इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने दुनियाभर के करीब 9,000 शहरों के तापमान और पेड़ों की सघनता से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि पेड़ ‘अर्बन हीट आइलैंड’ प्रभाव से पैदा होने वाली गर्मी को लगभग आधा कर देते हैं और कई शहरों में तापमान को 0.5 से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकते हैं। पेड़ प्रकृति के सबसे प्रभावी ‘नेचुरल एयर कंडीशनर’ माने जाते हैं। उनकी घनी छाया जमीन, सड़कों और इमारतों को सीधे सूरज की तपिश से बचाती है, जिससे डामर और कंक्रीट कम गर्म होते हैं। साथ ही, पेड़ अपने पत्तों के माध्यम से जलवाष्प छोड़ते हैं, जो आसपास की हवा को ठंडा करने में मदद करती है। यही कारण है कि गर्म दिनों में पेड़ों से घिरे इलाके अपेक्षाकृत अधिक ठंडे महसूस होते हैं। यही वजह है कि पेड़ों से भरपूर इलाके कई डिग्री तक ठंडे महसूस होते हैं। फिर भी, केवल पेड़ लगाना पर्याप्त नहीं होगा।
शोध के अनुसार, मौजूदा शहरी पेड़ इस सदी के मध्य तक जलवायु परिवर्तन से बढ़ने वाली अतिरिक्त गर्मी का केवल लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा ही कम कर पाएंगे। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण होने पर यह आंकड़ा 20 फीसदी तक पहुंच सकता है, पर समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसलिए, पेड़ों के साथ-साथ बेहतर शहरी डिजाइन भी जरूरी है। ऐसी निर्माण सामग्री का उपयोग, जो गर्मी कम सोखे और अधिक परावर्तित करे, हरित क्षेत्रों का विस्तार, हरित छतें, छायादार सड़कें और इमारतों के बीच बेहतर वायु प्रवाह जैसी रणनीतियां तापमान कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आखिरकार, पेड़ अद्भुत हैं, पर पूरी समस्या का समाधान अकेले नहीं कर सकते।
-साथ में, रॉब मैकडॉनल्ड और तीर्थंकर चक्रवर्ती (द कन्वर्सेशन)