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जीवन धारा: लंबी दूरी भी छोटे-छोटे कदमों से पूरी होती है, असफलता से न डरने का सूत्र अहम

Wed, 23 Sep 2026 11:14 AM IST
ज्योति भास्कर ऑरिसन स्वेट मार्डेन।

सार

मंजिल की दूरी देखकर यात्रा छोड़ देना समझदारी नहीं है, क्योंकि लंबा सफर भी छोटे-छोटे कदमों से पूरा होता है। इसलिए, जीवन में छोटी-छोटी प्रगति को भी महत्व देना बेहद जरूरी है। 
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लंबी दूरी भी छोटे-छोटे कदमों से पूरी होती है - फोटो : अमर उजाला प्रिंट- ग्राफिक्स
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विस्तार
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जब मेरे सामने कोई कठिनाई आती है, तो मैं उसे अपनी कमजोरी का प्रमाण नहीं मानता। मैं उसे अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानने का अवसर मानता हूं। क्योंकि, आसान रास्ते पर चलकर हम मंजिल तक भले ही पहुंच जाएं, लेकिन कठिन रास्ता ही हमें यह सिखाता है कि हमारे भीतर कितना धैर्य और सामर्थ्य मौजूद है। इसलिए, कठिनाई से घबराने के बजाय मैं स्वयं से पूछता हूं कि यह परिस्थिति मुझे क्या सिखाने आई है? मैंने यह भी देखा है कि असफलता से अधिक खतरनाक असफलता का डर होता है। जब मनुष्य गिरने के भय से कदम ही नहीं उठाता, तब वह पहले ही हार जाता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति प्रयास करता है, वह असफल होकर भी कुछ न कुछ सीखता ही है। उसकी हर भूल उसे अगली कोशिश के लिए अधिक तैयार करती है। इसलिए, मैं असफलता को अंत नहीं, बल्कि अपनी यात्रा का एक पड़ाव समझता हूं।
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यदि आज मैं उस स्थान पर नहीं हूं, जहां मैं पहुंचना चाहता हूं, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वहां कभी पहुंच नहीं सकता। इसका मतलब है कि मुझे अभी और सीखना है, और मेहनत करनी है। मंजिल दूर दिखाई दे सकती है, पर दूरी देखकर यात्रा छोड़ देना समझदारी नहीं है, क्योंकि लंबी यात्रा भी छोटे-छोटे कदमों से पूरी होती है। इसीलिए, मैं अपने जीवन में छोटी प्रगति को भी महत्व देता हूं। और, हर दिन स्वयं को कल से थोड़ा बेहतर बनाने की कोशिश करता हूं। आज यदि मैं कल से अधिक अनुशासित हूं, अधिक धैर्यवान हूं और काम के प्रति अधिक ईमानदार हूं, तो मैं आगे बढ़ रहा हूं। यदि मैं पहले ही यह तय कर लूं कि मैं यह नहीं कर सकता, तो मेरी शक्ति प्रयास करने से पहले ही समाप्त हो जाएगी। लेकिन, यदि मैं स्वयं से कहूं कि मैं सीख सकता हूं, बदल सकता हूं और कोशिश कर सकता हूं, तो मेरे सामने संभावनाओं के नए रास्ते खुलने लगते हैं। इसलिए, मैं अपनी परिस्थितियों को दोष देने के बजाय अपने भीतर काम करना पसंद करता हूं। मैं अपनी आदतें सुधारता हूं, ज्ञान को बढ़ाता हूं और अपने उद्देश्य को स्पष्ट करता हूं। क्योंकि, परिस्थितियां बदलने में समय लग सकता है, पर स्वयं को बदलने की शुरुआत इसी क्षण की जा सकती है।

मैं अपनी परिस्थितियों से छोटा नहीं हूं। मैं अपनी असफलताओं से परिभाषित नहीं हूं। मेरी पहचान इस बात से बनेगी कि कठिन समय में मैंने क्या चुना-हार मानना या फिर एक कदम और आगे बढ़ना। इसलिए मैं आगे बढ़ता रहूंगा। धीरे चलूंगा, तो भी चलूंगा, गिरूंगा, तो फिर उठूंगा, लेकिन अपनी मंजिल की ओर बढ़ना नहीं छोड़ूंगा। क्योंकि, जीवन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं कि मैंने शुरुआत कहां से की थी, बल्कि यह है कि मैंने अपनी यात्रा को किस दिशा में आगे बढ़ाया।

-पुसिंग टू द फ्रंट के अनूदित अंश

सूत्र: असफलता से डरें नहीं

परिस्थितियां जैसी भी हों, स्वयं को कल से बेहतर बनाने का संकल्प ही सच्ची प्रगति है। खुद को कमजोर मानने के बजाय सीखने, बदलने और आगे बढ़ने का साहस रखिए। क्योंकि, जीवन में असफलता से अधिक घातक उसका भय है। हर दिन बढ़ाया गया एक छोटा कदम अंततः आपको आपकी मंजिल तक पहुंचा देता है।

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