कर बचाना वैसे निवेशकों के लिए अधिक मायने रखता है, जो पुराने टैक्स स्लैब के तहत आयकर भुगतान करते हैं। कई लोग निवेश के उन साधनों को महत्व देते हैं, जिनमें कर बचत के साथ धन सृजन का भी मौका मिलता है। इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) एक ऐसा ही साधन है, जो दोनों लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करता है। यह एक प्रकार का म्यूचुअल फंड है, जो मुख्य रूप से इक्विटी या इक्विटी आधारित प्रतिभूतियों में निवेश करता है। बाजार में जुड़े होने के कारण ईएलएसएस में निवेश पर थोड़ा जोखिम रहता है। इसमें हर महीने न्यूनतम 500 रुपये से निवेश शुरू कर सकते हैं। निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं है।
ईएलएसएस फंड में निवेश पर आयकर कानून की धारा-80सी के तहत हर वित्त वर्ष में 1.50 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। अगर आप कर बचाने के लिए ईएलएसएस में पैसे लगा रहे हैं तो रणनीति के आधार पर निवेश रकम चुनें। ध्यान देने वाली बात है कि ईएलएसएस में निवेश पर छूट का लाभ उन्हीं लोगों को मिलता है, जिन्होंने पुराना कर स्लैब चुना है।
लॉक-इन अवधि को ऐसे समझें
ईएलएसएस फंड में तीन साल की छोटी लॉक-इन अवधि होती है। इसके बाद ही यूनिट को बेच या भुना सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपने अप्रैल, 2024 में तीन साल के लिए एसआईपी के जरिये ईएलएसएस फंड में 10,000 रुपये का निवेश किया तो इस मामले में तीन साल की लॉक-इन अवधि के अंत यानी एक मार्च, 2027 तक हर माह यूनिट खरीदी जाएगी। अगर अपनी सभी यूनिट को एक बार में भुनाना चाहते हैं तो इसके लिए एक मार्च, 2030 तक इंतजार करना होगा।
कैपिटल गेन्स पर लगेगा टैक्स
ईएलएसएस में निवेश पर एक वित्त वर्ष में पूंजीगत लाभ एक लाख रुपये से अधिक है तो 10 फीसदी लॉन्ग टर्न कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स चुकाना पड़ेगा। एक लाख तक का पूंजीगत लाभ करमुक्त है। अगर एक वित्त वर्ष में ईएलएसएस पर 1.10 लाख रुपये का पूंजीगत लाभ मिलता है तो आपको सिर्फ 10,000 रुपये पर ही 10 फीसदी एलटीसीजी कर देना होगा, जो 1,000 रुपये बनता है।
कर सकते हैं एसआईपी या एकमुश्त निवेश
आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंक बाजार का कहना है कि ईएलएसएस में एसआईपी या एकमुश्त निवेश कर सकते हैं। एसआईपी रुपये की औसत लागत का लाभ और समय के साथ पर्याप्त निवेश की अनुमति देता है। वहीं, एकमुश्त निवेश तब आदर्श होता है, जब आय बढ़ती रहे और आपको अतिरिक्त धन की तत्काल जरूरत न हो। हालांकि, किसी फंड में निवेश से पहले उसके प्रदर्शन, खर्च अनुपात व फंड मैनेजर के प्रदर्शन को जरूर देखें।