हाल ही में मेरे फोन पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘हैलो, मैं एंथम डेंटल से बोल रहा हूं। मैं आपको एक विशेषज्ञ से जोड़ने जा रहा हूं।’ मैं तुरंत समझ गया कि यह मेटा का एआई एजेंट एप ‘म्यूज’ बोल रहा है। क्योंकि, मैं भी इस एआई एजेंट का खूब उपयोग करता हूं। ठीक दस मिनट पहले, इसी एजेंट ने मेरी डेंटल बीमा देने वाली कंपनी को फोन किया था और बिल्कुल वैसे ही बात की थी, जैसा मैंने उसे करने के लिए कहा था। यह उन कई कामों में से एक था, जो मैंने पिछले दो हफ्तों में म्यूज से करवाए थे।
म्यूज आम लोगों के लिए बनाया गया शुरुआती एआई एजेंट है। यह इंटरनेट पर वेबसाइट बना सकता है, किसी अकाउंट में लॉगिन कर सकता है, कोई फॉर्म भर सकता है, स्प्रेडशीट तैयार कर सकता है और यहां तक कि आपकी ओर से फोन कॉल भी कर सकता है। मैंने अपने कई जरूरी काम म्यूज को इसीलिए सौंपे, ताकि यह समझ सकूं कि यह रोजमर्रा के कामों को कितना आसान बना सकता है और इसकी क्या सीमाएं हैं। मैंने इससे किराने का सामान मंगवाने, मीटिंग तय करने और गेम की सेटिंग्स बदलने जैसे कई काम करवाए।
मुझे सबसे ज्यादा हैरानी तब हुई, जब मैंने अपने क्रेडिट कार्ड म्यूज से जोड़े और उसे गूगल शीट्स में मेरे खर्चों का हिसाब रखने को कहा। कुछ ही मिनटों में उसने पूरा डाटा तैयार कर दिया। खास बात यह थी कि उसने दो ऐसे सब्सक्रिप्शन भी खोज निकाले, जिनके लिए मैं दो बार भुगतान कर रहा था। मेरी अनुमति से उसने उन्हें रद्द कर दिया। फिर, उसने मेरे ई-मेल के जरिये एक ऐसे अखबार के ट्रायल का रिफंड भी मांगा, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी थी। इससे मेरे 44.99 डॉलर भी बच गए। इस अनुभव से मुझे समझ आया कि एआई एजेंट सिर्फ सवालों के जवाब देने वाले चैटबॉट नहीं हैं। वे ऐसे काम भी कर सकते हैं, जिन्हें अब तक लोगों को खुद करना पड़ता था। मसलन, मैं पार्किंग टिकट की फोटो लेकर म्यूज को भेजता और वह मेरी ओर से उसका भुगतान कर देता। भुगतान से पहले वह मेरी अनुमति जरूर लेता था। काम करते समय मैं ब्राउजर की एक छोटी-सी विंडो में यह भी देख सकता था कि वह क्या कर रहा है। हालांकि, थर्ड-पार्टी वेबसाइटों पर साइन-इन करने में उसे मेरी मदद की जरूरत पड़ी।
म्यूज की ताकत और उससे जुड़े जोखिमों का पता मुझे तब चला, जब मैंने उसे फेसबुक मार्केटप्लेस पर अपने लिए खरीदारी और मोल-भाव करने के लिए कहा। मैंने उसे ऐसे सामान खोजने को कहा, जो बाजार में मिलने वाली कीमत से आधे या उससे भी कम दाम पर उपलब्ध हों। पर, इसी दौरान मुझसे एक गलती हो गई। म्यूज को भेजने के लिए लिखा गया एक संदेश गलती से एशली नाम के विक्रेता को चला गया। गलती एआई की नहीं, मेरी थी। इस छोटी-सी चूक ने मुझे एक बड़ी सीख दे दी। एआई हमारी जिंदगी को आसान बनाने के लिए काफी कुछ कर सकता है, लेकिन हमें यह ध्यान रखना होगा कि इस पर निर्भरता हमें लापरवाह न बना दे। यह काफी जोखिमपूर्ण भी हो सकता है।
मुझे म्यूज अब तक का सबसे उपयोगी एआई एप लगा। लेकिन, इसकी उपयोगिता के साथ एक बड़ा सवाल भी है और वह यह कि क्या हम अपने जरूरी कामों के लिए किसी एआई एजेंट को अपने बैंक खाते, ई-मेल और निजी जानकारी तक पहुंच देने को तैयार हैं? खासकर तब, जब मेटा जैसी कंपनी पर निजता और यूजर्स के डाटा की सुरक्षा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, एजेंटिक मार्केटिंग प्लेटफॉर्म अकॉस्टिक की सीनियर डायरेक्टर मेलिसा वाडासेरिल ने म्यूज की तुलना साल 2010 में लॉन्च हुए सिरी से की है। उनका कहना है कि सिरी के आने के बाद भी लोगों को यह समझने में वक्त लगा था कि वे इस तकनीक का इस्तेमाल किन-किन कामों के लिए कर सकते हैं। उनके मुताबिक, म्यूज का बाजार भी अभी शुरुआती दौर में है।
शायद निजता ही एआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। ये कई काम बेशक आसान बना सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें हमारी निजी जिंदगी, आदतों और जरूरी जानकारियों तक पहुंच देनी होगी। इसलिए, सवाल सिर्फ यह नहीं है कि एआई क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि हम किस सीमा तक खुद को एआई के हवाले करने को तैयार हैं?
हॉटपॉट एआई
इसका इस्तेमाल ग्राफिक्स बनाने, फोटो सुधारने और कंटेंट तैयार करने के लिए किया जाता है। इसमें आप अपनी पुरानी तस्वीर अपलोड करके उसे साफ और बेहतर बना सकते हैं। यह फोटो का धुंधलापन दूर करने, उसे शार्प बनाने तथा छोटे-मोटे दाग या खराब हिस्सों को सुधारने में मदद करता है। अगर आपके पास ब्लैक एंड व्हाइट फोटो है, तो इसका कलराइज फीचर उसे रंगीन बनाने में सहायता करता है। इससे पुरानी तस्वीरें पहले से ज्यादा साफ और जीवंत दिखाई देती हैं। इसका एक खास फीचर ‘डीप नॉस्टैल्जिया’ भी है, जो तस्वीर में मौजूद चेहरे को हल्का-सा हिलाकर ऐसा प्रभाव देता है, मानो फोटो में व्यक्ति जीवंत हो उठा हो।