सबसे बड़ी गैर जिम्मेदारी मुख्य चुनाव अधिकारी ने दिखाई। संवेदनहीन रवैया दिखाते हुए उन्होंने एक चैनल पर कहा कि 19 हजार मशीनों में से 562 खराब हो गईं तो क्या बड़ी बात है। अगर एक मतदाता भी केंद्र पर जाकर मतदान से वंचित हो जाता है तो यह भारी भूल है। वहां तो डेढ़ दो लाख मतदाता मतदान केंद्रों से लौट गए। इसके बाद अधिकारी कहते हैं कि भले ही दो घंटे मतदान रुका रहा हो। खत्म तो पांच बजे ही करना होगा। ऐसे सामंती नौकरशाह अधिकारी का रवैया समझ से परे है।
चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने रायपुर में और दिल्ली में पार्टी के प्रदेश प्रभारी पी एल पूनिया ने चुनाव आयोग से मिलकर शिकायतें दर्ज कराई। बघेल ने तो उन मतदान केंद्रों का प्रमाण सहित हवाला दिया ,जहाँ मशीनें खराब हुई थी। बघेल का कहना है कि कांग्रेस की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत थी और पिछले चुनावों का रिकॉर्ड भी इसकी पुष्टि करता है। सवाल यह उठता है कि पिछले चुनाव में दोनों बड़ी पार्टियों के बीच सिर्फ 0.7 फीसदी मतों का अंतर था। ऐसे में बड़े पैमाने पर मशीनों की खराबी से संदेह भरे सवाल उठने लाजिमी हैं। कोई षड्यंत्र न भी हो तो स्वस्थ्य लोकतंत्र का तकाजा यही है कि एक भी मतदाता को अपने अधिकार से वंचित न रहना पड़े। अफसोस छत्तीसगढ़ ने इस मामले में जिम्मेदारी भरा आचरण नहीं किया है।