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कोरोना और लॉकडाउन-3: फिल्म इंडस्ट्री के लिए मुश्किल का दौर, छोटे कलाकारों और कामगारों की कैसे चलेगी रोजी-रोटी

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bollywood film industry - फोटो : amar ujala
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फिल्म और टेलीविजन उद्योग, ग्लैमर, चमक-दमक और चकाचौंध से भरी एक सपनों की दुनियां,जहां हर हिंदुस्तानी अपने सपने को आकार देता है। फिल्मों व टीवी में दिखाए जाने वाले हीरोज लोगों के लिए वास्तविक दुनिया के हीरोज से बहुत बड़े होते हैं। लोग उनके बोलचाल की, फैशन की, रहन-सहन की, हर चीज की नकल करना चाहते हैं।

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अगर यह कहा जाए कि भारतीय जनमानस पर जिन चीजों का सबसे अधिक प्रभाव है उनमें सिनेमा और टीवी भी एक हैं तो अतिश्योक्ति नहीं है। बल्कि कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि हिंदुस्तान में दो ही भगवान हैं, सिनेमा और क्रिकेट। लेकिन क्या हम इस चकाचौंध के पीछे की असलियत से वाकिफ हैं?

आजादी के इतने सालों बाद भी और इतना फलने-फूलने के बावजूद भी 90% से अधिक फिल्म उद्योग असंगठित क्षेत्र में गिना जाता है। अर्थात् इसके 90% से अधिक कामगार दैनिक भत्ते पर काम करने वाले लोग हैं। इनके कल का कोई ठिकाना नहीं। जिस दिन शूटिंग बंद, आमदनी बंद। ना कोई पेंशन, ना कोई प्रोविडेंट फंड, ना ही कॉपीराइट, कुछ भी नहीं। किस दिन आप काम कर रहे हैं और किस दिन आपकी कमाई बंद हो जाएगी कोई नहीं जानता।
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बड़े से बड़े स्टार से लेकर स्पॉटबॉय तक सब का यही हाल है। इस फील्ड में जीने वाला हर आदमी एक अंधेरे, अनिश्चित भविष्य के साथ जीता है; भले ही वह सपने चांद तारे के देखता हो। इस समय जब कोरोना के कारण सारे देश में लॉकडाउन है, फिल्म व टीवी इंडस्ट्री में काम करने वालों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती ही जा रही है।

यहां काम करने वाले लोग ना तो मांग कर खा सकते हैं और ना ही किसी ऐसे वर्ग में आते हैं जिन्हें सरकारी सहायता पहुंच रही हो। आज 40 दिन से अधिक हो गए जब इस उद्योग से जुड़े हुए किसी भी आदमी की जेब में एक रुपए भी नहीं पहुंचे।

बिना कमाई के कोई कब तक जीवन यापन कर सकता है? प्रोड्यूसर भी बिना कमाई के कब तक लोगों को सैलरी दे सकता है? हमारी यूनियनें और कुछ बड़े-बड़े कलाकार, निर्माता एवं सभी समर्थ लोग  मदद के लिए अवश्य आगे आए हैं।

सब अपनी तरफ से भरपूर कोशिश कर रहे हैं कि फिल्म उद्योग का एक भी कामगार भूखा न सोये, लेकिन क्या सब तक यह मदद अनिश्चितकाल के लिए पहुंचाना संभव है? बिल्कुल नहीं। और इससे भी बड़ी समस्या यह है कि हालांकि अब लॉकडाउन धीरे- धीरे खुल रहा है लेकिन फिल्म उद्योग के दोबारा खुलने के आसार दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहे हैं।

एक जगह से दूसरी जगह यात्रा पर बंदिशें इतनी आसानी से हटने वाली नहीं है....

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म दिन दूना रात चौगुना तरक्की कर रहे हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
यह काम ही ऐसा है कि बिना भीड़भाड़ के होना लगभग असंभव है। एक यूनिट में कम से कम 50 लोग अलग-अलग जगहों से, अलग-अलग बस्तियों से, जो कि ज्यादातर झुग्गी -झोपड़ियां हैं, वहां से आते हैं। इनका एक जगह इकट्ठा होना सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाना है। इसलिए इनके काम का कोरोना के पूरी तरह से समाप्त हुए बिना शुरू होने की संभावना बहुत ही कम है। सिनेमा थिएटर का भी बिना भीड़-भाड़ के चलना लगभग असंभव है और दो-तीन महीने बाद जब कोरोना वायरस लगभग समाप्त हो जाएगा तब रिलीज के लिए इतने फिल्मों की लाइन लगी होगी कि उन्हें थिएटर मिलना मुश्किल हो जाएगा।

