राहत इंदौरी पढ़ाई के साथ- साथ खेलकूद में भी प्रवीण थे- फाइल फोटो
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राहत इंदौरी ने कुछ समय इंद्रकुमार कॉलेज, इंदौर में उर्दू साहित्य में अध्यापन भी किया। कॉलेज में विद्यार्थी उन्हें बहुत पसंद करते थे, जल्द ही वो मुशायरों में व्यस्त हो गए और पूरे भारत से और विदेशों से उन्हें मुशायरों के निमंत्रण मिलने शुरू हो गए।
उनकी अनमोल क्षमता, कड़ी लगन और शब्दों की कला की एक विशिष्ट शैली ने बहुत जल्दी ही उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया। तीन-चार साल में ही उनकी शायरी की खुशबू ने उन्हें उर्दू साहित्य की दुनिया में एक प्रसिद्ध शायर बना दिया था।
वह पढ़ाई के साथ- साथ खेलकूद में भी प्रवीण थे। वे स्कूल और कॉलेज स्तर पर फुटबॉल और हॉकी टीम के कप्तान भी थे। वह केवल 19 वर्ष के थे जब उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों में अपनी पहली शायरी सुनाई थी।
शुरुआत में राहत इंदौरी के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। उन्हें बहुत कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा। इसलिए उन्होंने 10 साल से भी कम उम्र में एक साइन पेंटर के रूप में काम करना शुरू कर दिया था।
चित्रकारी उन्हें खासा पसंद थी शायद इसी वजह से साइन बोर्ड की दुनिया में उनका एक अलग ही नाम बन गया था। यह भी एक दौर था कि ग्राहकों को राहत द्वारा चित्रित बोर्डों को पाने के लिए महीनों का इंतजार करना भी स्वीकार था।
राहत इंदौरी ने फिल्मों में भी गीत लिखे जो कि काफी लोकप्रिय हुए। उन्होंने पहला गीत फिल्म "सर " के लिए लिखा। इस फिल्म में संगीत दिया था अनु मलिक ने। इस फिल्म से राहत साहब और अनु मलिक की जो जोड़ी बनी वो कई फिल्मों में चली।
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