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डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता से वैश्विक भूमिका तक, डिफेंस एक्सपोर्ट में भारत के बढ़ते कदम

सार

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप के 85 से अधिक देशों को रक्षा उत्पादों का निर्यात किया है। इनमें प्रमुख देश हैं: मॉरीशस, सेशेल्स, वियतनाम, फिलीपींस, म्यांमार, नेपाल, भूटान, इंडोनेशिया, श्रीलंका, अर्जेंटीना, मोजाम्बिक, नाइजीरिया, बहरीन, मलेशिया, यूएई, सऊदी अरब, पोलैंड, इक्वाडोर, ब्राजील हैं।
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एलसीए मार्क 1ए फाइटर जेट। - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पिछले कुछ वर्षों में भारत ने डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में जिस तेजी से कदम बढ़ाए हैं, उसका असर अब वैश्विक मंच पर भी दिखने लगा है। रक्षा उत्पादों के आयातक देश से निर्यातक देश बनने की दिशा में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। "मेक इन इंडिया", "आत्मनिर्भर भारत" और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियों ने देश को रक्षा निर्माण और निर्यात में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है।

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डिफेंस एक्सपोर्ट में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का रक्षा निर्यात वित्तीय वर्ष 2017-18 में मात्र 1,521 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में बढ़कर 16,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया। यह लगभग 950% की वृद्धि है, जो यह दर्शाता है कि भारत अब रक्षा निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में एक मजबूत शक्ति के रूप में उभर रहा है।

किन देशों को किया गया निर्यात?

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप के 85 से अधिक देशों को रक्षा उत्पादों का निर्यात किया है। इनमें प्रमुख देश हैं: मॉरीशस, सेशेल्स, वियतनाम, फिलीपींस, म्यांमार, नेपाल, भूटान, इंडोनेशिया, श्रीलंका, अर्जेंटीना, मोजाम्बिक, नाइजीरिया, बहरीन, मलेशिया, यूएई, सऊदी अरब, पोलैंड, इक्वाडोर, ब्राजील हैं।
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कौन-कौन से डिफेंस आइटम निर्यात किए गए?

भारत से निर्यात किए जाने वाले प्रमुख रक्षा उत्पादों में आर्टिलरी गन सिस्टम्स ( धनुष) आकाश मिसाइल प्रणाली, रडार सिस्टम्स (स्वाति रडार), गश्ती नौकाएं और मिसाइल बोट्स, डोर्नियर एयरक्राफ्ट, 'ध्रुव', बुलेटप्रूफ जैकेट्स, हेल्मेट्स, स्मॉल आर्म्स और गोला-बारूद, ड्रोन ,यूएवी आदि शामिल हैं ।

सरकार की नीतियां और प्रोत्साहन

सरकार ने रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की हैं मसलन रक्षा उत्पादन नीति , निजी कंपनियों को प्रोत्साहन, विदेशों में रक्षा अटेचेज़ की नियुक्ति, सिंगल विंडो क्लियरेंस, डिफेंस एक्सपो जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भूमिका

हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड , भारत डायनामिक्स लिमिटेड , भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के साथ-साथ टाटा, एलएंडटी, भारत फोर्ज जैसी निजी कंपनियों ने डिफेंस निर्यात को नया आयाम दिया है।सरकार ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाया है, जिससे निजी कंपनियाँ भी रक्षा उत्पादन और निर्यात में भाग ले सकें।

रक्षा निर्यात से जुड़े लाइसेंस और परमिशन अब सिंगल विंडो सिस्टम से मिल रहे हैं।विदेशों में भारतीय दूतावासों में रक्षा अटेचेज़ की नियुक्ति की गई है, जो वहां के रक्षा आयातकों से संवाद बनाते हैं।

ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात

ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली भारत की रक्षा तकनीक की एक उत्कृष्ट उपलब्धि है। यह सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम "ब्रह्मोस एयरोस्पेस" द्वारा विकसित की गई है। अब यह न केवल भारत की सैन्य क्षमताओं का एक अभिन्न हिस्सा है, बल्कि भारत के डिफेंस निर्यात की पहचान भी बन रही है।

भारत ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात करने की दिशा में सफलतापूर्वक कदम बढ़ा चुका है। यह भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम "ब्रह्मोस एयरोस्पेस" द्वारा विकसित एक सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जो दुनिया की सबसे तेज क्रूज़ मिसाइलों में से एक मानी जाती है। यह भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट सेक्टर की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि इससे भारत विश्व के चुनिंदा मिसाइल निर्यातक देशों की सूची में शामिल हो गया है।

जनवरी 2022 में, भारत ने फिलीपींस के साथ लगभग $375 मिलियन (करीब 2700 करोड़ रुपये) का सौदा किया। इस सौदे के तहत भारत शिप-लॉन्च ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति कर रहा है। यह भारत की पहली बड़ी मिसाइल निर्यात डील है।

भारत लंबे समय से वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइल बेचने की दिशा में बातचीत कर रहा है। राजनीतिक और रणनीतिक कारणों से अब तक कोई अंतिम डील नहीं हुई है, लेकिन बातचीत आगे बढ़ रही है।

इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, यूएई, ब्राजील, अर्जेंटीना आदि देश — संभावित ग्राहक .भारत ने इन देशों को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की पेशकश की है। ब्रह्मोस के "लैंड, शिप और एयर वर्जन" को लेकर इन देशों में रुचि जताई गई है।

भारत के लिए ब्रह्मोस निर्यात क्यों महत्वपूर्ण है?

ब्रह्मोस निर्यात भारत की तकनीकी और सामरिक क्षमताओं को दर्शाता है। ब्रह्मोस जैसे हाई-एंड हथियारों के निर्यात से भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। दक्षिण चीन सागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत होती है। इससे "आत्मनिर्भर भारत" और "मेक इन इंडिया" की वैश्विक छवि सशक्त हो रही है।

आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

भारत का लक्ष्य है कि वह 2047 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बने और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इसमें एक प्रमुख स्तंभ बने। रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना न केवल विदेशी मुद्रा कमाने का जरिया है, बल्कि यह भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत करता है। इससे भारत की "सॉफ्ट पॉवर" और "स्ट्रैटेजिक पावर" दोनों को बढ़ावा मिलता है।

चुनौतियां और भविष्य की दिशा

भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा, तकनीकी आवश्यकताओं और लॉजिस्टिक्स जैसी चुनौतियों से जूझना होगा। लेकिन सरकार की रणनीतियाँ और निजी क्षेत्र की सक्रियता इस राह को आसान बना सकती हैं। इनसे निपटने के लिए भारत को अनुसंधान एवं विकास में निवेश, रक्षा स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन और वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करना होगा।

भारत का डिफेंस सेक्टर अब आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर वैश्विक योगदानकर्ता बनने की ओर अग्रसर है। बीते पांच वर्षों में जिस प्रकार से रक्षा निर्यात में उछाल आया है, वह न केवल तकनीकी प्रगति का प्रतीक है, बल्कि "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" पहल की सफलता भी दर्शाता है।

यदि यही गति बनी रही, तो निकट भविष्य में भारत रक्षा उत्पादों के लिए विश्व का प्रमुख निर्यातक बन सकता है- जो न केवल आर्थिक दृष्टि से, बल्कि रणनीतिक रूप से भी भारत को वैश्विक मानचित्र पर नई ऊँचाई प्रदान करेगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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