कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हुए।
- फोटो : Independence day India
इसे स्वतंत्रता दिवस मनाने का जज़्बा कहिए या फिर परदेस में लोगों के क़रीब आने और घुलने-मिलने का मौक़ा कहिए, बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उन्होंने सबकुछ वैसे ही करने की कोशिश की जो कि बचपन से अबतक हमलोग स्वतंत्रता दिवस पर देखते आ रहे हैं। लेकिन झंडा फहराने के समय को लेकर मैं थोड़ा अचरज थी, क्योंकि हमारे यहां तो तड़के झंडा फहराया जाता है। इसपर समूह के एक सदस्य ने कहा कि उन्होंने तिरंगा लहराने और राष्ट्रगान के प्रोटोकॉल के बारे में बारीकी से जानकारी हासिल की है, साथ ही भारतीय दूतावास को भी संज्ञान में लिया है।
दरअसल झंडा फहराने का काम सायं से पहले यानी सूर्यास्त से पहले होता है। और आजकल स्वीडन में सूर्यास्त का समय साढ़े आठ बजे के इर्द-गिर्द होता है। इसलिए किसी को दिक़्क़त नहीं हुई।
वहीं दूसरी ओर भारतीय दूतावास में भी बड़ीं संख्या में लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए स्वतंत्रता दिवस को धूमधाम से मनाया। लोगों से पता चला कि यहां के छोटे-छोटे भारतीय समूहों की ओर से भी स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा है। एक समूह का जज़्बा यह था कि भारतीय झंडे को ख़ासतौर पर हिंदुस्तान से मंगाया गया। लोग तिरंगे वाली स्टीकर, छोटे-बड़े झंडे भी भारत से मंगाने लगे हैं।
अमूमन यहां रहने वाले भारतीय समूहों के व्हाट्सएप ग्रुप या फ़ेसबुक ग्रुप में लोग भारत से दवाइयां, काग़ज़ या फिर किसी ख़ास काम की चीज़ लाने के लिए एक दूसरे से पूछते हैं। लेकिन अब स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे झंडे, स्टीकर या फिर ऐसे ही कुछ दूसरी चीज़ों को मंगाने का अनुग्रह भी किया जाने लगा है।
विदेशों में बस रहे मिनी इंडिया में इस बात पर ज़ोर था कि उनके बच्चे देश के गौरवशाली अतीत को जाने। शायद यही वजह है कि इस दिन का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी देशभक्ति से ओतप्रोत था। इस मौक़े पर जलेबी, गुलाब जामुन या बूंदी के लड्डू खाने की रस्म अदायगी भी ख़ूब हुई।
स्वीडन के एक ऐसे ही भारतीय समूह के स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा मैं भी बनी। जहां मुझे मिनी इंडिया की झलक देखने को मिली। रंगारंग कार्यक्रमों में देश की एकता की झलक और गौरवशाली अतीत के बखान सुनने को मिले। हालांकि देश की मौजूदा सामाजिक -आर्थिक स्थिति को लेकर लोग चिंतित भी थे।
इनसब के बीच स्वतंत्रता दिवस को साल दर साल बड़े पैमाने पर मनाने और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसमें शामिल करने के प्रयासों पर मंथन होता रहा। यहां रहने वाले भारतीयों का यह उल्लास है कि वे आज से ही अगले साल के आज़ादी पर्व मनाने की तैयारी पर विचार मंथन कर रहे हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।