78 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक चंद्रभूषण जी अपने बेटे के साथ रहते हैं। एक दिन, बाजार में सब्जी खरीदते हुए उन्हें एक अनजान कॉल आया- ’सर, आपका बैंक अकाउंट हैक हो गया है, ओटीपी बताइए।’ भोले चंद्रभूषण जी ने ओटीपी शेयर कर दिया और अगले ही पल उनके खाते से 50,000 रुपये गायब। यह कहानी सिर्फ चंद्रभूषण जी की नहीं है, बल्कि डिजिटल पेमेंट की दुनिया में धोखाधड़ी के शिकार भारत के लाखों वरिष्ठ नागरिकों की हकीकत है। ऐसे में ‘यूपीआई सर्किल’ नाम का फीचर वरिष्ठ नागरिकों के लिए काम का साबित हो सकता है।
क्या है यूपीआई सर्किल:
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने यूपीआई को अधिक सुलभ व सुरक्षित बनाने के लिए ‘यूपीआई सर्किल’ फीचर पेश किया है। यह प्राइमरी यूजर (जिसके पास बैंक खाता है) को यह सुविधा देता है कि वह किसी सेकंडरी यूजर (जैसे परिवार के सदस्य) को अपने बैंक खाते से पेमेंट करने की अनुमति दे, वह भी बैंक अकाउंट से जुड़ी कोई जानकारी या ओटीपी साझा किए बगैर।
कैसे काम करता है:
फीचर चालू करने के लिए प्राइमरी यूजर यूपीआई सर्किल सेक्शन पर जाकर सेकंडरी यूजर को आईडी/क्यूआर के जरिये इनवाइट लिंक भेजता है, फिर ट्रांजेक्शन लिमिट तय करता है। इनवाइट स्वीकार होते ही सर्किल बन जाता है।
बुजुर्गों को धोखाधड़ी से ऐसे बचाएगा:
ठग अक्सर बुजुर्गों से फोन पर पिन, ओटीपी या बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगकर ठगते हैं। यूपीआई सर्किल में प्राइमरी यूजर, सेकंडरी को जोड़ता है और सेकंडरी पेमेंट कर सकता है। उदाहरण के लिए, चंद्रभूषण जी अपने बेटे को सेकंडरी यूजर के रूप में जोड़ सकते हैं, इस स्थिति में उनके सारे छोटे भुगतान उनका बेटा अपने यूपीआई से कर सकता है। इससे उन्हें किसी तीसरे व्यक्ति को पिन साझा करने की जरूरत नहीं होगी। फिशिंग या स्कैम कॉल से बचाव हो सकता है। इसके अलावा, यूपीआई सर्किल के पार्शियल डेलिगेशन मोड में सेकंडरी यूजर को यूपीआई से पेमेंट करने के लिए प्राइमरी यूजर की अनुमति चाहिए। साथ ही, प्राइमरी यूजर के पास यह विकल्प होता है कि वह सेकंडरी यूजर के लिए मासिक सीमा तय कर सकता है। इससे एक निर्धारित सीमा से अधिक का भुगतान अपने आप रुक जाता है। यूपीआई सर्किल से नकदी लेकर चलने की बुजुर्गों की जरूरत खत्म हो सकती है। बच्चे/परिवार वाले दूर रहते हैं, तो भी बुजुर्गों के खर्चे आसानी से मैनेज कर सकते हैं। बुजुर्ग खुद छोटे भुगतान कर सकते हैं, पर नियंत्रण परिवार के पास रहता है। सेकंडरी यूजर को क्यूआर कोड स्कैनिंग या कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल होने पर ही जोड़ा जा सकता है, मोबाइल नंबर डालकर नहीं। इससे धोखाधड़ी वाले खातों को जुड़ने से रोकने में मदद मिलती है।
सीमाएं और नियम
प्राइमरी यूजर इस फीचर के तहत अधिकतम पांच लोग या डिवाइस जोड़ सकता है। एक सेकंडरी यूजर सिर्फ एक ही प्राइमरी यूजर से जुड़ सकता है। इस फीचर में फुल डेलिगेशन और पार्शियल डेलिगेशन के दो विकल्प मिलते हैं। फुल डेलिगेशन में सेकेंडरी यूजर बिना प्राइमरी यूजर की मंजूरी के भुगतान कर सकता है, पर महीने में खर्च की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये प्रति डिवाइस और प्रति लेन-देन की सीमा 5,000 रुपये प्रति डिवाइस है। वहीं, पार्शियल डेलिगेशन में सेकंडरी यूजर को हर लेन-देन के लिए प्राइमरी यूजर की इजाजत की जरूरत होती है। प्राइमरी यूजर अपना यूपीआई पिन डालकर लेनदेन करता है।
ठगी से बचाएगी सावधानी
अंतरराष्ट्रीय साइबर वक्ता एवं इन्वेस्टिगेटर कामाक्षी शर्मा बताती हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद वरिष्ठ नागरिकों के पास बड़ी रकम मौजूद होती है। इसी वजह से ठग उन्हें निशाना बनाते हैं। ज्यादातर ठगी व्हॉट्सएप व टेलीग्राम से होती है। इससे बचाव के लिए अनजान नंबर की कॉल वेरिफाई करने के बाद ही बात करें। ओटीपी, पिन, पासवर्ड कभी किसी के साथ साझा न करें। अनजान लिंक या एप पर क्लिक/डाउनलोड न करें। 10-15 हजार रुपये से बड़ा लेन-देन करने से पहले बच्चों को बताएं। बच्चे अभिभावकों के लिए यूपीआई सर्किल इस्तेमाल करें या ट्रांजेक्शन लिमिट सेट करें।
जरूरी बातें
प्राइमरी यूजर के पास यह सुविधा है कि वह यूपीआई सर्किल के तहत किए गए लेन-देन के अधिकार को कभी भी वापस ले सकता है। सेंकडरी यूजर के हर लेन-देन पर प्राइमरी यूजर नजर रख सकता है। पहले 24 घंटों के लिए 2,000 रुपये की सीमा है। केवाईसी अपडेट हमेशा बैंक से कराएं।
- पवन पांडेय
जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।