वायु प्रदूषण की वजह से उत्तर भारत के लोगों की औसत उम्र सात साल कम हो रही है।
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हम सांस नहीं, जहर ले रहे हैं अपने भीतर, औसत उम्र हो रही है कम
शिकागो यूनिवर्सिटी की एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट रिपोर्ट में भारत की एयर क्वॉलिटी पर किए गए विश्लेषण में कहा गया है कि उत्तर भारत के लोगों की औसत उम्र सात साल कम हो रही है। इसकी वजह है कि साल 1998 से लेकर 2016 के बीच इस क्षेत्र में वायु प्रदूषण में 72 फीसदी का इजाफा हुआ है। इस वायु प्रदूषण में जीवाश्म ईधन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। ये ही वजह है कि एम्स में सबसे ज्यादा लोग हार्ट संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीज आ रहे हैें।
शुद्ध हवा के लिए राजनीति
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बच्चों से दिल्ली के वायु प्रदूषण को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को खत लिखने की सलाह दी है। जबकि केजरीवाल खुद केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को वायु प्रदूषण को लेकर खत लिख चुके हैं। जिसमें केंद्र सरकार से उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के लिए अपने स्तर पर पहल करने की गुहार लगाई गई है। जबकि दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी वायु प्रदूषण को लेकर केजरीवाल पर राजनीति करने का आरोप लगा चुके हैं। मनोज तिवारी केजरीवाल के मास्क बाटने पर भी सवाल खड़े कर चुके हैं।
भाजपा सांसद विजय गोयल तो वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली सरकार के खिलाफ एक दिन का अनशन भी रख चुके हैं। हालांकि जहां एक तरफ ईपीसीए का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण के लिए पराली कम ही जिम्मेदार है, वहीं दिल्ली के उप मुख्यमंत्री सिसोदिया का कहना है कि केंद्र सरकार उच्चतम न्यायालय में अपने एक हलफनामे में कह चुकी है कि दिल्ली में प्रदूषण की असली वजह पराली है।
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वायु के जहरीले स्तर पर पहुंचने को सही मायने में वो ही तबका झेल रहा है जो कि निम्न और मध्यवर्ग से आता है। इसमें बड़ी तादाद में मजदूर और कर्मचारी हैं। इसके अलावा, झुग्गी झोपड़ियों और कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लोग भी शामिल है। इनके घरों में ना ही एयर प्यूरीफायर है और न ही किसी आपात स्थिति में ये लोग झट से किसी बड़े अस्पताल जा सकते हैं। ऐसे में यहां रहने वाले बच्चे और बुजुर्गों की स्थिति वाकई में गंभीर है। घरों के भीतर रहा भी जाए तो कब तक और कब तक घर से बाहर न निकला जाए। आंखों में जलन, सिर में दर्द और सांस लेने में होने वाली तकलीफ घर से बाहर निकलने वाले हर शख्स के लिए आम हो गई है।
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