कामयाब होना है तो सबसे जरूरी है इच्छाशक्ति
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- इच्छाशक्ति को मरने नहीं दें
चाहे लॉक डाउन का समय हो या कोई अन्य। अगर कामयाब होना है तो सबसे जरूरी है इच्छाशक्ति। किसी काम को जब्जे से करने की इच्छा और उसमें सफल होने की चाहत।
मार्टिन मीडोज ने अपनी किताब ‘आत्म अनुशासन कैसे बनाएं’ में लिखा है कई लेखक जैसे कैली मेकगोनिगल और रॉय बॉईमेस्टर अपनी पुस्तकों में इच्छाशक्ति की एक सीमित स्त्रोत के रूप में व्याख्या करते हैं, जिसका सही प्रबंधन किए जाने की जरूरत है। उनकी शोध मुख्यतः माईमेस्टर की रिसर्च पर आधारित है, काफी मनोरंजक है-हमारी इच्छाशक्ति एक मांसपेशी की तरह काम करती है और हम इसे मजबूत भी बना सकते हैं और थका भी सकते हैं।
उनका यह मॉडल हमको बताता है कि हमारी इच्छाशकित हमारे खून में मौजूद शर्करा के स्तर पर निर्भर करती है। जब शर्करा का स्तर गिरता है तो उसके साथ ही हमारा खुद पर नियंत्रण भी कमजोर हो जाता है।
दूसरे शब्दों में भूखे लोगों में गलत निर्णय लेने की संभावना काफी अधिक होती है। अतः सबसे पहली प्राथिकता है कि लीडर अपने साथियों की काम करने इच्छाशक्ति को कभी मरने नहीं दें।
घरों की चार दीवारी के अंदर रहकर लगातार काम करना बहुत मुश्किल है।
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- साथियों की मनोदशा को समझें
पिछले काफी समय से लॉकडाउन चल रहा है। लॉक डाउन एक मनः स्थिति है। मन पल-पल बदलता है। मानव मन का स्वभाव है कि कुछ समय तक जो छुट्टी अच्छी लगती है वही समय बीतने के साथ हमारे लिए घातक सिद्ध होने लगती है।
लगातार एक जगह बैठने से मन उचटने लगता है। इसलिए टीम लीडर को अपने साथियों की मानसिक स्थिति और मनोदशा को समझना होगा। उसके हिसाब से उनसे बातचीत करें। उनको बताएं कि अपनी इच्छा शक्ति को मजबूत करें, उसके तरीके बताएं।
लीडर को समझना होगा कि वह खुद भी किन परिस्थितियों से गुजर रहा है। अतः दूसरों की स्थिति को समझने के लिए उनके पास धैर्य होना चाहिए।
- तारीफ करने में कंजूसी कैसी
घरों की चार दीवारी के अंदर रहकर लगातार काम करना बहुत मुश्किल है। कइयों के घर परिवार बड़ा होगा। किसी-किसी के घर में ऐसा माहौल नहीं होगा कि वह लीडर के मुताबिक काम कर सके।
कइयों के घर वाले कम पढ़े-लिखे होते हैं, वे इस बात को समझ नहीं पाते। भारत के संदर्भ में देखें तो ऐसे मामले ज्यादा होंगे। दूसरी तरफ लॉकडाउन के कारण काम भी कम ही हो पा रहा है।
अतः ऐसे समय में साथी जितना काम कर पाए, उसकी तारीफ कर, उसका उत्सावर्धन करें। उसके उतने किए काम के लिए उसका हौसला बढ़ाएं। क्योंकि वस्तुस्थिति से तो लीडर भी जानकार है। तारीफ सुनकर निश्चित ही वह अगली बार और उत्साह से काम करेगा।
साथियों के साथ रोजाना बातचीत करें।
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- बातचीत का सिलसिला जारी रखें
लीडर को समझना होगा कि यह समय बहुत ही क्रूशियल है। हर कोई मानसिक दवाब में काम कर रहा है। इस समय चौतरफा दवाब हर किसी पर है। कोशिश करें कि अपने साथियों के साथ रोजाना बातचीत करें।
बातचीत की शुरुआत उनकी सेहत और फिर घर परिवार से होते हुए काम तक आए, तो बेहतर होगा। सेहत के बार में पूछना नहीं भूलें। उसके बाद बिजनेस की बातचीत करें। साथ ही बातचीत में उनके काम और फिर उसके आगे की बात करें।
बातचीत करने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि एक तो रोजना के काम के बारे में पता चलेगा और दूसरी तरफ साथियों के मन में एक तरह का आत्म विश्वास भी आता है, कि उनके लीडर उनके साथ हैं।
लीडर का काम होता है कि वह किसी काम का नुक्श नहीं निकालें बल्कि साथियों को बताएं कि यह काम अगर ऐसे नहीं हो रहा है तो ऐसे करें। उनको नए-नए तरीके बताएं और करने के लिए प्रोत्साहित करें।
उनको लगातार देश और दुनिया में क्या हो रहा है, उनकी जानकारी दें और उनको भी इस तरह की चीजों को देखने के लिए प्रोत्साहित करें। तरीकों में बदलाव की स्वतंत्रता दें। यह तभी हो पाएगा जब आप लगातार उनसे बातचीत करेंगे। साथियों को इतनी स्वतंत्रता दें कि वे नए प्रयोग कर सकें।
अपने साथियों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहें
कई बार देखने में आता है कि साथियों को लगता है कि उनका लीडर केवल बातें ही करता है, जबकि मौका आने पर वह साथ नहीं देता या सहयोग नहीं करता। यह लॉकडाउन का समय है।
इस समय खास तौर पर लीडर को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनके साथी किसी भी बात से, किसी भी तरह से आपसे यह महसूस नहीं करें कि आप उनका सहयोग नहीं कर रहे। उनको इस समय सबसे ज्यादा आपकी जरूरत है, आपके सहयोग की जरूरत है।
असली नाविक की पहचान तो तूफान में ही होती है। इसलिए अपने साथियों के सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहें। ताकि वे भी आपका पूरा सहयोग करेंगे। एक-एक बूंद से ही सागर बनता है। तभी यह कहावत चरितार्थ होगा।
यह लॉक डाउन का तूफान है। लाखों-लाखों लोग इसकी चपेट में आए हुए हैं। लोग घरों में बंद हैं और घरों से ही अपने जीवन की नैया पार लगाने की कोशिश में लगे हैं। ऐसे में लीडर को सकारात्मकता का पतवार अपने हाथों में लेकर टीम का नेतृत्व करना होगा।
यह घबराने का समय नहीं यह मिल-जुल कर एक-दूसरे से कंधा से कंधा मिलाकर काम करने का समय है। अगर ऐसा करने में लीडर कामयाब हो गए, तो समझ लीजिए वे बाजी तो मार ही लेंगे साथ ही हर घर में खुशी होगी, हर घर में रोशनी होगी, हर घर में आनंद होगा। बिना परेशानी के कोरोना से पार पा लेंगे।
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