पारंपरिक राजनीति से अलग शैली
मनमोहन सिंह की कार्यशैली अन्य नेताओं से बिल्कुल अलग थी। वे न तो लोकप्रिय नारों के सहारे राजनीति करते थे और न ही व्यक्तिगत आक्रामकता का सहारा लेते थे। उनकी राजनीति का आधार हमेशा नीतिगत निर्णय और दीर्घकालिक लाभ रहा। उन्होंने कभी भी स्वयं को व्यक्तिगत प्रचार के लिए प्रस्तुत नहीं किया। वे शांत और गंभीर स्वभाव के थे, लेकिन उनकी नीतियों और निर्णयों ने हमेशा प्रभाव छोड़ा।
उदाहरण के लिए, 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को पारित करवाने में उनका दृढ़ संकल्प दिखा, जबकि इसके लिए उन्हें काफी राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ा।
वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व
प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन सिंह ने वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया। उनकी शांत और सटीक कूटनीति ने भारत को एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में प्रस्तुत किया। जी-20, ब्रिक्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उन्होंने भारत के हितों को मजबूती से रखा। उनकी विशेषज्ञता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें "वैश्विक नेताओं में से एक महान विचारक" कहा था।
मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री बनने से पहले विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया। वे छात्रों के बीच एक आदर्श शिक्षक के रूप में प्रसिद्ध थे। उनका यह अनुभव प्रधानमंत्री के रूप में नीति-निर्माण में सहायक सिद्ध हुआ। उन्होंने अपनी सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों को हमेशा एक मार्गदर्शक के रूप में प्रेरित किया। मनमोहन सिंह का व्यक्तित्व राजनीति तक सीमित नहीं था।
वे एक विद्वान, शिक्षक और प्रशासक भी थे। प्रधानमंत्री बनने से पहले, उन्होंने योजना आयोग के उपाध्यक्ष, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर और वित्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। इन सभी भूमिकाओं में उनका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा।
मनमोहन सिंह अपने पूरे कार्यकाल में व्यक्तिगत विवादों से दूर रहे। हालांकि उनके कार्यकाल के दौरान कई घोटाले (जैसे 2जी स्पेक्ट्रम और कोयला आवंटन) सामने आए, लेकिन उनकी व्यक्तिगत ईमानदारी पर कभी कोई सवाल नहीं उठाया गया। विपक्ष ने उनकी चुप्पी की आलोचना की, लेकिन उनकी प्रतिबद्धता और नैतिकता पर कभी कोई संदेह नहीं हुआ।
उनके कार्यकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था ने अभूतपूर्व प्रगति की। 2004 से 2014 तक, भारत ने जीडीपी ग्रोथ में तेजी देखी, और करोड़ों लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठे। उन्होंने ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), शिक्षा के अधिकार और खाद्य सुरक्षा अधिनियम जैसे कई सामाजिक योजनाओं की शुरुआत की, जिससे भारत के आम नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर हुआ।
राजनीतिक संतुलन का अद्वितीय कौशल
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के प्रधानमंत्री के रूप में, उन्हें विभिन्न दलों और विचारधाराओं के साथ सामंजस्य स्थापित करना पड़ा। उनके नेतृत्व में यूपीए ने लगातार दो कार्यकाल पूरे किए, जो उनकी समन्वय क्षमता और धैर्य का प्रमाण है।
मनमोहन सिंह ने हमेशा मानवता और शांति को प्राथमिकता दी। उनके कार्यकाल में भारत-पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता शुरू हुई, और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए गए। हालांकि ये प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हुए, लेकिन उनकी मंशा पर कोई सवाल नहीं उठा सकता।
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