कितनी मेहनत से बनाई गई फिल्मों को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ेगा। एक जगह से दूसरी जगह यात्रा पर बंदिशें इतनी आसानी से हटने वाली नहीं है और इन बंदिशों के बिना अधूरी पड़ी फिल्मों की शूटिंग पूरी करना भी बहुत मुश्किल होगा। जो सीरियल्स लोग बड़े चाव से हर शाम बैठकर देखते थे, लॉकडाउन खत्म होने के बाद लोग उनकी कहानी भूल चुके होंगे। उन्हें वापस अपना पैर जमाने में अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।

लाॅकडाउन के कारण जब सामान ही नहीं बिक रहे हैं तो टीवी पर दिखाए जाने वाले विज्ञापन भी लगभग खत्म हो गए हैं, चैनलों की कमाई भी बंद पड़ी है, ऐसे में आने वाले समय में सीरियल्स के बजट पर क्या असर पड़ेगा यह भी कहना बहुत मुश्किल है। 

इस समय मनोरंजन की दुनिया से जुड़ा सिर्फ एक ही प्लेटफार्म है जो अच्छा कर रहा है और वह है ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे हॉटस्टार, नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम आदि आदि। लेकिन इन पर भी जो कॉन्टेंट है वह सब पुराना है, उसकी शूटिंग हो चुकी है।

नए कॉन्टेंट की तैयारी करके शूटिंग करना अभी बहुत दूर की बात है। यही हाल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े बाकी कई सारे उद्योगों का भी है, इससे जुड़ी पत्रिकाएं तथा ऑनलाइन मैगजीन्स भी बहुत ही दयनीय अवस्था में हैं। उनकी कमाई के साधन भी सूखते जा रहे हैं।

किंतु ऐसे समय में कुछ अच्छी बातें भी हुई हैं, जहां टीवी और सिनेमा पिछड़ गए हैं वहां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म दिन दूना रात चौगुना तरक्की कर रहे हैं। दूरदर्शन ने जनमानस के हृदय में पुनः अपनी जगह बनाई है।

रामायण, महाभारत, बुनियाद और इसके जैसे अन्य कई सीरियल्स ने एक बार पुनः यह साबित कर दिया है कि कहानी का सबसे बड़ा गुण उसकी भव्यता नहीं बल्कि सरलता से अपने दर्शकों के दिल में स्थान बना लेना है।
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लाॅकडाउन के समय अपने घरों में बंद जनता का सबसे बड़ा सहारा यह मनोरंजन उद्योग बहुत ही पीड़ा में है...

मनोरंजन उद्योग का प्राण उसके दर्शक हैं। - फोटो : फाइल फोटो
यह भी आशा है कि इस लॉकडाउन के दौरान जो लोग टीवी और फिल्मों का भाग्य निर्धारित करते हैं वह लोग इसकी गिरती गुणवत्ता के बारे में भी चिंतन करेंगे और इसके उत्थान के नए रास्ते ढूंढेंगे। इस फील्ड से जुड़े क्रिएटिव लोगों को भी, जो ना चाहते हुए भी रूटीन में फंस ही जाते हैं, उन्हें रूटीन से हटकर कुछ नया सोचने का अवसर मिलेगा जो अंततः हमारे टेलीविजन को समृद्ध ही करेगा।

आज इस लाॅकडाउन के समय अपने घरों में बंद जनता का सबसे बड़ा सहारा यह मनोरंजन उद्योग बहुत ही पीड़ा में है, लेकिन यह अपनी पीड़ा कभी आपके सामने जाहिर नहीं होने देता। यह खुद सारे दुख सह कर भी हमेशा आपके जीवन में खुशियां ही बिखेरता है।

आपको हंसाता है, आपको रुलाता है, इस दुख-दर्द की दुनिया से दूर सपनों की दुनिया में लेकर जाता है जहां आप मानव इतिहास की इस सबसे बड़ी त्रासदी को भी कुछ पलों के लिए भूल जाते हैं।

यह सुख में आपको जीवन की सच्चाईयों से परिचित करवाता है तो दुःख में आपको उससे लड़ने की ताकत भी देता है। यह आपको उत्साहित करता है, प्रेरणा देता है, अपनी अद्भुत कहानियों के माध्यम से नकारात्मकता से  हटाकर सकारात्मकता की ओर लेकर जाता है।

आज परिस्थितियों ने इसे घुटने के बल गिरा दिया है, लेकिन मनोरंजन उद्योग का प्राण उसके दर्शक हैं और जब तक इसे आपका साथ मिलता रहेगा तब तक यह हर मुसीबत से लड़ सकता है। यह फिर उठ खड़ा होगा, फिर आपका मनोरंजन करेगा और आज की तरह ही बड़े से बड़े संकट के समय में आप का सबसे बड़ा साथी होगा।

प्रसिद्ध अभिनेता स्टीव मार्टिन ने कहा है

'क्या आप जानते हैं कि आप की सबसे बड़ी समस्या क्या है? वो यह है कि आपने पर्याप्त फिल्में नहीं देखी। जिंदगी की सारी पहेलियों का हल फिल्मों में मिलता है'!

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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