जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव
- फोटो : तपन मुखर्जी
जीव-जंतुओं को खतरा
सुंदरबन दुनिया के कुछ अलबेले प्राणियों का भी घर हैं जैसे की मछुआरी बिल्ली, खारे पानी वाले मगरमच्छ, ओलिव रिडले टर्टल और गंगा नदी डॉलफिन। गंगा नदी डॉल्फिन या जिन्हें 'सुसु' भी कहा जाता है, भारत के राष्ट्रीय जलीय जीव हैं।
1879 से प्राप्त अभिलेखों के अनुसार, मीठे पानी में रहने वाले ये स्तनधारी जीव बंगाल की खाड़ी से लेकर हिमालय की तराई तक तैरते थे। एक समय था जब ये सुंदरबन में आमरूप से देखे जा सकते थे परन्तु अब क्योंकि मौसम के परिवर्तन के चलते पानी की लवणता बढ़ रही हैं, इनके आवास सिमटते जा रहे हैं।
पर क्या खारे पानी के मगरमच्छ अपनी संख्या बढ़ा पा रहे हैं? दुर्भाग्यवश, नहीं। इन मगरमच्छों को भी जीवित रहने के लिए और प्रजनन के लिए मीठे पानी के क्षेत्र की आवश्यकता होती है। उच्च तापमान अंडों के इनक्यूबेशन पर प्रभाव डालता है, जिससे बच्चे मगरमच्छों के लिंग अनुपात में असंतुलन हो सकता है।
यदि अंडों का तापमान 30°C से कम होता है, तो अधिकतर मादा, और 33°C या अधिक तापमान पर अधिकतर नर मगरमच्छ बनते हैं। पृथ्वी के बढ़ते तापमान का अर्थ हैं केवल नर मगरमच्छ।
सुंदरबन एक ऐसी प्राकृतिक धरोहर हैं जिसे हम अपनी तकनिकी काबिलियत के बावजूद कभी कृत्रिम रूप से नहीं बना पाएंगे। पर इस बढ़ते संकट से अब भी जुझा जा सकता है। मैन्ग्रोव वनों का पुनरोपण और संरक्षण, कटाव और लवणता को नियंत्रित करने के लिए टिकाऊ जल और भूमि प्रबंधन, स्थानीय लोगों की भागीदारी आज उस वन को बचा सकते है जिसने सदियों से इस क्षेत्र को बचा कर रखा है।
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