Exploring the Life of Butterflies
- फोटो : Rahul Kumar
हमारे छत पर कई तितलियों के होस्ट पौधे हैं जिसपर तितलियां अंडे देने आती रहती हैं। हमारे छत एक पारिस्थितिकी तंत्र है यहां तितलियों के अलावा कई तरह के जीव भी हैं जैसे शिकारी मकड़ी, बीटल और टिड्डा आदि जो मिलीबग और तितलियों के अंडों का शिकार कर लेते हैं, बाबजूद जो अंडे बचकर इल्ली का रूप लेते हैं। हम उसे वहां से हटाकर एक डब्बे में रखकर उसका देखभाल और पालन पोषण करते हैं।
डब्बे में वेंटिलेशन, चींटियों से सुरक्षा प्रदान करने के साथ के साथ इल्लियों को उसके होस्ट पौधे के पत्तियों को उपलब्ध कराना होता है जब तक कि वे प्यूपा के रूप में परिवर्तित ना हो जाएं।
एक दो सप्ताह में तितलियां अपने खोल तोड़कर डब्बे में दिख जाती हैं तो उसे छत पर प्राकृतिक आवास में आजाद कर देते हैं। इस कार्य में डब्बे में रोज एक बार जांच-पड़ताल करनी पड़ती है। यह बच्चों के लिए बहुत ही रोमांचक साबित होगा। इसे हम सभी को करना चाहिए। हमें तितलियों को खत्म होने से बचाना होगा क्योंकि यह परागण के द्वारा फूलों से परागण में मदद करती हैं, जिससे पौधों की वृद्धि और विकास होता है। यह कई तरह के शिकारी जीव जैसे छिपकली, गिरगिट और मेंढक का आहार बन पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखते हैं।
तितली बागवानी बनाने के लिए हमें तितलियों के होस्ट और फूलों वाले पौधे का रोपण करना होगा। हम इसके लिए प्लास्टिक के डब्बों आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। सितंबर माह में तितलियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पूरे माह तिलती माह के रूप में मनाया जाता है।
तितलियों का जीवनचक्र चार अवस्थाओं से होकर गुजरता है और कुछ ही हफ्तों में पूरा हो जाता है, पूरी प्रक्रिया को मेटामोरफोसिस कहते हैं। तितलियां गीली मिट्टी या गोबर से आवश्यक पोषक तत्व को ग्रहण करती हैं, इस प्रक्रिया को मड पडलिंग कहते हैं।
भारत की सबसे बड़ी तितली
पपीलिओनिडी तितली सबसे बड़े आकार की होती हैं और इनके डैने से पीछे की ओर दो पूछनुमा संरचना निकली होती है इसलिए इन्हें स्वालोटेल भी कहा जाता है। बर्डविंग तितली भारत की सबसे बड़ी तितली है जो पपीलिओनिडी परिवार से संबंध रखती है। निम्फालीडी तितलियों का सबसे बड़ा परिवार है जिसमे 6000 से अधिक प्रजाति हैं, इनके पिछले पैर पर बाल जैसी संरचना होने के कारण इन्हें ब्रश पैर वाले तितली भी कहा जाता है।
लाइकेनिडी परिवार की तितलियां आकार में छोटी होती हैं और सामान्यतः इनका रंग नीला होता है इस कारण से इन्हें सामान्य भाषा मे ब्लू भी बोलते हैं। पायरीडी के सदस्यों को सामान्यतः व्हाइट एन्ड येलो कहा जाता है, इसका कारण है को इनके सदस्य सफेद या पीले-नारंगी रंग के होते हैं।
हैस्पेरिडी को पूर्व में शलभ माना जाता था लेकिन इनके गुणधर्म तितलियों अधिक मेल खाते हैं जैसे की ये दिनचर होते हैं, आराम करते वक्त इनके डैने खड़े रहते हैं, फूलों से नेक्टर ग्रहण करने हेतु विकसित सूंड़ होते हैं। इन्हें सामान्यतः स्किपर कहा जाता है। रियोडीनीडी परिवार में जुड़ी शामिल हैं, इस परिवार में भारत में 16 प्रजाति पाए जाते हैं।
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