ऐसा नहीं कि भाजपा अपने तेजी से खिसकते जनाधार से बेखबर होगी।
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वर्तमान में अकेला बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भाजपा के हाथ में है और कर्नाटक में बड़ी मुश्किल से सत्ता वापस लौटी है।
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आगे भी असान नहीं भाजपा की राहें
वर्तमान में अकेला बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश भाजपा के हाथ में है और कर्नाटक में बड़ी मुश्किल से सत्ता वापस लौटी है। हरियाणा में सत्ता बचाने के लिए दुष्यन्त चौटाला की जननायक जनता पार्टी की बैसाखी का सहारा लेना पड़ा है।
बिहार, मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड और सिक्किम में दूसरे दलों के मुख्यमंत्रियों की छत्रछाया में भाजपा की राजनीति चल रही है, इसलिए आने वाला समय भाजपा के लिए काफी चुनौतियों भरा हो सकता है। आने वाले समय में असम, पश्चिम बंगाल और बिहार विधानसभाओं के चुनाव होने हैं।
दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल पर भाजपा के राष्ट्रवाद, सीएए, तीन तलाक और धारा 370 जैसे भावनात्मक हथियार वूमरैंग कर गए। इन्हीं हथियारों को अब तक ममता बनर्जी पर भी अपनाया जा रहा था।
इन परम्परागत आग्नेयास्त्रों के विफल होने पर ममता बनर्जी के लिए भाजपा को नए साजो-सामान की जरूरत होगी। असम में एनआरसी और सीएए के बवाल के कारण सत्ता बचाना आसान नहीं रह गया है, जबकि बिहार में नितीश कुमार का कोई भरोसा नहीं। हवा का रुख देख कर वह फिर अपने भतीजे से हाथ मिला सकते हैं।
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