देश में मौत के आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष के साथ-साथ विदेशी मीडिया आंकड़ों का डरावना ग्राफ पेश कर रहा है।
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आंकड़े नहीं वायरस दबाने का सच
विदेशी मीडिया में गंगा किनारे की वह तस्वीर पेश की गई है जिसमें शवों से रामनामी खींचते दिखाया गया है या रेत-मिट्टी डालते। दरअसल, यूपी-बिहार सीमा पर जब गंगा में कुछ शव उतराते नजर आए, तो संक्रमण रोकने के लिहाज से शवों पर रेत-मिट्टी डाली गई।
दरअसल, ये मौत के आंकड़े नहीं, वायरस दबाए जा रहे थे। मानसून भी सिर पर है और बारिश में गंगा का जलस्तर बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में उफनती गंगा के आसपास दफनाए शवों के नदी में उतराने का खतरा भी रहता। फिर यह भी साफ नहीं कि पानी से संक्रमण फैलता है या नहीं क्योंकि अभी लखनऊ के सीवर में संक्रमण पाया गया।
यूं भी कुंभ के बाद पानी में संक्रमण को लेकर अलग-अलग अध्ययन जारी है। मेडिकल के जानकार मानते हैं कि मौत के 24 घंटे बाद ही मुंह-नाक से ब्लैक फंगस या अन्य संक्रमण के खत्म होने की संभावना रहती है। जहां तक रामनामी हटाने का सवाल है, संक्रमण से मौत पर कुछ मामलों में जब परिजनों के ही मुंह फेर लेने की खबरें आ रही हैं, तो भला कौन गैर लाशों से रामनामी हटाने का जोखिम लेगा। उसे खुद का खतरा भी तो है। विदेशी मीडिया में अनुमानित परोसा जा रहा मौत का आंकड़ा चाहे जितना भयावह हो लेकिन जमीन पर उम्मीद जिंदा है।
डर के आगे जीत की उम्मीद
इन डरावने आंकड़ों के बीच डर के आगे जीत की उम्मीद जगी है। आंकड़ों के मुताबिक, 20 मार्च 2020 से 28 मई 2021 तक दोनों लहरों के दौरान अब तक 3 लाख 18 हजार 895 लोगों की मौत हुई है। कुल दो करोड़ 75 लाख 55 हजार 457 बीमार संक्रमित हुए तो इनमें से दो करोड़ 48 लाख 93 हजार 410 स्वस्थ्य भी हुए। 23 लाख 43 हजार 152 मरीजों का इलाज चल रहा है। उम्मीद जगाता आंकड़ा यह भी है कि कोरोना सेमृत्यु दर 1.15 फीसदी है जबकि रिकवरी रेट 90.34 फीसदी।
जाहिर है संक्रमण से लड़कर जीतने वाले ज्यादा हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह वक्त संक्रमण से मिलकर लड़ने का है या सियासी उठापटक का। टीकाकरण को लेकर सवाल उठना लाजिमी है लेकिन सरकार का दावा है कि दिसंबर तक देश में सभी को टीके लगा दिए जाएंगे। टीकाकरण में भारत दुनिया में अभी तीसरे नंबर पर है।
यदि दिसंबर तक सभी को टीके का लक्ष्य पूरा कर लिया जाता है तो सबसे तेजी से दुनिया में टीकाकरण के लिए भारत पहले पायदान पर पहुंच जाएगा। ऐसे में टीके को लेकर शुरू से ही सवाल खड़े करना, टीके के साथ मौत के आंकड़ों पर सियासी उलझन पैदा किया जाना शर्मनाक है। इन उलझनों से दूर हमें मुंह पर मास्क, दो गज की दूरी और बार-बार हाथ धोने का मंत्र याद रखना है। आएं मिलकर लड़ें, जीतें। ... क्योंकि डर के आगे जीत है।
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