कोरोना ने पूरी दुनिया में दहशत फैला दी है.
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दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जोर देकर कहा है यह एक चीनी वायरस है। वहां के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने भी रूस चीन और ईरान पर समय पर सही जानकारियां अमेरिका के साथ साझा न करने का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि इस बीमारी को वैश्विक महामारी बनने के पीछे इन्हीं देशों का हाथ है। रिपब्लिकन सांसद टॉम हेस्टर और राष्ट्रपति के रणनीतिक सलाहकार स्टीव बैनन ने भी इसी तरह के आरोप लगाए।
उनका कहना है इनके कुछ प्रयोगशालाओं में जिन जानवरों पर प्रयोग हो रहे थे उनमें से कुछ में यह वायरस था और बाद में उन्हें बाजार में पेश किया गया। इसी से यह वायरस मनुष्यों के बीच फैला। लेकिन चीन के विदेश विभाग ने कहां है कि नवंबर में चीन पहुंचने से पहले ही इस वायरस की वजह से सितंबर-अक्टूबर में अमेरिका में कुछ लोगों की मृत्यु इस वायरस की वजह से ही हुई। विदेश विभाग के प्रवक्ता ने अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के निदेशक रॉबर्ट रेडफील्ड की अमेरिकी संसद के सामने दी गई गवाही का वीडियो भी ट्वीट किया है।
इसमें रेडफील्ड मान रहे हैं कि सितंबर अक्टूबर में अमेरिका में जिन लोगों की मौत इन्फ्लूएंजा से हुई उनमें से कुछ लोग दरअसल कोविड-19 की वजह से मरे थे। इसका अर्थ है कि चीन से भी पहले यह वायरस अमेरिका में कई लोगों को शिकार बना चुका था। चीनी प्रवक्ता ने इस पर अमेरिका से सफाई मांगी है। हालांकि अभी तक अमेरिका नहीं इसका कोई उत्तर दिया नहीं है।
कोरोना वायरस को लेकर आमने-सामने हैं चीन अमेरिका
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उधर साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट जैसे बड़े चीनी मीडिया का दावा है कि अक्टूबर 2019 में वुहान शहर में आयोजित हुए विश्व सैन्य खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आए अमेरिकी सैनिकों ने इस वायरस को वुहान की स्थानीय सीफूड मार्केट में प्लांट कर दिया जहां से यह स्थानीय लोगों में फैल गया।
उनका आरोप है कि अमेरिका चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्य ताकत से चिंतित था और जब ट्रेड वॉर (अमेरिकी प्रतिबंध) भी उसे रोकने में असफल रहे तो उसने वैश्विक बाजार में चीन की प्रकृति को थामने के लिए यह वायरस फैला दिया। इसकी वजह से पिछले तीन महीने से लगभग पूरा चीन बंद पड़ा है। उसकी अर्थव्यवस्था को बड़ा धक्का पहुंचा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने एक बयान में सफाई देने के अंदाज में कहा कि यह चीन में पैदा हुआ वायरस है। लेकिन कुछ लोग इस वायरस की उत्पत्ति के पीछे अमेरिकी सेना पर दोष मढ़ रहे हैं। यह पूरी तरह गलत है। हम तो खुद इस वायरस के खिलाफ लड़ रहे हैं और बुरी तरह प्रभावित हैं। उन्होंने अमेरिकी जनता से अपील की युवा इस तरीके की अफवाहों पर विश्वास न करें। लेकिन मजेदार बातहै कि चीन ने किसी हद तक इस रोग पर काबू पा लिया है और अब उसके यहां सरकारी और निजी क्षेत्रों में काम फिर से शुरू हो गया है।
यहां तक कि चीन ने 82 देशों को कोरोना की टेस्टिंग किट, मास्क और सैनिटाइजर निर्यात करना शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और कोरोना के मरीजों की संख्या उसी अनुपात में बढ़ती जा रही है। अभी अमेरिका को इस पर काबू पाने में लंबा समय नहीं लगेगा। लेकिन यह बहस अभी और काफी समय तक चलेगी कि आखिर यह वायरस कनाडा की प्रयोगशाला से निकला अमेरिका के सैनिक होने चीन में प्लांट किया या प्राकृतिक रूप से पैदा हुआ।
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