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दूसरा पहलू: डिब्बाबंद फल-सब्जियां और सेहत का सवाल, क्या कहती है रिसर्च?

मार्ग्रेट मरे Published by: Devesh Tripathi Updated Thu, 16 Jul 2026 06:48 AM IST

सार

आजकल फ्रोजन व डिब्बाबंद फल-सब्जियों का चलन आम हो गया है। ऐसे में, सवाल यह है कि क्या इनसे पर्याप्त पोषण मिलता है।
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डिब्बाबंद फल-सब्जियां - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


ये अक्सर ताजी उपज की तुलना में किफायती होती हैं, लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं और पहले से कटी-छंटी होने के कारण खाना बनाने में समय भी बचाती हैं। अच्छी बात यह है कि ऐसे उत्पाद अपने अधिकांश पोषक तत्वों को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। कई बार इनका पोषण स्तर उन ताजे फलों और सब्जियों के बराबर होता है, जो कई दिनों तक फ्रिज में रखे गए हों। हालांकि, इनका सही इस्तेमाल भी जरूरी है। फ्रोजन खाद्य पदार्थों को बार-बार पिघलाकर दोबारा जमाने से उनकी गुणवत्ता व पोषण, दोनों प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, आधुनिक तकनीकों ने इस नुकसान को काफी कम कर दिया है। कैन्ड उत्पाद खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ें। कम सोडियम या ‘नो एडेड सॉल्ट’ वाले विकल्प चुनें और उपयोग से पहले कैन्ड सब्जियों को पानी से धो जरूर लें, ताकि अतिरिक्त नमक निकल जाए। इसी तरह फलों के लिए ऐसे उत्पाद बेहतर हैं, जो शरबत के बजाय प्राकृतिक फलों के रस में पैक किए गए हों या जिन पर ‘नो एडेड शुगर’ लिखा हो। फ्रोजन मटर, ब्रोकली और अन्य सब्जियां कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाती हैं। वहीं कैन्ड बीन्स, चने और मसूर सलाद, करी और पास्ता जैसे व्यंजनों का पोषण बढ़ाने का आसान तरीका हैं। यदि कम बजट में अधिक पौष्टिक भोजन चाहिए, तो सूखे चने, राजमा, बीन्स और मसूर भी बेहतरीन विकल्प हैं। ये लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और प्रोटीन व फाइबर का भरपूर स्रोत हैं।


निष्कर्ष यही है कि सही चुनाव के साथ फ्रोजन और कैन्ड फल-सब्जियां ताजी उपज का पौष्टिक, सुविधाजनक और बजट-अनुकूल विकल्प बन सकती हैं। हालांकि, सूखे मेवों को ताजे फलों का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि इनमें प्राकृतिक शर्करा अधिक सघन होती है। इसलिए, इन्हें सीमित मात्रा में, कभी-कभार नाश्ते के रूप में ही खाना बेहतर है।     

-द कन्वर्सेशन
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