फलतः समान विकास को बढ़ावा मिलेगा एवं व्यापार, आर्थिक एवं वित्तीय स्थिरता की मजबूती से कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा होगी।

 

प्रधानमंत्री मोदी कि ने दोहराया G20 की हमारी अध्यक्षता का संदेश है 'एक पृथ्वी, एक कुटुम्ब एवं एक साझा भविष्य’। अतः G20 घोषणा-पत्र सतत, सर्वसमावेशी, प्रकृति-केन्द्रित विकास के मॉडल पर आधारित है। इसमें विकास हेतु सतत हरित मार्ग की परिकल्पना की गई है। इसी के अंतर्गत भारत की पहल पर विश्व जैव ईंधन गठबंधन की शुरुआत भी हुई।

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शीर्ष नेताओं ने जलवायु मोर्चे सहित विश्व के समक्ष उपस्थित विभिन्न चुनौतियों से निपटने हेतु तत्काल पहल करने का आह्वान किया। निकट भविष्य में ग्लोबल वार्मिंग के विरुद्ध वैश्विक मुहिम के लिए व्यापक रणनीति जैसे इस हेतु वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने आदि पर सहमति बनी है।

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जी20 शिखर सम्मेलन ने भारत को विश्व के लिए एवं विश्व को भारत के लिए तैयार करने में सराहनीय भूमिका निभाई - फोटो : सोशल मीडिया
घोषणा की गई कि हम सब आर्थिक विकास एवं पर्यावरण की क्षति के मध्य संतुलित जलवायु एजेंडे के साथ धरती की सुंदरता एवं जीवन की गरिमा सुनिश्चित करेंगे। घोषणापत्र में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने के साथ ही प्रौद्योगिकी की समावेशी भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े फायदे एवं नुकसान को ध्यान में रखते हुए नवोन्मेष समर्थक व्यवस्था को अपनाने पर जोर दिया गया जिससे वह ज्यादा उपयोगी हो सके।

आतंकवाद एवं वैश्विक भ्रष्टाचार को खत्म करने, पारंपरिक विरासत को संभालने तथा गुणवत्तापरक शिक्षा के तीव्र प्रसार के प्रयासों पर भी भारत की पहल को स्वीकारता मिली है। भारत ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति में सर्वथा सक्षम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिवर्तनकारी पहलुओं से सदस्य देशों को परिचित करवाया। सभी ने माना कि शिक्षा में सृजनात्मकता, तर्कसंगत सोच, अनुसंधान, कौशल विकास, उद्यमिता, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन को बढ़ावा देकर शिक्षा के नूतन लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे।
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नोट: लेखक पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा के कुलपति हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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