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सोचने का काम तो चैटजीपीटी पर न छोड़िए: अब मशीन लर्निंग व डीप लर्निंग की मदद से भाषा का विश्लेषण, जानिए ये पहलू

Sat, 04 Oct 2025 07:28 AM IST
ज्योति भास्कर जेनी एंडरसन (साथ में रिबेका विन्थ्रॉप), द न्यूयॉर्क टाइम्स

सार

एआई टूल्स सावधानीपूर्वक डिजाइन किए जाते हैं, लेकिन ये तब मददगार नहीं रह जाते, जब वे बच्चों के लिए सोचने का काम शुरू कर देते हैं।
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एआई - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
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विस्तार
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अध्यापन और सीखने की प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर अपना प्रभाव छोड़ने को तैयार है। इस उम्मीद में कि एआई के टूल्स बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाएंगे, बड़ी व्यावसायिक कंपनियां भी इस दिशा में जुटी हैं। बीते जून में गूगल ने अपने एआई जेमिनी पर तीस नए शैक्षिक टूल्स शुरू किए, तो जुलाई के अंत में ओपन एआई ने भी चैटजीपीटी का स्टूडेंट-ट्यूटर स्टडी मोड पेश किया है।

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माता-पिता को सतर्क रहना चाहिए कि नई डिजिटल तकनीक बच्चों को सही ढंग से मिल पा रही है अथवा नहीं। 20 वर्ष से भी पहले सोशल मीडिया के आगमन के तुरंत बाद इसने युवाओं की भावनात्मक स्थिति पर कहर बरपा दिया था। एआई के साथ, बच्चों का केवल भावनात्मक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि उनका संज्ञानात्मक विकास भी खतरे में है। जब बात सोचने से बचने के लिए टूल्स के इस्तेमाल की हो, तो इसमें तो इन्सान माहिर है। सही भी है, जब जीपीएस नेविगेट कर सकता है, तो मैप का उपयोग क्यों किया जाए? जब चैटजीपीटी व जेमिनी सोचने के लिए उपलब्ध हों, तो छात्र अपने दिमाग का इस्तेमाल क्यों करें? लेकिन, जब बात सीखने की आती है, तो उसमें सोचना व संघर्ष करना अहम हो जाता है। इससे ही तो आलोचनात्मक ढंग से सोचने का कौशल आता है। जैसे कसरत करने से शरीर बनता है, वैसे ही सोचने से दिमाग का विकास होता है। यह खासकर उन छात्रों के लिए बेहद जरूरी है, जो शारीरिक-मानसिक विकास के दौर से गुजर रहे हैं।

कुछ एआई टूल सावधानीपूर्वक डिजाइन किए गए हैं और वे बच्चों को उनकी जिज्ञासा को समझने और सीखने की प्रक्रिया में निहित कमियों को दूर करने में मदद कर सकते हैं। ओपनएआई का दावा है कि चैटजीपीटी में स्टडी मोड इसी तरह से काम करता है। लेकिन ये टूल्स तब मददगार नहीं रह जाते, जब वे बच्चों के लिए सोचने का काम शुरू कर देते हैं। दिक्कत यह है कि कई बच्चे और युवा इसी उद्देश्य के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं। जब छात्र अपने निबंध या ऐसे ही किसी दूसरे काम के लिए चैटजीपीटी का उपयोग करते हैं, तो वे सीखने की क्षमता को कम कर रहे होते हैं। अगर कोई साइकिल, बच्चे को अपने ऊपर बैठाए और पैडल व हैंडल का नियंत्रण खुद ही करे, तो कोई बच्चा साइकिल चलाना कैसे सीखेगा? जब छात्र इतिहास के होमवर्क को पूरा करने के लिए जेमिनी या डीपसीक का उपयोग कर रहे होते हैं, तो वे उक्त ढंग की साइकिल की सवारी ही कर रहे होते हैं।
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एमआईटी के शोधकर्ताओं ने शोध किया कि एआई लेखन कौशल को कैसे प्रभावित करता है। उन्होंने 18 से 39 वर्ष की आयु के विश्वविद्यालय के छात्रों को तीन समूहों में विभाजित किया। एक ने शुरू से चैटजीपीटी के साथ लिखा, दूसरे ने खुद लिखा, लेकिन वे गूगल सर्च का उपयोग कर सकते थे और तीसरे समूह को किसी भी टूल का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी। बाद में, सभी छात्रों ने मदद के लिए चैटजीपीटी का उपयोग करके अपने लेखन को संशोधित किया। जिन लोगों ने शुरू से ही चैटजीपीटी के साथ लिखा, उनका लेखन सबसे खराब था। मस्तिष्क की जांच से पता चला कि उनके मस्तिष्क के सीखने से जुड़े हिस्से कम सक्रिय थे। उन्हें अपने लेखन को संशोधित करने में कठिनाई हुई, क्योंकि यह शुरू से ही उनका नहीं था। जिन प्रतिभागियों ने बगैर किसी सहायता के अपना काम तैयार किया, उन्होंने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। इस शोध ने यह दिखाया कि जब विश्वविद्यालयों के छात्र एआई के जोखिम से नहीं बच पा रहे, तो उनका क्या होगा, जिन्होंने अभी अपने सोचने का कौशल पूरी तरह से विकसित तक नहीं किया है। सीखने की एक प्रक्रिया होती है। सातवीं कक्षा में शिक्षक छात्रों को निबंध लेखन इस उम्मीद में नहीं सिखाते कि वे उच्च स्तरीय कला का सृजन करेंगे। छात्र निबंध लिखकर अपने विचारों को व्यवस्थित करना, साक्ष्यों का मूल्यांकन करना, तर्क गढ़ना और थीसिस प्रस्तुत करना सीखते हैं। जब एआई इस प्रक्रिया में बाधा डालता है, तब छात्र को एहसास तक नहीं होता कि एआई उनके आईक्यू का कितना नुकसान कर रहा है। माता-पिता की नजर ग्रेड पर होती है, लेकिन ग्रेड सीखने की क्षमता की आंशिक तस्वीर है और एआई इसे और कमजोर कर रहा है। अगर हम बच्चों को एआई का सही ढंग से इस्तेमाल करना नहीं सिखा रहे हैं, तो हम उनमें एक नए तरह की कमी को पैदा कर रहे हैं।

ग्रामरली
ग्रामरली एआई टूल मशीन लर्निंग व डीप लर्निंग की मदद से भाषा का विश्लेषण करता है। यह चौबीस घंटे एक शिक्षक के तौर पर यूजर की मदद के लिए तैयार रहता है। यह यूजर को अपनी भाषा शैली को समायोजित करने की सुविधा देता है, और जटिल वाक्यांशों को सरल बनाने के लिए शॉर्टकट सुझाता है। बुनियादी व्याकरण, वर्तनी और विराम चिह्नों की जांच के अलावा, यह संक्षिप्तता, लहजे और स्पष्टता के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करता है तथा विचार-मंथन और प्रारूपण में भी मदद करता है। इसमें ढेरों एक्सटेंशन और इंटीग्रेशन हैं, इसलिए यूजर इसे लगभग हर जगह इस्तेमाल कर सकते हैं, जहां भी टेक्स्ट बॉक्स का विकल्प हो।

©The New York Times 2025

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