भिन्न एप्स पर मौजूद 15 से 90 सेकंड के शॉर्ट वीडियो 18 साल से कम उम्र के लाखों बच्चों को लगातार अपनी ओर खींच रहे हैं। ये छोटे-छोटे वीडियो बच्चों को इतना लुभाते हैं कि वे घंटों उसी में डूबे रहते हैं, खासकर तब, जब उनके शरीर और मन को आराम की जरूरत होती है। स्क्रीन से निकलने वाली तेज रोशनी नींद की लय को नियंत्रित करने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के स्राव को धीमा कर देती है, जिससे सो पाना कठिन हो जाता है। इसके अलावा, तेज-रफ्तार कंटेंट के भावनात्मक उतार-चढ़ाव दिमाग को शांत नहीं रहने देते।
एक अध्ययन बताता है कि किशोरों में शॉर्ट वीडियो का अत्यधिक उपयोग खराब नींद और बढ़ी हुई सामाजिक घबराहट से जुड़ा होता है। नींद की ये गड़बड़ियां आगे चलकर मिजाज, मानसिक लचीलेपन और याददाश्त को प्रभावित करती हैं। इसके अलावा, बच्चे लोकप्रियता, दिखावा या सफलता के नकली मानकों को अपनाने लगते हैं, जो अक्सर कम आत्म-सम्मान और बढ़ती चिंता से जुड़े होते हैं। शोध बताते हैं कि ऐसे कंटेंट छोटे बच्चों के लिए ज्यादा नुकसानदेह हैं। शॉर्ट कंटेंट बच्चों के विकसित हो रहे दिमाग को परेशान करने वाले होते हैं। जिन बच्चों में घबराहट, एकाग्रता में कमी या भावनात्मक अस्थिरता होती है, वे इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
तनाव, पारिवारिक अस्थिरता या अनिद्रा से जूझ रहे बच्चे देर रात तक मोबाइल चलाते रहते हैं। अक्सर जब हर शांत पल को त्वरित मनोरंजन से भर दिया जाता है, तो बच्चे सपने देखने, खेलने, परिवार में बातचीत करने या अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से जाहिर करने का अवसर खो देते हैं, जिससे धीरे-धीरे उनकी क्षमताएं कमजोर पड़ने लगती हैं।
घर में खुला और ईमानदार संवाद बच्चों को अपनी स्क्रीन आदतों को समझने और उन्हें बेहतर दिशा देने में मदद कर सकता है। माता-पिता बच्चों के साथ मिलकर वीडियो देख सकते हैं, और उनसे चर्चा कर सकते हैं कि अमुक वीडियो ने उन्हें क्यों आकर्षित किया। सरल पारिवारिक नियम बनाना, जैसे सोतेे समय डिवाइस बेडरूम से बाहर रखना या मोबाइल देखने का समय निर्धारित करना और देर रात तक स्क्रॉलिंग की आदत को कम करने में सहायक हो सकता है। साथ ही, ऑफलाइन गतिविधियों, को बढ़ावा देना एक स्वस्थ व संतुलित जीवनशैली बनाए रखने में मदद करता है। शॉर्ट वीडियो रचनात्मक, मनोरंजक और सुकून देने वाले हो सकते हैं, पर इसमें माता-पिता का सहयोग जरूरी है, ताकि बच्चे उनका आनंद अपनी भलाई से कोई समझौता किए बिना उठा सकें।
अविकारिणमपि सज्जनम्
अनिशमनार्यः प्रबाधतेऽत्यर्थम्।
कमलिन्या किमिह कृतं
हिमस्य यत्तां सदा दहति॥
दुष्ट मनुष्य सदा सज्जन को कष्ट देता है, भले ही उस सज्जन ने उसका कोई अपकार नहीं किया हो। जैसे, किसी कमलिनी ने पाले (तुषार) का क्या बिगाड़ा है कि (सर्दी की रात्रि में) पाला ही उसे मार डालता है।
वल्लभदेव संपादित
सुभाषितावली (409)