दोनों पसंदीदा टीमों- ब्राजील और अर्जेटीना की जर्सियां बिक रही हैं। फुटबॉल प्रेमियों के खुमार को देख कर लगता है कि विश्वकप का आयोजन कतर में नहीं बल्कि भारत में ही हो रहा है। फुटबॉल प्रेमियों ने विश्वकप के मैच देखने के लिए अपनी जीवनचर्या तक में बदलाव किया है। दफ्तर जाने वाले जहां शाम को मैच शुरू होने से पहले घर लौट रहे हैं वहीं घर से काम करने वाले लोग शाम सात बजे से पहले ही तमाम काम निपटा रहे हैं।
पसंदीदा टीमों के लिए हवन-पूजा
इस दौरान लोगों ने सोशल मीडिया से भी दूरी बना ली है। एक आईटी कंपनी में काम करने वाले शोभन चटर्जी कहते हैं, "घर से काम कर रहा हूं। मैं शाम छह बजे तक ही काम निपटा लेता हूं और मैंने विश्वकप चलने तक फेसबुक और व्हाट्सएप से भी दूरी बना ली है। अगले पांच सप्ताह यानी विश्वकप चलने तक लोगों ने सामाजिक मेलजोल भी कम कर दिया है। ब्राजील और अर्जेंटीना के समर्थकों ने अपनी-अपनी टीमों की जीत के लिए यज्ञ, हवन और पूजा भी आयोजित कर रहे हैं।
कोलकाता के मैदान इलाके में तमाम दुकानें विभिन्न टीमों की जर्सियों से पटी पड़ी हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मांग ब्राजील और अर्जेंटीना की जर्सियों और झंडों की ही है। एक जर्सी विक्रेता मोहम्मद नदीम बताते हैं, "पहले तीन दिनों में ही चार से ज्यादा जर्सियां बिक गई हैं। मैंने और जर्सियों के लिए ऑर्डर दे दिया है।"
भारत में ब्राजील के राजदूत आंद्रे अरान्हा कोरिया भी 28 नवंबर को ब्राजील और स्विट्जरलैंड के बीच होने वाले मैच देखने के लिए कोलकाता में रहेंगे।
कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के पूर्व कर्मचारी पन्नालाल चटर्जी अपनी पत्नी चैताली के साथ 1982 के स्पेन विश्वकप से ही हर बार विश्वकप देखने जाते रहे थे। इसके लिए वे पूरे चार साल तक रोजमर्रा के खर्चों में कटौती कर पैसे बचाते थे। वर्ष 2019 में 86 की उम्र में पन्नालाल का निधन हो गया। लेकिन उनकी पत्नी अब भी माराडोना के हैंड आफ गॉड वाले गोल का जिक्र करती हैं। दोनों पति-पत्नी उस मैच में स्टेडियम में मौजूद थे।
कोलकाता में अर्जेंटीना फुटबाल फैन क्लब के संस्थापक उत्तम साहा कहते हैं। यह महान खिलाड़ी मेसी का संभवतः आखिरी विश्वकप है। हमने उनकी फाइबर ग्लास की प्रतिमा बनवाई है। अगर मेसी अबकी विश्व कप नहीं जीत सके तो फुटबॉल का इतिहास अधूरा ही रहेगा।
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