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जलवायु परिवर्तन से चमगादड़ों के घरों पर संकट: 2070 तक घट सकते हैं 64% अनुकूल इलाके; गुफाएं मिलना भी मुश्किल

Thu, 29 Oct 2026 06:46 AM IST
शिवम गर्ग मैरिएट वैन डेर वाल्ट

सार

घटती प्रजनन दर और संवेदनशील जीवनशैली के बीच चमगादड़ों के प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहे हैं। लेकिन, असली चुनौती इससे कहीं बड़ी है।
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सिकुड़ रहे चमगादड़ों के ठिकाने - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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चमगादड़ अपने पर्यावरण में होने वाले बदलावों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। इसके कई कारण हैं। एक तो उनकी प्रजनन दर धीमी होती है। फिर, रहने के लिए वे गुफाओं जैसी जगह पर निर्भर होते हैं और साथ ही मौसम की कठोर परिस्थितियों के प्रति बेहद संवेदनशील भी। इस बात पर तो शोध हुआ है कि जलवायु परिवर्तन चमगादड़ों को कैसे प्रभावित करेगा, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया कि गुफाओं पर निर्भर रहने वाले चमगादड़, जलवायु के हिसाब से अनुकूल जगहों पर भी तब तक जीवित नहीं रह सकते, जब तक कि उन्हें वहां रहने के लिए उपयुक्त गुफाएं न मिलें।
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चमगादड़ों का अध्ययन करने के लिए मैंने और मेरे सहयोगी ने ‘मिनियोप्टेरिडे’ परिवार की लंबी उंगलियों वाले चमगादड़ों को अपने अध्ययन का आधार बनाया, जो गुफाओं में रहते हैं। ये पूरे अफ्रीका में पाए जाते हैं। नतीजे बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण इनके रहने के इलाके सिकुड़ रहे हैं और जिन जगहों पर भविष्य में भी अनुकूल परिस्थितियां बनी रहेंगी, वहां हो सकता है कि गुफाएं ही न हों। चमगादड़ कहां जीवित रह सकते हैं, इसका मॉडल तैयार करने के लिए हमने एक डाटाबेस का इस्तेमाल किया। फिर, यह जानने की कोशिश की कि अगर दुनिया का तापमान बढ़ता रहता है, तो 2070 के आसपास चमगादड़ों के लिए अनुकूल स्थितियां कहां मौजूद होंगी। हमने पाया कि 2061-2080 तक चमगादड़ों के लिए अनुकूल इलाकों में 36 से 64 फीसदी तक की कमी आ सकती है। जो इलाके अनुकूल बने रहेंगे, वे मुख्य रूप से दक्षिणी अफ्रीका और मेडागास्कर में केंद्रित हैं। पर, जिन इलाकों में उपयुक्त गुफाएं हैं, उनमें से केवल पांच फीसदी जगहों पर ही ऐसी जलवायु है, जो चमगादड़ों के लिए अनुकूल हो सकती है। बदलावों के प्रति स्थानीय क्षेत्र की संवेदनशीलता देखने पर यह आंकड़ा घटकर करीब दो फीसदी रह गया।

चमगादड़ अलग-अलग समय पर एक गुफा से दूसरी गुफा में जाते रहते हैं। यानी गुफाओं के बीच का इलाका भी मायने रखता है। हो सकता है कि कोई गुफा रहने के लिए एकदम सही जगह हो, पर अगर उसके आसपास का इलाका सड़कों, शहरों, खेती या अन्य बदलावों की वजह से टुकड़ों में बंट गया हो, तो किसी दूसरी सही गुफा तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो सकता है और उड़ने में ऊर्जा खर्च होती है। जो जानवर पहले से ही बदलती जलवायु का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह एक और बड़ी मुसीबत है। -द कन्वर्सेशन
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