1970 में अमेरिका से अर्थ डे की शुरुआत हुई।
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धरती के बारे में कुछ दिलचस्प बातें
- शोधकर्ताओं के मुताबिक हमारी धरती करीब साढ़े चार अरब साल पुरानी है। पृथ्वी का करीब 70 फीसदी हिस्सा जल और 30 फीसदी थल है। जिसपर हमारे घर, हरियाली,कारखाने जैसी चीजें हैं। पृथ्वी के अधिक हिस्से पर जल होने के कारण वह ऊपर से दिखने में नीले रंग का दिखता है। धरती पर पाए जाने वाले जल का 97 फीसदी खारा या नमकीन है। करीब 2 फीसदी पानी बर्फ की चादरों और ग्लेशियर के रूप में है और 1 फीसदी पानी ही हमें नदियों, झीलों या धरती के अंडरग्राउंड वॉटर के रूप में मिलती है, जिससे पूरी दुनिया की जरूरतें पूरी होती है। एशिया के खाते में पृथ्वी का 30 फीसदी जमीनी हिस्सा है, लेकिन दुनिया की आबादी का 60 फीसदी यहां बसा हुआ है।
क्या है अर्थ डे का इतिहास
- पहले पहल 1970 में अमेरिका से अर्थ डे की शुरुआत हुई। ऐसा तब हुआ जब तेल, धुएं और प्रदूषित नदियों को देखकर अमेरिका में करोड़ों लोग एक साथ सड़क पर विरोध प्रदर्शन में खड़े हो गए। यह पर्यावरण को लेकर दुनिया का पहला ऐसा प्रदर्शन था, जिसकी वजह से सरकार को जरूरी कदम उठाने पड़े। पर्यावरण बचाने के लिए कई समझौते हुए।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एजेंसियां बनी, जिनका काम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जरूरी कदम उठाना और सरकारों को सिफारिशें पेश करना है। लेकिन समय के साथ इनकी अनदेखी होने लगी जिसका परिणाम दुनिया महामारी, प्राकृतिक असंतुलन के रूप में भुगत रही है।
अभी से भी प्रकृति से लगाव की आदत डालें
- स्वीडन के स्कूलों में छोटे बच्चों को नियमित तौर पर जंगलों व हरे-भरे पार्क में घुमाने ले जाया जाता है। ताकि बचपन से ही उन्हें हरियाली, पर्यावरण और जीवन में पेड़ पौधों के महत्व का पता हो। गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को पौधे गिफ्ट किए जाते हैं, ताकि वे अपने घरों में उसकी देख-रेख करने की आदत डाल सकें।
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- यहां कोई भी सोसाइटी या टाउनशिप तैयार करते समय आस पास हरियाली को बरकरार रखना जरूरी होता है। वहीं जब कोई आपसे मिलने घर पर आए तो बुके की जगह पौधा या फिर पॉट में लगे फूल उपहार देना पसंद करते हैं। यह प्रकृति से उनके लगाव को दर्शाता है। ऐसी कई बातें दुनिया के दूसरे देशों में भी हुआ करती होंगी, जिसे सीखने और जीवन में अपनाने की जरूरत है।
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