कई जेलें लगातार बंदियों की सेहत को लेकर सचेत रही हैं
वैसे हर संकट के समय जेल भूमिका भी निभाती है। अभी कई जेलें मास्क बना रही हैं। तिहाड़ के बंदियों ने तो आगे बढ़कर दिल्ली पुलिस के लिए ढेर मास्क बना डाले हैं। मध्य प्रदेश की जेलों ने एक महीने में ही दो लाख मास्क बना कर तैयार कर दिए हैं और एक खेप को नासिक भी भेजा। मध्य प्रदेश के जेल महानिदेशक संजय चौधरी कहते हैं कि मध्य प्रदेश की जेलों ने इस आपदा के आते ही सबसे पहले अपने बंदियों और स्टाफ के लिए सैनिटाइजर बनाए। फिर इन्हें राज्य भर में महज साढ़े सात रूपए में बेचा गया।
उत्तर प्रदेश की जेलों के महानिदेशक आनंद कुमार बताते हैं कि राज्य ने साढ़े ग्यारह हजार बंदियों को रिहाई देने के साथ ही अब तक साढ़े तीन लाख मास्क तैयार कर लिए हैं। राज्य की 71 में से 67 जेलें इस समय मास्क तैयार कर रही हैं। उन्होंने इन बंदियों को बंदी वीर का नया नाम भी दे डाला है। ऐसा ही सराहनीय काम उत्तर प्रदेश, राजस्थान और केरल समेत कई राज्यों में हुआ है। ऐसे में जेलों को सिर्फ अपराधियों का जमावड़ा मानने की बजाय उन्हें राष्ट्र-निर्माण का सहयोगी भी माना जाना चाहिए।
कई जेलें लगातार बंदियों की सेहत को लेकर सचेत रही हैं। देशभर की जेलों में योग और स्वच्छता अभियान कार्यक्रम इसका प्रमाण हैं। प्रवचन और संदेश के अलावा बंदियों को उनके अपने विकास से जोड़े रखना जेल सुधार की एक बड़ी शर्त है। बांदा के जिला मेजिस्ट्रेट रहे हीरा लाल (आईएएस) कहते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में जिला जेल, बांदा में तुलसी और नीम के पत्तों के सेवन की परंपरा शुरु कर दी थी ताकि बंदी स्वस्थ रहें।
कुछ दिनों पहले तिनका तिनका मुहिम के तहत आगरा जेल रेडियो में जिला जेल, आगरा के सुपरिंटेडेंट शशिकांत मिश्रा और मैंने बंदियों जब बंदियों के साथ कोरोना से बचाव की घोषणाएं कीं, तब बंदियों के चेहरों पर चिंताएं थी। उनके पास अपनी बात पहुंचाने और सुनने का कोई और जरिया नहीं। यह समय जेल अधिकारियों के लिए भी मुश्किल का है लेकिन उनकी चिंताओं की गिनती भी कहीं नहीं होती। ऐसे में यह समय बंदियों और जेल स्टाफ के बारे में भी सोचने का है।
(डॉ. वर्तिका नन्दा जेल सुधारक हैं। वे देश की 1382 जेलों की अमानवीय स्थिति के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई का हिस्सा बनीं। जेलों पर एक अनूठी श्रृंखला- तिनका तिनका- की संस्थापक। दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल। तिनका तिनका तिहाड़ और तिनका तिनका डासना- जेलों पर उनकी चर्चित किताबें। 2019 में आगरा की जिला जेल में रेडियो की शुरुआत की।)
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