जलवायु परिवर्तन और इससे संबंधित चुनौतियां
किसानों के लिए जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती रही है क्योंकि यह उनकी उत्पादन क्षमता, खाद्य सुरक्षा और आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। जलवायु परिवर्तन से किसानों की जीवन स्थितियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्हें फसल की विफलता और पशुधन के नुकसान के तत्काल जोखिम का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन और शमन रणनीतियों के लिए किसानों की क्षमता कमजोर है।
छोटे और सीमांत किसान बड़े किसानों की तुलना में भूजल पर अधिक निर्भर करते हैं जो तेजी से घट रहा है। इसलिए उन्हें भविष्य में पानी के संबंध में और अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। अतः किसानों के लिए मौसम आधारित जल प्रबंधन महत्वपूर्ण है। सतही सिंचाई प्रणालियों में मौसम आधारित प्रबंधन करने की नितांत आवश्यकता है। एकीकृत कीट प्रबंधन जिसमें विभिन्न कीटों एवं रोगों की मौसम आधारित रोक-थाम के लिए भी किसानों की क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता है।
कृषि मौसम विज्ञान सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना जरूरी
किसानों के सामने आने वाले कई मुद्दों और चुनौतियों के बीच, उपयुक्त कृषि मौसम विज्ञान सेवाओं तक खराब पहुंच एक बड़ी बाधा है। इस कारण खेती के तरीकों में उपयुक्त मौसम संवेदनशील निर्णय जैसे कि बुवाई, निराई-गुड़ाई, इनपुट प्रबंधन, प्रौद्योगिकी उपयोग, भूमि और जल प्रबंधन इत्यादि प्रभावित होते हैं।
उपयुक्त कृषि मौसम सलाह सेवा प्रदान करने हेतु 'अंतिम मील' बाधा को संबोधित करने की आवश्यकता है क्योंकि सेवा का लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि कितने किसानों तक यह सूचना पहुंचती है। एक शोध के अनुसार सूचना के 24%, 50% और 100% किसानों तक पहुंचने पर राष्ट्र के किसानों द्वारा अर्जित आर्थिक लाभ क्रमशः 44,321, 92,335 तथा 1,84,671 करोड़ रुपये होगा। कृषि मौसम सलाह सेवाएं, आंकड़ों की उपलब्धता और गुणवत्ता और उनका विश्लेषण करने वाले सूचना उत्पादकों की क्षमता से प्रेरित होती हैं।
चूंकि यह सलाह कृषक समुदायों की आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव डालती है और खाद्य सुरक्षा में सुधार करती है, इसकी सूचना को उचित संदर्भ और स्थान विशिष्ट जानकारी सहित अंतिम उपयोगकर्ता किसानों तक उचित समय पर एवं सही भाषा में पहुंचानी आवश्यक है। इसके लिए सूचना-प्रसारण प्रोधोगिकी माध्यमों जैसे की रेडियो, टेलिविज़न, मुद्रण सामग्री, नवीनतम मोबाइल प्रौद्योगिकियों एवं सामाजिक मीडिया की सहायता ली जाती है।
सीमांत व मझोले किसानों और सबसे अधिक हाशिए वाले समुदायों तक पहुंचना बहुत बड़ी चुनौती है। यदि कार्रवाई योग्य जानकारी को उपयोगकर्ताओं तक न्यायसंगत और प्रभावी तरीके से संप्रेषित किया जाना है, तो यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कोई भी पीछे न छूटे। खाद्य एवं कृषि संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु सेवाओं पर अंतिम मील की पहुंच के लिए इन सेवाओं के निवेश में महत्वपूर्ण अंतर है। यह दुर्भाग्य की बात है।
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नोट- लेखक मौसम विज्ञान विभाग के पूर्व महा-निदेशक हैं।
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