जी20 शिखर सम्मेलन ने भारत को विश्व के लिए एवं विश्व को भारत के लिए तैयार करने में सराहनीय भूमिका निभाई
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घोषणा की गई कि हम सब आर्थिक विकास एवं पर्यावरण की क्षति के मध्य संतुलित जलवायु एजेंडे के साथ धरती की सुंदरता एवं जीवन की गरिमा सुनिश्चित करेंगे। घोषणापत्र में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने के साथ ही प्रौद्योगिकी की समावेशी भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े फायदे एवं नुकसान को ध्यान में रखते हुए नवोन्मेष समर्थक व्यवस्था को अपनाने पर जोर दिया गया जिससे वह ज्यादा उपयोगी हो सके।
आतंकवाद एवं वैश्विक भ्रष्टाचार को खत्म करने, पारंपरिक विरासत को संभालने तथा गुणवत्तापरक शिक्षा के तीव्र प्रसार के प्रयासों पर भी भारत की पहल को स्वीकारता मिली है। भारत ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति में सर्वथा सक्षम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिवर्तनकारी पहलुओं से सदस्य देशों को परिचित करवाया। सभी ने माना कि शिक्षा में सृजनात्मकता, तर्कसंगत सोच, अनुसंधान, कौशल विकास, उद्यमिता, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन को बढ़ावा देकर शिक्षा के नूतन लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे।
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नोट: लेखक पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा के कुलपति हैं।
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